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Israel Vs Lebanon: इजराइल ने मिनटों में तबाह कर दिए लेबनान के पूरे गांव, वीडियो देख दहल जाएगा दिल!


International

oi-Sumit Jha

Israel Lebanon Conflict: इजराइल और लेबनान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान की कोशिशों के बावजूद, दो हफ्ते के युद्धविराम का असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। इजराइल की सेना ने दक्षिणी लेबनान के गांवों में भारी बमबारी की है, जिससे सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।

‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने सीमाई इलाकों में बड़े पैमाने पर विस्फोट किए हैं, जिससे कई गांव पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके घर और यादें सब कुछ खत्म हो चुका है, और वहां अब सिर्फ तबाही का मंजर बचा है।

Lebanon Village Destroyed


Lebanon Village Destroyed: गांवों की तबाही और वायरल वीडियो

इजराइली सेना ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा किए हैं, जिनमें तैबेह, नकौरा और देर सेरियन जैसे गांवों में भीषण धमाके होते देखे जा सकते हैं। इन धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि पूरे के पूरे रिहायशी इलाके जमींदोज हो गए। हालांकि अभी तक इन क्षेत्रों की नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने नहीं आई हैं, लेकिन लेबनानी मीडिया और वहां के नागरिकों का दावा है कि इजराइल ने जानबूझकर घरों को निशाना बनाया है ताकि वहां दोबारा जीवन न पनप सके।

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सैन्य रणनीति या ‘डोमिसाइड’?

इजराइल के रक्षा मंत्री का कहना है कि उत्तरी इजराइल की सुरक्षा के लिए सीमा पर बने इन घरों को तोड़ना जरूरी है। इस कार्रवाई की तुलना गाजा के रफाह और बेत हनौन से की जा रही है, जहां 90% घर तबाह कर दिए गए थे। जानकारों ने इसे ‘डोमिसाइड’ का नाम दिया है, जिसका मतलब है किसी आबादी के रहने की जगह को पूरी तरह खत्म कर देना। मानवाधिकार संगठनों ने इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है और इसे अंधाधुंध तबाही करार दिया है।

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हिजबुल्लाह के ठिकानों का दावा

इजराइली सेना (IDF) ने अपनी सफाई में कहा है कि वे नागरिकों को नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। उनका दावा है कि हिजबुल्लाह ने रिहायशी मकानों के नीचे सुरंगें और हथियार डिपो बना रखे हैं। इजराइल का कहना है कि जब तक इन ठिकानों को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जाता, तब तक उनके अपने नागरिकों पर खतरा बना रहेगा। इसी तर्क के साथ इजराइल दक्षिणी लेबनान के गांवों में घुसकर ऑपरेशन चला रहा है।

विस्थापन और भविष्य का संकट

इजराइल की योजना दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर वहां ‘बफर जोन’ बनाने की है। लिटानी नदी तक के इलाके को सुरक्षा घेरे में लेने की बात कही जा रही है। इसका सीधा असर वहां रहने वाले आम लोगों पर पड़ रहा है। लाखों लोग अपना घर छोड़ चुके हैं और इजराइल ने उन्हें फिलहाल वापस लौटने की इजाजत नहीं दी है। अगर हमले इसी तरह जारी रहे, तो यह विस्थापन एक लंबे मानवीय संकट में बदल सकता है।



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‘मैं अपना चेहरा नहीं दिखा सकती’, तालाक पर जश्‍न मनाने वाली मेरठ की प्रणिता बुरी तरह टूटी, डिप्रेशन में पहुंची


Uttar Pradesh

oi-Bhavna Pandey

Meerut Pranita Vashishtha Divorce Case: मेरठ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। तलाक के बाद जहां अक्सर महिलाएं चुपचाप घर लौटती हैं, वहीं यहां एक पिता ने अपनी बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। लेकिन पिता का अपनी बेटी को डिप्रेशन से निकालने के इस तरीके ने बेटी की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।

ढोल-नगाड़ों के साथ बेटी का जज पिता ने किया था स्वागत

याद रहे मेरठ के रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता का तलाक के बाद घर वापसी पर जोरदार स्वागत किया था। ढोल-नगाड़े बजे, मिठाइयां बांटी गईं और पिता ने साफ कहा-“बेटा और बेटी बराबर होते हैं।” उनका मकसद था कि बेटी को तलाक के सदमे से बाहर निकाला जाए।

Meerut Pranitha Vashishtha

“मुझे लगता है कि मैं अपना चेहरा नहीं दिखा सकती”

पति से तालाक लेकर घर लौटने का जश्न मनाते हुए वीडियो वायरल हुआ और प्रणिता को सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है। कुछ लोगों ने पिता के कदम की तारीफ की, वहीं बड़ी संख्या में ट्रोलिंग भी शुरू हो गई। ट्रोलिंग का शिकार प्रणिता ने अब अपने हालिया इंटरव्‍यू में रोते हुए कहा है कि मुझे लगता है कि मैं अपना चेहरा नहीं दिखा सकती।

ट्रोलिंग से बुरी तरह टूट गईं हैं प्रणिता

पिता ने बताया लगातार ट्रोलिंग और विवाद से प्रणिता मानसिक रूप से काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि जिस एंग्जायटी और डिप्रेशन से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी, वह फिर से मेंटल ट्रामा लौट आया है। टोलर्स ने ट्रोल करके प्रणिता को ड्रिपेशन में ढकेला।

ससुराल वालों और पूर्व पति ने लगाए आरोप

बेटी के घर टूटने के जश्न को लेकर रिटायर्ड ज‍ज पिता तक की आलोचना हुई। प्रणिता के ससुराल वालों ने भी उन पर कई आरोप लगाए। प्रणिता के परिवार ने आरोप लगाया कि उनके पूर्व पति और ससुर ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक बातें कही और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की। वहीं, प्रतिणा के पूर्व पति मेजर गौरव भी मीडिया के सामने आए और उन्होंने प्रणिता के परिवार पर सवाल उठाए। इससे विवाद और गहरा गया।

मानसिक तनाव से जूझ रही प्रणिता ने

वहीं प्रणिता और उनके पिता ने मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा है, जिसमें उन्होंने ससुराल वालों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का नहीं रह गया, बल्कि समाज में महिलाओं, तलाक और उनकी इज्जत को लेकर सोच पर भी सवाल खड़े कर रहा है-क्या एक बेटी का अपने घर लौटना आज भी इतना बड़ा मुद्दा है?

कौन है प्रणिता? क्‍यों टूटी शादी?

मेरठ निवासी प्रणिता की शादी साल 2018 में शाहजहांपुर के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। दोनों का एक बेटा भी है। शादी के कुछ समय बाद ही रिश्ते में खटास आने लगी और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। हाल ही में अदालत ने दोनों को तलाक की मंजूरी दे दी।

जज पिता करेंगे अब केस

प्रणिता के पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सेना के अधिकारियों और जालंधर आर्मी कैंट थाने में शिकायत की मांग की है। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ी तो वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि समाज में एक महिला या बेटी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 (जो मौलिक अधिकारों और गरिमा के साथ जीने के अधिकार से संबंधित हैं) का सीधा उल्लंघन है। इसी आधार पर अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मानहानि का वाद दायर किया जा रहा है। उन्होंने दूसरे पक्ष से अपनी जान को खतरा भी बताया है और इस संबंध में एसएसपी मेरठ को आवश्यक सूचना देने की बात कही है।



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Magnum Opus: अलविदा सुरों की जादूगरनी! जब आशा की आवाज़ ने खामोशी को भी संगीत बना दिया


India

oi-Keshav Karna

आज सुरों की दुनिया का वो सूरज ढल गया, जिसने अपनी सुरमई रौशनी से न जाने कितनी पीढ़ियों का सांगितिक शृंगार किया था। आशा भोसले सिर्फ एक नाम नहीं, एक एहसास है। एक ऐसी धड़कन, जो रेडियो, टेप रिकॉर्डर और आज की प्लेलिस्ट तक, हर दौर में हमारे साथ धड़कती रही। जब उनकी आवाज़ गूंजती थी, तो वक्त ठहर जाता था। आज, जब वो खामोश हुई हैं, तो ऐसा लगता है जैसे संगीत के सातों सुर कुछ पल के लिए सहम गए हों। जैसे घर का कोई अपना कोना खाली हो गया हो।

लता दीदी और आशा ताई हिंदी सिनेमा के आसमान में दो ऐसे सितारे थे, जिनसे संगीत की मुकम्मल तस्वीर बनती थी। आशा ताई का संगीत का सफ़र लता दीदी के अज़ीमो-तवील साये में ज़रूर रहा मगर वो बर-अक्स भी थी और बेमिसाल भी। आशा जी की अपनी ज़मीन थी, अपना आसमान-जहां वो नियम नहीं मानती थीं, बल्कि खुद नियम बनाती थीं।

Asha Bhosle Passes Away

वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है, लेकिन आशा जी की आवाज़ उन विरले चमत्कारों में थी जो समय को भी मात दे देती थी। 60 के दशक की चंचलता हो, 70 के दशक की मादकता या 90 के दशक की नफ़ासत, उन्होंने हर दौर को अपनी मनोहारी आवाज़ से नया अर्थ दिया। आज, उनकी उस जादुई विरासत के तीन ऐसे पहलुओं को याद करते हैं, जिन्होंने उन्हें “एक गायिका” से “एक युग” बना दिया।

मदहोशी, मर्यादा और वो रूहानी कशिश

आशा जी की आवाज़ में एक अनोखी “लचक” थी-एक ऐसा नशा, जो बिना शराब के मदहोश कर दे, लेकिन जिसमें कभी भी सस्तापन नहीं था। उनकी आवाज़ में सेंसुअसिटी थी, पर साथ ही एक क्लास, एक तहज़ीब भी।

जब “दिल चीज़ क्या है…”, “इन आँखों की मस्ती…” या “हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी…” जैसे गीत बजते हैं, तो पर्दे पर दिखती अदाकारा से ज़्यादा असर उनकी आवाज़ छोड़ती है। तवायफ़ के किरदारों को उन्होंने सिर्फ गाया नहीं, उन्हें जिया। उनकी आवाज़ उस किरदार की रूह बन जाती थी – दर्द, नज़ाकत और अदाओं का ऐसा संगम, जो सीधे दिल में उतर जाता था।

“महबूबा-महबूबा….” से लेकर “पिया तू अब तो आजा…” , “ओ हसीना ज़ुल्फों वाली….” “ये मेरा दिल….” , “आ जाने जां…” तक ऐसे नगमों की एक लंबी फेहरिस्त है जब आशा जी की आवाज़ पर्दे पर कैबरे से ज़्यादा मादकता छोड़ जाती है। रुपहले पर्दे पर नर्तकी के लटके-झटके, अदाओं और एक्स्प्रेशन में जो आकर्षण हुआ करता था, उसमें चुंबकत्व आशा ताई के सुरों की सरगम से आता था। मौसिक़ी की मामूली समझ रखनेवाला भी उनकी आवाज़ को सुनता नहीं बल्कि महसूस करता है।

हर रंग में ढल जाने की बेमिसाल कला

अगर लता मंगेशकर की आवाज़ गंगा की तरह निर्मल थी, तो आशा मंगेशकर की आवाज़ समंदर की तरह अनंत थी-जिसमें हर लहर एक नया रंग लेकर आती थी। “पिया तू अब तो आजा” में वो शरारत थीं, “दम मारो दम” में वो बगावत थीं, “चुरा लिया है तुमने” में वो मोहब्बत की फुसफुसाहट थीं। “कजरा मोहब्बत वाला…” की नाटकीयता, “झुमका गिरा रे की…” कथात्मकता, या ‘सुन-सुन-सुन दीदी तेरे लिए….” की चंचलता हो – आशा भोसले की हरफनमौला आवाज़ गाने को जीवंत बना देती है।

60 के दशक में शुरु हुआ सफर जब नब्बे के आखिर में “मुझको हुई न खबर…” गाती है तो एक बार फिर वही खनकता हुआ जादू क्रिएट हो जाता है। उन्होंने हर अंदाज़ को अपनी पहचान बना लिया। ओ.पी. नैयर की चंचल धुनों से लेकर आर.डी. बर्मन के वेस्टर्न एक्सपेरिमेंट तक-हर जगह उन्होंने खुद को ढाला, लेकिन कभी खोया नहीं। उन्होंने इंडी-पॉप गाया, नए संगीतकारों के साथ प्रयोग किए और अपनी आवाज़ को हमेशा ताज़ा बनाए रखा। गाँव की चौपाल से लेकर शहर के डिस्को तक, उनकी आवाज़ हर जगह फिट बैठती थी। सांगितिक विरासत की धनी आशा ताई शास्त्रीय गायन में पारंगत जरूर थीं, लेकिन वे मेथड-सिंगर नहीं थी। कोई स्टिरियोटायप उनके गायन की रेंज को बांधकर नहीं रख सका, वो हर युग की सुनहरी आवाज़ थीं, हर दौर में बेजोड़।

जब ‘साँस’ भी सुर बन गई

संगीत की दुनिया में कहा जाता है कि कुछ लोग गाते हैं, और कुछ लोग सुरों में सांस लेते हैं। आशा जी दूसरी श्रेणी में थीं। उनकी आवाज़ की वो ‘ब्रेथी क्वालिटी’-जहाँ शब्दों के बीच की हल्की सी सांस भी एक एहसास बन जाती थी, उन्हें सबसे अलग बनाती थी। वो महज तकनीक से नहीं, दिल से गाती थीं। हर गीत में एक निजीपन होता था, हर धुन में एक तदात्मयता, हर आलाप में एक संवाद – गोया वो हर श्रोता से अलग-अलग बात कर रही हों। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज़ कभी किताबी नहीं, हमेशा अपनी सी लगी।

Asha Bhosle - Magnum Opus

संघर्ष के सोपान से सफलता के शीर्ष तक

एक छोटी बच्ची, जिसने पिता के निधन के बाद घर चलाने के लिए गाना शुरू किया-वहीं बच्ची आगे चलकर भारतीय संगीत की सबसे बड़ी पहचान बन गई। तीन बच्चों की माँ होने के साथ-साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियो में घंटों खड़े होकर जिस तरह उन्होंने अपनी कला को तराशा, वो आज के कलाकारों के लिए एक मिसाल है। लेकिन उनके सुरों में जितनी रंगिनिया‍ँ हैं, उनके जीवन में उतना ही एकाकीपन। असफल प्रेमसबंध, दो विवाह, संतान को खो देना… अपनी आवाज़ से लोगों के दिलों में मस्ती भर देने वाली आशा जी ने अपने जीवन में दुखों का समंदर भी देखा था।

एक युग का अंत: रिक्तता और अमर यादें

“हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर कोई पैदा।”

यह सच है कि कुदरत लता और आशा जैसे हुनरमंद इंसान सदियों में एक बार ही इस धरती पर भेजती है। उनकी जगह न कोई ले पाया है, न ही शायद कोई ले पाएगा। यह वो शून्य है जिसे कोई भी आधुनिक तकनीक या नया कलाकार नहीं भर सकता।

आज देश के हर छोटे कस्बे, हर गाँव और हर शहर की गलियों में एक अजीब सी उदासी है।आशा जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वो अपनी हज़ारों धड़कती हुई आवाज़ों के रूप में हमारे पास मौजूद रहेंगी। जब तक दुनिया में इश्क रहेगा, जब तक विरह रहेगा और जब तक पैर धुनों पर थिरकते रहेंगे, आशा भोंसले हमारे कानों में अपनी उसी ‘सेंसुअस’ और जादुई आवाज़ में गुनगुनाती रहेंगी। जाते-जाते बस इतना ही कह सकते हैं: “अभी न जाओ छोड़कर, कि दिल अभी भरा नहीं…



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MI vs RCB: विराट कोहली ने मुंबई में रच दिया इतिहास, दुनिया में पहली बार हुआ अनोखा कारनामा


Cricket

oi-Naveen Sharma

MI vs RCB: विराट कोहली ने एक बार फिर आईपीएल में इतिहास रच दिया है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलते हुए एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जो आज तक कोई भी बल्लेबाज़ हासिल नहीं कर सका था। इस मुकाबले में कोहली ने मुंबई इंडियंस के गेंदबाजों की धुनाई कर दी।

उन्होंने मुंबई के खिलाफ अपने 1000 रन पूरे किए और वे किसी एक टीम के खिलाफ इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए। इस लिस्ट में टॉप बल्लेबाज केएल राहुल थे, जिनको अब विराट कोहली ने पछाड़ दिया है।

mi vs rcb

हाल ही में विराट कोहली ने टी20 क्रिकेट में इतिहास रचते हुए एक नया कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ अपने कुल रन 1,188 तक पहुंचा दिए और इस तरह किसी एक टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बन गए। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने केकेआर के खिलाफ 1,161 रन बनाए थे।

बड़े कीर्तिमान की तरफ कोहली

विराट कोहली आईपीएल में एक बड़े कीर्तिमान की तरफ बढ़ रहे हैं। कोहली ने पहले ही 8800 रनों का आंकड़ा हासिल कर लिया है और अब 9000 रनों से महज 200 रन ही दूर हैं। अगर ऐसा होता है, तो वह आईपीएल में इस कीर्तिमान तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी बन जाएंगे। यह धाकड़ कीर्तिमान वह इसी सीजन में हासिल कर लेंगे।

विराट कोहली ने 50 रनों की पारी खेली। मुंबई इंडियंस के खिलाफ उनका यह सातवां अर्धशतक है। मुंबई के विरुद्ध सबसे ज्यादा फिफ्टी जड़ने वाले बल्लेबाज का नाम केएल राहुल है। राहुल ने यह कारनामा कुल 9 बार किया है, उनके अलावा सुरेश रैना, डेविड वॉर्नर ने 7-7 बार मुंबई के खिलाफ फिफ्टी जमाई है।

रजत पाटीदार की फिफ्टी

कोहली के अलावा रजत पाटीदार ने भी धांसू अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए बेहतरीन फिफ्टी जमाई। उन्होंने महज 19 गेंदों में ही अर्धशतक जमा डाली। वह आरसीबी के लिए सबसे तेज फिफ्टी जड़ने वाले प्लेयर्स में जगह बना ली। आरसीबी के लिए सबसे तेज फिफ्टी रोमारियो शेफर्ड के नाम है, उन्होंने 14 गेंदों में चेन्नई के खिलाफ अर्धशतक जमाया था।



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ये है दुनिया का सबसे बड़ा होटल, 7000 से ज्यादा कमरे, गिनीज रिकॉर्ड में नाम


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World Largest Hotel: मलेशिया के जेंटिंग हाइलैंड्स में स्थित ‘फर्स्ट वर्ल्ड होटल’ दुनिया का सबसे बड़ा होटल है. इसके दो रंग-बिरंगे टावरों में कुल 7,351 कमरे हैं, जिसके लिए इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. इस होटल में एक कसीनो, थीम पार्क, शॉपिंग मॉल और खाने-पीने के कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं.

3 स्टार होटल जहां रुकने का सपना किसी का नहीं होता है, वहीं एक 3 स्टार होटल ऐसा भी है, जिसके आगे लग्जरी होटल भी फेल हैं. यदि आपको वर्ल्ड फेमस चीजों को एक्सप्लोर करने का शौक रखते हैं, तो यहां आपको जरूर जाना चाहिए.

दुनिया में कई बड़े होटल हैं जो अपनी लग्जरी के लिए मशहूर हैं. लेकिन अगर कमरों की संख्या देखें तो 'फर्स्ट वर्ल्ड होटल एंड प्लाजा' का कोई मुकाबला नहीं है. यह सिर्फ एक साधारण 3-स्टार होटल है. इसके बावजूद, यह आज भी दुनिया का सबसे बड़ा होटल होने का रिकॉर्ड अपने नाम रखता है.

दुनिया में कई बड़े होटल हैं जो अपनी लग्जरी के लिए मशहूर हैं. लेकिन अगर कमरों की संख्या देखें तो ‘फर्स्ट वर्ल्ड होटल एंड प्लाजा’ का कोई मुकाबला नहीं है. यह सिर्फ एक साधारण 3-स्टार होटल है. इसके बावजूद, यह आज भी दुनिया का सबसे बड़ा होटल होने का रिकॉर्ड अपने नाम रखता है.

यह होटल 2006 में खोला गया था. उस समय इसमें 6118 कमरे थे. दो साल बाद लास वेगास में 'द वेनिशियन रिसॉर्ट' 7128 कमरों के साथ खुला, जिससे यह होटल दूसरे स्थान पर चला गया. लेकिन 2015 में 'फर्स्ट वर्ल्ड होटल एंड प्लाजा' ने दूसरा टावर बनाकर फिर से दुनिया के सबसे बड़े होटल का खिताब हासिल कर लिया. 7,351 कमरों के साथ यह खिताब आज भी इसके पास है.

यह होटल 2006 में खोला गया था. उस समय इसमें 6118 कमरे थे. दो साल बाद लास वेगास में ‘द वेनिशियन रिसॉर्ट’ 7128 कमरों के साथ खुला, जिससे यह होटल दूसरे स्थान पर चला गया. लेकिन 2015 में ‘फर्स्ट वर्ल्ड होटल एंड प्लाजा’ ने दूसरा टावर बनाकर फिर से दुनिया के सबसे बड़े होटल का खिताब हासिल कर लिया. 7,351 कमरों के साथ यह खिताब आज भी इसके पास है.

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जेंटिंग ग्रुप द्वारा निर्मित यह होटल, मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर, पहांग क्षेत्र के जेंटिंग हाइलैंड्स में स्थित है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया का एक प्रमुख मनोरंजन केंद्र है. हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं. होटल लगभग हमेशा भरा रहता है. कोरोना से पहले, इसकी औसत ऑक्यूपेंसी दर लगभग 90% थी. आज भी, अधिकांश कमरे बुक रहते हैं.

जेंटिंग ग्रुप द्वारा निर्मित यह होटल, मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर, पहांग क्षेत्र के जेंटिंग हाइलैंड्स में स्थित है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया का एक प्रमुख मनोरंजन केंद्र है. हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं. होटल लगभग हमेशा भरा रहता है. कोरोना से पहले, इसकी औसत ऑक्यूपेंसी दर लगभग 90% थी. आज भी, अधिकांश कमरे बुक रहते हैं.

इस होटल की सफलता के कई कारण हैं. यह रिसॉर्ट्स वर्ल्ड जेंटिंग के केंद्र में स्थित है. यह थीम पार्क, फूड कोर्ट, शॉपिंग सेंटर आदि से सीधे जुड़ा हुआ है. इसके अलावा, मलेशिया का एकमात्र कैसीनो क्षेत्र भी पास में ही है, जो इसे और भी खास बनाता है. फर्स्ट वर्ल्ड होटल की एक और विशेषता इसकी कम और उचित कीमत, और सरल चेक-इन प्रणाली है. इसमें बड़ी संख्या में मेहमानों को आसानी से संभालने की सुविधा है. यहां न केवल अमीर लोग बल्कि आम लोग भी ठहर सकते हैं.

इस होटल की सफलता के कई कारण हैं. यह रिसॉर्ट्स वर्ल्ड जेंटिंग के केंद्र में स्थित है. यह थीम पार्क, फूड कोर्ट, शॉपिंग सेंटर आदि से सीधे जुड़ा हुआ है. इसके अलावा, मलेशिया का एकमात्र कैसीनो क्षेत्र भी पास में ही है, जो इसे और भी खास बनाता है. फर्स्ट वर्ल्ड होटल की एक और विशेषता इसकी कम और उचित कीमत, और सरल चेक-इन प्रणाली है. इसमें बड़ी संख्या में मेहमानों को आसानी से संभालने की सुविधा है. यहां न केवल अमीर लोग बल्कि आम लोग भी ठहर सकते हैं.

कमरों के प्रकारों की बात करें तो, होटल में 3164 स्टैंडर्ड कमरे, 2922 लक्ज़री कमरे, 649 लक्जरी ट्रिपल कमरे, 480 सुपीरियर लक्जरी कमरे और 136 वर्ल्ड क्लास कमरे हैं. अपने विशाल आकार के साथ-साथ स्मार्ट प्लानिंग और सुविधाओं के कारण भी इस होटल ने वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान अर्जित किया है.

कमरों के प्रकारों की बात करें तो, होटल में 3164 स्टैंडर्ड कमरे, 2922 लक्ज़री कमरे, 649 लक्जरी ट्रिपल कमरे, 480 सुपीरियर लक्जरी कमरे और 136 वर्ल्ड क्लास कमरे हैं. अपने विशाल आकार के साथ-साथ स्मार्ट प्लानिंग और सुविधाओं के कारण भी इस होटल ने वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान अर्जित किया है.



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MP News: सिवनी की बेटी रंजीता धुर्वे का स्टार्ट-अप बना मिसाल, अगरबत्ती उद्योग से 10 महिलाओं को मिला रोजगार


मध्य प्रदेश के सिवनी में रंजिता धुर्वे ने पंच परमेश्वरी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की, एक धूपबत्ती मशीन को दस मशीनों के परिचालन में बदल दिया। 10,00,000 रुपये के निवेश के साथ, व्यवसाय अब 25,00,000 रुपये का वार्षिक टर्नओवर रिपोर्ट करता है, जिसमें दस महिलाओं को रोज़गार मिलता है और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को लक्षित किया जाता है।

India

-Oneindia Staff

मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सफल होते नजर आ रहे हैं। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण सिवनी जिले की रंजीता धुर्वे हैं, जिन्होंने अपने स्टार्ट-अप के जरिए न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया।

Ranjita Dhurve builds Seoni incense startup

रंजीता धुर्वे द्वारा स्थापित ‘पंच परमेश्वरी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड’ आज सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अगरबत्ती उद्योग के रूप में शुरू हुए इस स्टार्ट-अप ने एक मशीन से शुरुआत कर आज 10 मशीनों तक का सफर तय किया है। इस इकाई में वर्तमान में 10 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।

रंजीता ने बताया कि उन्होंने इस उद्योग में करीब 10 लाख रुपये का निवेश किया और आज उनका वार्षिक टर्नओवर 25 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। यह स्टार्ट-अप अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन सामग्री का उत्पादन करता है और सिवनी जिले का पहला स्टार्ट-अप माना जा रहा है।

सिवनी जिले के लुघरवाड़ा गांव की निवासी रंजीता धुर्वे ने वर्ष 2023 में इस उद्यम की शुरुआत की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर इस व्यवसाय को सफल बनाया।

उन्होंने बताया कि उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी मिली, जिससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली। जिला उद्योग केंद्र, सिवनी का सहयोग भी उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुआ।

रंजीता का लक्ष्य अब अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि भविष्य में वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर और अधिक महिलाओं को रोजगार देना चाहती हैं।

रंजीता धुर्वे की यह सफलता कहानी न केवल महिला उद्यमिता को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति से छोटे स्तर से शुरू किया गया कार्य भी बड़ी उपलब्धि में बदला जा सकता है।

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MI vs RCB: वानखेड़े स्टेडियम में पसरा मातम, मुंबई-आरसीबी प्लेयर्स ने बांधी काली पट्टी, क्या है कारण


Cricket

oi-Naveen Sharma

MI vs RCB: मुंबई इंडियंस और आरसीबी के बीच मुकाबला वानखेड़े स्टेडियम में हो रहा है। इस दौरान एक बात ने सबका ध्यान खींचने का काम किया। दोनों ही टीमों के प्लेयर्स मैदान पर काले आर्मबैंड बांधकर आए। यह किसी बड़ी घटना का संकेत होता है।

दरअसल आर्मबैंड बांधने के पीछे एक वजह भी है। भारतीय संगीत की दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन के बाद शोक प्रकट करने के लिए मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजेर्स बेंगलुरु के खिलाड़ियों ने ब्लैक आर्मबैंड बांधकर मैदान पर उतरने का फैसला लिया।

MI vs RCB

Photo Credit: Mumbai Indians X

मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर आरसीबी को पहले बल्लेबाजी करने के लिए बुलाया। टॉस के तुरंत बाद आशा भोसले को याद किया गया। मुंबई में ही आज उनका निधन हुआ था। कल अंतिम संस्कार किया जाएगा। मुंबई इंडियंस और आरसेबी दोनों टीमों के साथ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने मौन रखा।

स्टेडियम में दी गई श्रद्धांजलि

इसके बाद दोनों टीमों के प्लेयर्स अपने बाजू पर काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे। स्टेडियम पर लगी बड़ी स्क्रीन पर आशा भोसले की फोटो दर्शाते हुए उनके जन्म और निधन के सालों के साथ ट्रिब्यूट दिया गया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने अपनी आशा ताई को नमन किया और माहौल गमगीन हो गया।

आशा भोसले को क्रिकेट खासा पसंद था। मुंबई इंडियंस टीम की वह फैन भी थीं और सचिन तेंदुलकर के साथ उनके पारिवारिक रिलेशन थे। मुंबई में उनका शव कल फैन्स के लिए रखा जाएगा। जहां लोग अंतिम दर्शन कर पाएंगे।

डीजे पर बजे आशा भोसले के गाने

मैच के दौरान ब्रेक में भी आशा भोसले के गाने डीजे पर बजते हुए दिखाई दी। 92 साल की उम्र में आशा भोसले का निधन हो गया। साल 2022 में उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का निधन हुआ था। आशा भोसले के गाने देश और दुनिया में पसंद किए जाते हैं। आशा भोसले को पद्म विभूषण, दादा साहब फाल्के आदि कई पुरस्कार मिले हैं।





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Anand Bhosle कौन हैं, क्‍या करते हैं? आशा भोसले के साथ हर पल साया बनकर रहते थे साथ


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oi-Bhavna Pandey

Who is Anand Bhosle: ‘सुरों की मल्लिका’ आशा भोसले का 92 साल की उम्र में 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। 11 अप्रैल की रात को उन्‍हें अस्‍पताल में गंभीर हालत में भर्ती करवाया गया था। आशा भोसले के निधन की जानकारी उनके बेटे आनंद भोसले ने मी‍डिया को दी।

आनंद भोसले ने मीडिया को बताया कि उनकी मां आशा भोसले का पार्थिव शरीर मुंबई स्थित घर पर लाया जाएगा और सोमवार को सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक आशा ताई के फैंस और शुभचिंतक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्‍मान के साथ उनका अंतिम संस्‍कार किया जाएगा।

Who is Anand Bhosle

8 सितंबर, 1933 को जन्मी आशा भोसले ने हिंदी, मराठी, बंगाली और गुजराती सहित कई भाषाओं में हजारों गीत रिकॉर्ड किए। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण से सम्‍मानित आशा भोसले को याद कर लोग सोशल मीडिया पर अंतिम श्रद्धांजलि दे रहे हैं। आइए जानते हैं आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले कौन हैं और क्‍या करते हैं?

Who is Anand Bhosle

आनंद भोसले कौन हैं?

आनंद भोसले, आशा भोसले के छोटे बेटे हैं। आनंद मुंबई में अपनी मां के साथ ही रहते थे। आनंद भोसले ने अपनी मां की खूब सेवा की। आशा भोसले के सभी नेशनल और इंटरनेशनल टूर और संगीत समारोहों की व्यवस्था व देखरेख की जिम्मेदारी ये आनंद भोसले ही संभालते थे।

आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले क्‍या करते हैं?

आनंद लाइमलाइट से स्‍वयं को हमेशा अपने को दूर रखा। उन्होंने बिजनेस और फिल्म डायरेक्शन में एजुकेशन हासि की और संगीत के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। आनंद भोसले के दो बच्चे हैं – बेटी जनाई भोसले और बेटे रंजय भोसले। जनाई अपनी दादी की ही तरह सिगिंग से जुड़ी हुई हैं और मॉडलिंग के लिए भी सोशल मीडिया पर काफी सराही जाती हैं।

#WATCH | Mumbai: Legendary singer Asha Bhosles son, Anand Bhosle says, “My mother passed away today. People can pay their last respects to her at 11 am tomorrow at Casa Grande, Lower Parel, where she lived. Her last rites will be performed at 4 pm tomorrow at Shivaji Park.” https://t.co/enJlEizboY pic.twitter.com/4WqTd9HYxg

— ANI (@ANI) April 12, 2026 “>

आशा भोसले के कितने बच्‍चे हैं?

आशा भोसले के 3 बच्चे हैं। जिसमें बड़ा बेटा हेमंत भोसले है जो पायलट और संगीतकार थे। उनका निधन 28 सितंबर 2015 को स्कॉटलैंड में हुआ था। वे 66 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। लंबे समय से भारत से दूर स्कॉटलैंड में रह रहे थे। आशा भोसले की दूसरी नंबर की बेटी वर्षा भोसले थी जो पेशे से पत्रकार और सिंगर थीं जिन्‍होंने 2012 में आत्‍महत्‍या कर ली थी। वहीं तीसरे नंबर पर आनंद भोसले हैं, जो आशा मंगेशकर की सबसे छोटी और आखिरी संतान हैं।

आशा भोसले के पिता और भाई बहन

पिता: दीनानाथ मंगेशकर
बहन: लता मंगेशकर (प्रसिद्ध गायिका)
अन्य बहनें: उषा मंगेशकर, मीना खाडिकर
भाई: हृदयनाथ मंगेशकर

आशा भोसले के पति

आशा भोसले का पहला विवाह गणपत राव भोसले से लगभग 16 साल की उम्र में हुआ था। 1960 दोनों अलग हो गएदूसरी शाद मशहूर संगीतकार आर. डी. बर्मन से 1980 में की थी। दोनों ही मशहूर संगीतकार थे और दोनों की जोड़ी बहुत प्रसिद्ध रही

आशा भोसले का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में है दर्ज

आशा भोसले ने अपने 80 साल के शानदार गायन करियर में 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज़्यादा गाने गाए, जिसके लिए उनके नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह अपने सदाबहार गानों से भारतीय संगीत में एक ऐसी अमिट विरासत छोड़ गई हैं, जिसे शायद ही कभी भूला जा सकेगा।





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CCTV में कैद हुए लुटेरे! महिला को बंधक बनाकर लाखों के जेवर-नकदी ले उड़े बदमाश, जैसलमेर में पहली बार ऐसी लूट


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Jaisalmer Robbery News: जैसलमेर के भाटिया पाड़ा क्षेत्र में रविवार को दिनदहाड़े हुई लूट की घटना ने पूरे शहर को हिला दिया. गांधी चौक इलाके के व्यापारी नवल भाटिया के घर में तीन अज्ञात बदमाश घुस गए और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया. बदमाशों ने महिला को बांधकर, मुंह पर टेप लगाकर और गले पर चाकू रखकर डराया, जिसके बाद घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नकदी लूटकर फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. एसपी अभिषेक शिवहरे, डीएसपी रूप सिंह इन्दा और कोतवाल सुरजा राम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है, जिसमें तीन संदिग्ध नजर आए हैं.

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CCTV में कैद हुए लुटेरे! महिला को बंधक बनाकर लाखों के जेवर-नकदी ले उड़े बदमाश

जैसलमेर: जैसलमेर शहर के भाटिया पाड़ा क्षेत्र में रविवार को दिनदहाड़े हुई लूट की घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया. इस घटना के बाद लोगों में डर का माहौल बन गया है. आमतौर पर शांत माने जाने वाले इस क्षेत्र में इस तरह की वारदात पहली बार सामने आई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, गांधी चौक क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले नवल भाटिया के घर को तीन अज्ञात बदमाशों ने निशाना बनाया. घटना उस समय हुई जब घर में सिर्फ उनकी पत्नी मौजूद थीं. बदमाश पूरी प्लानिंग के साथ घर में घुसे और सीधे महिला को अपना निशाना बना लिया.

महिला को बंधक बनाकर दी धमकी
बदमाशों ने महिला को बेरहमी से बंधक बना लिया. उसके हाथ-पैर बांध दिए, मुंह पर टेप लगा दी गई और गले पर चाकू रखकर उसे डराया-धमकाया गया. इस दौरान महिला पूरी तरह असहाय हो गई. इसके बाद आरोपियों ने बिना किसी विरोध के घर में लूटपाट को अंजाम दिया. यह पूरी घटना बेहद खौफनाक है.

लाखों के जेवर और नकदी लेकर फरार
आरोपियों ने घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नकदी लूट ली और मौके से फरार हो गए. घटना के बाद महिला ने किसी तरह खुद को मुक्त किया और आस-पास के लोगों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को खबर दी गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे खुद घटनास्थल पर पहुंचे. उनके साथ डीएसपी रूप सिंह इन्दा और शहर कोतवाल सुरजा राम भी मौजूद रहे. अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और पुलिस टीम को जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए.

पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही
पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है. प्रारंभिक जांच में तीन संदिग्ध बदमाश कैमरों में नजर आए हैं. इनके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है. घटना के बाद पूरे जैसलमेर शहर में नाकाबंदी कर दी गई है और संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है. पुलिस की टीमें अलग-अलग इलाकों में दबिश दे रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी
इस घटना के बाद शहरवासियों में गहरा डर और नाराजगी देखने को मिल रही है. लोगों का कहना है कि दिनदहाड़े इस तरह की वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की जा रही है. जैसलमेर जैसी शांत नगरी में इस तरह की घटना ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अब सभी की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर कब तक आरोपी पकड़े जाते हैं और शहर में सुरक्षा का माहौल फिर से स्थापित होता है.

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Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें



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Jaishankar UAE visit: जंग के बीच जयशंकर का मास्टरस्ट्रोक! यूएई के राष्ट्रपति से मिले, भारतीय के लिए बड़ा ऐलान


International

oi-Sumit Jha

Jaishankar UAE visit: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस समय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वहां रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दोनों देशों के बीच दोस्ती को और गहरा करना है।

जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात कर प्रधानमंत्री मोदी का विशेष संदेश उन्हें सौंपा। यह दौरा न केवल व्यापार और ऊर्जा बल्कि मानवीय संवेदनाओं के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।

Jaishankar UAE visit

राष्ट्रपति से खास मुलाकात

डॉ. जयशंकर ने अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें पीएम मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने राष्ट्रपति का विशेष रूप से धन्यवाद किया कि उन्होंने कठिन समय में भी वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों का पूरा ख्याल रखा। बैठक में दुबई के क्राउन प्रिंस भी मौजूद थे, जो दोनों देशों के बढ़ते तालमेल को दर्शाता है।

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Jaishankar meets Sheikh Mohamed bin Zayed: भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वहां रहने वाले भारतीय और भारत में उनके परिवार काफी चिंतित थे। विदेश मंत्री ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकता भारतीय समुदाय की भलाई है। उन्होंने यूएई के नेतृत्व को बताया कि भारत के लोग इस बात के लिए शुक्रगुजार हैं कि युद्ध जैसे हालात में भी यूएई में भारतीयों को सुरक्षित माहौल मिला। उन्होंने भारतीय प्रवासियों के अनुभवों को भी वहां के नेताओं के साथ साझा किया।

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West Asia conflict: रणनीतिक और व्यापारिक रिश्ते

इस दौरे के दौरान केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर भी बात हुई। जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री के साथ लंबी चर्चा की कि कैसे दोनों देश मिलकर आर्थिक रूप से और मजबूत हो सकते हैं। भारत और यूएई के बीच ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए कई नए रास्तों पर विचार किया गया, जिससे आने वाले समय में दोनों को फायदा होगा।

सही समय पर अहम दौरा

डॉ. जयशंकर ने खुद माना कि यह दौरा बिल्कुल सही समय पर हुआ है। क्षेत्र की स्थिति काफी उलझी हुई और जटिल है, ऐसे में खुलकर बातचीत करना जरूरी था। उन्होंने दुबई में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। विदेश मंत्री के इस दौरे से यह संदेश गया है कि संकट की घड़ी में भारत सरकार अपने नागरिकों के साथ खड़ी है और पड़ोसी देशों के साथ संवाद बनाए हुए है।



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