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Gold Rate Today: सोना हुआ 3500 ₹ महंगा, दिल्ली से लेकर पटना तक क्या है देश के Top 10 शहरों में ताजा भाव?


Business

oi-Ankur Sharma

Gold Rate Today In India (सोना का भाव आज का) 2 April 2026 : ईरान-इजरायल-अमेरिका में चल रहे युद्ध के बीच सोने की कीमतों में उठा-पटक जारी है तो वहीं गुरुवार सुबह सोने के रेट में तेजी देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोने का भाव आज 0.81% चढ़कर 1,51,326 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है।

तो वहीं गुडरिटर्न्स के मुताबिक 24 कैरेट सोना का भाव 1,53,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रैंक कर रहा है, जबकि इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,50,853 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आइए जानते हैं कि देश के टॉप शहरों में 24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव क्या चल रहा है।

Gold Rate Today

Gold Price Today:देश के प्रमुख शहरों में आज क्या है सोने का भाव?

दिल्ली

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹153100
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140350
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114860

मुंबई

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹152950
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140200
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114710

कोलकाता

  • सोना 24 कैरेट भाव- ₹152950
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140200
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114710

चेन्नई

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹153270
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140500
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹117100

मुंबई

  • सोना 24 कैरेट भाव- ₹152950
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140200
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114710

हैदराबाद

  • सोना 24 कैरेट भाव- ₹152950
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140200
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114710

लखनऊ

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹153100
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140350
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114860

पटना

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹153000
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140250
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114760

नोएडा

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹153100
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140350
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114860

गुरुग्राम

  • सोना 24 कैरेट भाव-₹153100
  • सोना 22 कैरेट भाव-₹140350
  • सोना 18 कैरेट भाव-₹114860

सोने का भाव आज का 2 अप्रैल 2026: क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट?

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के शोध प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि जियो-पॉलिटिकल तनाव (जैसे युद्ध या अंतरराष्ट्रीय संघर्ष) के चलते सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। जब तक वैश्विक तनाव बना रहेगा, तब तक धातुओं में मांग और कीमत दोनों प्रभावित होती रहेंगी और बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।

डिस्क्लेमर: बताए गए विचार और सुझाव सिर्फ़ अलग-अलग एनालिस्ट या एंटिटी के हैं, वनइंडिया हिंदी किसी भी तरह के कोई निवेश सलाह नहीं देता है देता हैं और ना ही सिक्योरिटीज़ की खरीद या बिक्री के लिए कहता है। सारी जानकारी सिर्फ़ जानकारी देने और एजुकेशनल मकसद के लिए दी गई है और कोई भी निवेश का फ़ैसला लेने से पहले लाइसेंस वाले फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र से इसे अलग से वेरिफ़ाई कर लेना चाहिए।



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Nitish Kumar: CM पद से हटते ही कमांडो के साये में नीतीश कुमार, MHA ने अचानक क्यों दी पावरफुल Z+ सिक्योरिटी?


Bihar

oi-Sohit Kumar

Nitish Kumar Get Z Plus Security: बिहार की सियासत में इन दिनों बड़े बदलाव की बयार चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बिहार की कमान छोड़कर देश की संसद यानी राज्यसभा की दहलीज पर कदम रखने को तैयार हैं। लेकिन इस बीच सबसे बड़ी खबर उनके सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर आ रही है। गृह विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पद से हटने के बाद भी नीतीश कुमार की सुरक्षा में रत्ती भर की भी कमी नहीं की जाएगी, बल्कि उन्हें देश की सर्वोच्च ‘जेड प्लस’ (Z+) कैटेगरी की सुरक्षा मिलती रहेगी।

गृह विभाग की विशेष शाखा ने मंगलवार को एक हाई-प्रोफाइल आदेश जारी किया है। इस आदेश के मुताबिक, नीतीश कुमार को बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के प्रावधानों के तहत यह विशेष सुरक्षा कवर दिया गया है। विभाग ने मुख्यमंत्री के रूप में उनके लंबे कार्यकाल और वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया है कि उन्हें भविष्य में भी सर्वोच्च श्रेणी का कवर मिलता रहना चाहिए।

Nitish Kumar PTI Photo

राज्यसभा का सफर और इस्तीफे की टाइमलाइन

  • इस्तीफा: 30 मार्च 2026 को उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी है।
  • शपथ ग्रहण: संभावना है कि आगामी 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।
  • बदलाव: शपथ से पहले वे मुख्यमंत्री पद से अपना त्यागपत्र सौंप देंगे, जिसके बाद भी उनकी Z+ सुरक्षा बरकरार रहेगी।

Z+ सुरक्षा का ‘पावरफुल’ घेरा: क्या-क्या मिलेगा?

जब हम जेड प्लस सुरक्षा की बात करते हैं, तो इसका मतलब है एक ऐसा सुरक्षा कवच जिसे भेदना नामुमकिन माना जाता है:

  • 1. 55 जांबाज जवान: नीतीश कुमार की सुरक्षा में हर समय लगभग 55 ट्रेंड जवान तैनात रहेंगे।
  • 2. NSG कमांडो का साया: इस घेरे के सबसे महत्वपूर्ण अंग 10 से ज्यादा NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडो होंगे, जो अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं।
  • 3. त्रिस्तरीय सुरक्षा (3-Layered): पहले घेरे में NSG, दूसरे में विशेष अधिकारी और तीसरे में स्थानीय पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात रहेंगे।
  • 4. बुलेटप्रूफ गाड़ियां: उनके काफिले में बुलेटप्रूफ गाड़ियां और एस्कॉर्ट वाहन हमेशा शामिल रहेंगे ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटा जा सके।

Z+ सुरक्षा क्यों और किसे दी जाती है?

भारत में Z+ सुरक्षा मुख्य रूप से उन व्यक्तियों (VVIPs) को दी जाती है, जिनकी जान को देश विरोधी तत्वों या आतंकी संगठनों से गंभीर खतरा (High-level threat) होता है। इस सुरक्षा श्रेणी का निर्धारण केंद्रीय गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों (Intelligence Bureau) की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। आमतौर पर यह सुरक्षा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री (जिन्हें विशेष तौर पर SPG मिलती है), सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, कैबिनेट मंत्रियों और कुछ प्रमुख राजनेताओं को उनके पद की संवेदनशीलता के कारण मिलती है। हालांकि, खतरे के आकलन को देखते हुए समय-समय पर प्रमुख उद्योगपतियों या सामाजिक हस्तियों को भी इस सुरक्षा घेरे में शामिल किया जा सकता है।



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कोटा में स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का किराया घटाया: 2 से 4 हजार में मिल रहे PG, कोचिंग संस्थान दे रहे 50% तक स्कॉलरशिप – Kota News


कोटा में करीब 3 साल पहले जो कमरा 15 हजार रुपए का मिलता था, अब वही रूम 9 से 11 हजार में मिल रहा है।

डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोटा आने वाले देश भर के लाखों स्टूडेंट्स के लिए इस बार राहत भरी खबर है। नया सेशन शुरू होते ही स्टूडेंट्स का कोटा पहुंचना शुरू हो गया है, लेकिन इस बार उन्हें न तो महंगे कमरों की चिंता है और न ही बढ़ती फीस की। कोचिंग

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करीब 3 साल पहले तक जिस कोटा में स्टूडेंट्स को 15 हजार रुपए में भी कमरा मिलना मुश्किल हो रहा था, वहां अब 9 से 11 हजार रुपए में एसी, खाना और लॉन्ड्री जैसी सुविधां के साथ बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं।

कोटा में हॉस्टलों के अलावा कई पीजी भी हैं। पीजी में पहले किराया 5 से 6 हजार रुपए था। वर्तमान में 2 से 4 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। 4 हजार रुपए भी बड़े हॉलनुमा कमरे का किराया है, जिसमें बिजली-पानी भी शामिल है।

हॉस्टल एसोसिएशन का फैसला- 11 हजार से ज्यादा किराया नहीं हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोरोना के बाद अचानक स्टूडेंट्स की संख्या 1.90 लाख तक पहुंच गई थी, जिससे डिमांड बढ़ने पर रेट 15 हजार तक चले गए थे। अब स्थिति नियंत्रण में है।

हॉस्टल संचालकों को 9 हजार से 11 हजार रुपए तक किराया रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रूम, एसी, खाना, लॉन्ड्री और सफाई शामिल है। कभी सबसे महंगा रहने वाले राजीव गांधी नगर इलाके में अब 3 हजार रुपए तक में कमरे उपलब्ध हैं।

कोचिंग संस्थानों ने भी बढ़ाया हाथ, नहीं बढ़ेगी फीस मिडिल क्लास परिवारों को राहत देने के लिए इस साल कोचिंग संस्थानों ने अपनी फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही, अब हॉस्टलों में महीनों का एडवांस किराया लेने की प्रथा पर भी रोक लगा दी गई है। स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग से लेकर 24 घंटे की हेल्पलाइन सेवा भी दी जा रही है।

नए सेशन की शुरुआत के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से पेरेंट्स अपने बच्चों का एडमिशन करवाने कोटा आए हैं।

टेस्ट में अच्छे नंबर लाइए, फीस में छूट पाइए कोटा में 50 से ज्यादा छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान हैं। इनमें NEET और JEE की तैयारी करवाई जाती है। स्टूडेंट्स को राहत देते हुए इंस्टीट्यूट्स ने इस बार फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसके अलावा स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। इसमें बच्चों को 50 प्रतिशत तक स्कॉलरशिप दी जा रही है। सामाजिक सारोकार के तहत चुनिंदा बच्चों को फ्री में रहने, खाने और पढ़ाने की सुविधा भी दी जा रही है।

कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में कोर्स के हिसाब से अलग-अलग फीस है, जो 80 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए तक है। सामान्यत: बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट में NEET स्टूडेंट्स से एक लाख 35 हजार और IIT की तैयारी करवाने के लिए डेढ़ लाख की फीस ली जा रही है।

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तीन साल पहले 15 हजार में भी नहीं मिलते थे कमरे कोटा में 3 साल पहले ऐसा समय आया था, जब स्टूडेंट्स को हॉस्टलों में 15 हजार रुपए तक में भी कमरे नहीं मिल रहे थे। अब स्टूडेंटस के लिए हॉस्टल में कमरों के कई विकल्प (ऑपशन) मौजूद हैं। स्टूडेंट अपने बजट के अनुसार कमरा ले सकता है।

हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोटा में वर्तमान में स्टूडेंट्स के बजट में हॉस्टल में कमरे मिल रहे है। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ गई थी।

उस समय करीब 1 लाख 90 हजार स्टूडेंट्स कोटा में थे। काफी डिमांड होने की वजह से कई हॉस्टल काफी महंगे हो गए थे। स्टूडेंट्स से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे थे। अब जब स्टूडेंट्स की संख्या कम हुई है तो उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल संचालकों को कहा गया है कि हॉस्टल में 9 हजार से लेकर 11 हजार रुपए तक किराया ही तय रखें।

राजीव गांधी नगर एरिया में कई हॉस्टलों में 3 हजार रुपए तक में कमरा किराए पर लेने के बोर्ड लगे हुए हैं। पहले यहां कमरे के लिए 11 हजार रुपए तक वसूले जाते थे।

स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट, प्रशासन और हॉस्टल मालिकों ने कई बदलाव किए हैं। हॉस्टल्स का किराया भी घटाया गया है।

स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट, प्रशासन और हॉस्टल मालिकों ने कई बदलाव किए हैं। हॉस्टल्स का किराया भी घटाया गया है।

हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेंडेंस, सुरक्षा का पूरा ध्यान हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल बताते हैं- बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ज्यादातर हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेडेंस सिस्टम है। यहां हॉस्टल में आने और जाने का समय रिकॉर्ड रहता है।

इसके अलावा इसकी सूचना बच्चों के माता-पिता को भी दी जाती है। कमरों में एंटी हैंगिग डिवाइस पहले से ही इंस्टॉल है। रात 10 बजे बाद बच्चों को बाहर जाने की अनुमति नहीं रहती है। हर स्टूडेंटस से वार्डन रोज संपर्क करते हैं। कॉशन (सिक्योरिटी) मनी लेना बंद कर दिया गया है।

राजीव गांधी नगर एरिया में स्थित हॉस्टल और मेस में 3500 रुपए में नाश्ता, लंच, डिनर की सुविधा के बोर्ड लगे हुए हैं।

राजीव गांधी नगर एरिया में स्थित हॉस्टल और मेस में 3500 रुपए में नाश्ता, लंच, डिनर की सुविधा के बोर्ड लगे हुए हैं।

मेस में मेन्यू के आधार पर कीमत कोटा में हॉस्टल मेस के अलावा ओपन मेस भी चलते हैं। इनमें 3 हजार से 3500 रुपए तक में बच्चों को आसानी से खाना मिल रहा है। मेस की रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मेन्यू के आधार पर अलग-अलग मेस का अलग-अलग रेट है। बच्चे मेस में आकर खाना खा सकते हैं या उनके पीजी रूम तक मेस की तरफ से टिफिन भिजवाया जाता है।

बच्चों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन

कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए ASWS (ऑल स्टूडेंटस वेलफेयर सोसायटी) भी काम कर रही है, जिसमें कोचिंग संस्थानों के मेंटर्स काम करते है। जैसे-

  1. किसी भी हॉस्टल से स्टूडेंटस की कोई भी शिकायत होने पर उसके समाधान के लिए काम करते हैं।
  2. 24 घंटे हेल्पलाइन सर्विस को लेकर कॉल सेंटर बनाया हुआ है। यहां बच्चे अपनी परेशानी बता सकते हैं और समस्या के अनुसार उसका समाधान किया जाता है।
  3. बच्चे यहां किसी भी तनाव की जानकारी शेयर कर सकते हैं, जिसके बाद बच्चे की काउंसलिंग की जाती है। यह हेल्पलाइन 24 घंटे चालू रहती है।
  4. साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर हर कोचिंग संस्थानों में तैनात किए गए हैं।
  5. योग सेशन भी बच्चों के लिए होता है।
  6. कोटा में सभी हॉस्टल-पीजी और कोचिंग स्टाफ को गेटकीपर ट्रेनिंग दी गई है, जो कि बच्चे की मानसिक स्थिति को समझने में मदद करती है।

एमपी–हरियाणा से आए स्टूडेंट्स कोटा में पिछले एक साल से NEET की तैयारी कर रहे हरियाणा के हर्ष मलिक ने अपने छोटे भाई रक्षित को भी कोचिंग के लिए कोटा बुलाया है। हर्ष ने बताया यहां पर फैकल्टी दूसरी जगह से काफी अच्छी है। टीचर्स का सपोर्ट रहता है ताकि बच्चा अपना बेस्ट दे सके। हरियाणा में इतनी अच्छी व्यवस्था नहीं है, जितनी यहां है। निगेटिव बातों को लेकर हर्ष ने कहा- ऐसी बात तब आती है, जब स्टूडेंट अपना 100 फीसदी नहीं दे रहा होता है।

रीवा (मध्य प्रदेश) के नमन ने भी इसी साल कोटा में एडमिशन लिया है। उसके साथ दोस्त श्रीकांत भी कोटा पहली बार आया है। नमन ने बताया कि कोटा का रिव्यू बहुत अच्छा है। यहां पढ़ाई का माहौल है। यहां हॉस्टल के ऑप्शन हैं और खाने की भी कोई दिक्कत नहीं है। एक स्टूडेंट साल में साढ़े 3 से 4 लाख रुपए खर्च करता है।

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पेरेंट्स बोले– कोटा में अच्छा माहौल, रिजल्ट बेहतर प्रतापगढ़ (यूपी) से आए राजेंद्र सरकारी टीचर हैं। उन्होंने बताया कि जेईई की तैयारी के लिए बेटे का एडमिशन करवाने कोटा आए हैं। हमारी तरफ के कई बच्चे कोटा में पढे़ हैं। उन्होंने बेटे को कोटा पढ़ाने की सलाह दी थी। हमने पटना भी जाकर पता किया था, लेकिन वहां वैसा माहौल नहीं था।

हनुमानगढ़ से आए नरेश कुमार ने बताया- उनकी बेटी कोलकाता रहती है। वह अपने बच्चे का एडमिशन करवाने के लिए कोटा आई है। उसके साथ कोटा आया हूं। कोटा का ऑल ओवर सिनेरियो बहुत अच्छा है। पिछले सालों के रिजल्ट देखे हैं। उनका आउटपुट देखने के बाद ये निर्णय लिया है।

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क्रूड की कीमतों में अस्थिरता बरकरार: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच आज कच्चे तेल की कीमत कितनी? जानिए अपडेट


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
Published by: Jyoti Bhaskar

Updated Thu, 02 Apr 2026 08:37 AM IST


कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बरकरार (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : अमर उजाला प्रिंट



क्रूड की कीमतों में अस्थिरता बरकरार: पश्चिम एशिया में तनाव के बीच आज कच्चे तेल की कीमत कितनी? जानिए अपडेट


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Kharg Island Explained: US क्यों नहीं कर पाएगा खार्ग आईलैंड पर कब्जा? 3 मुसीबतें एकदम रेडी, रूस कर चुका गलती


Bizarre

oi-Siddharth Purohit

Kharg Island Explained: अमेरिका-ईरान की जंग में ईरान का खार्ग आईलैंड एक बड़ा कीवर्ड बनकर सामने आया है। यहां अमेरिका का लालच और ईरान के हित दोनों साफ-साफ दिखते हैं। लेकिन इस जंग के बाद इस पर किसका कब्जा होगा, इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि ईरान के सख्त रुख और मजबूत जवाबी क्षमता को देखते हुए यह ऑपरेशन कितना सफल नहीं होगा, कुछ कहते हैं कि अमेरिका ऐसा कर सकता है तो वहीं कुछ का मानना है कि कब्जा कर भी लिया तो टिके रहना मुश्किल होगा क्योंकि ईरान भी तो जवाब देगा। आइए इसे आसानी से समझते हैं।

रूस की गलती से सीखे अमेरिका

इस मुद्दे को समझने के लिए एक पुराना उदाहरण दिया जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में स्नेक आइलैंड (ज़मीनी द्वीप) को बहुत महत्वपूर्ण माना गया था। फरवरी 2022 में रूस ने इस द्वीप पर कब्जा कर लिया था, लेकिन यूक्रेन के लगातार हमलों के कारण जून 2022 के अंत में उसे इसे छोड़ना पड़ा।

Khar Island Explained

छोटे द्वीप पर कब्जा रखना क्यों मुश्किल होता है?

स्नेक आइलैंड पर कब्जा बनाए रखना रूस के लिए बहुत मुश्किल साबित हुआ। उसे सैनिकों, एयर डिफेंस सिस्टम और सप्लाई जहाजों में भारी नुकसान उठाना पड़ा। आखिरकार रूस को पीछे हटना पड़ा, जो उसके लिए एक तरह से शर्मनाक स्थिति थी। यह उदाहरण ट्रंप की खार्ग द्वीप योजना पर भी सवाल खड़े करता है।

खार्ग द्वीप क्यों है इतना अहम?

स्नेक आइलैंड की तरह ही खार्ग द्वीप भी बेहद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह फारस की खाड़ी में ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा 8 किलोमीटर लंबा कोरल द्वीप है। यही से ईरान का ज्यादातर तेल निर्यात होता है, इसलिए इसे देश का सबसे संवेदनशील आर्थिक केंद्र माना जाता है।

हर दिन लाखों बैरल तेल का निर्यात

खार्ग द्वीप से औसतन हर दिन करीब 1.5 मिलियन बैरल तेल निर्यात होता है। लेकिन संभावित हमले के डर से ईरान ने बीच फरवरी से इस निर्यात को बढ़ाकर लगभग 3 मिलियन बैरल प्रति दिन कर दिया था। जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट बताती है कि, करीब 18 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल खार्ग पर बैकअप के तौर पर स्टोर किया गया है।

ट्रंप की योजना की पहली बड़ी समस्या

ट्रंप की योजना में पहली बड़ी दिक्कत यह है कि अगर अमेरिका खार्ग पर कब्जा कर लेता है, तो ईरान का लगभग पूरा तेल निर्यात रुक जाएगा। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर दुनिया भर पर पड़ेगा और इसका राजनीतिक नुकसान खुद ट्रंप को भी उठाना पड़ सकता है।

दूसरी समस्या: ईरान का आसान जवाब

दूसरी बड़ी समस्या यह है कि अगर अमेरिका खार्ग के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करना चाहे, तो तेल को ईरान की जमीन से खार्ग तक आना जरूरी होगा। लेकिन ईरान के पास एक आसान तरीका है, वह पाइपलाइन के वाल्व बंद कर सकता है। ऐसा होने पर पूरा अमेरिकी ऑपरेशन बेकार हो जाएगा। इसके बाद खार्ग आईलैंड पर बने रहना एक खाली मैदान में खड़े रहने जैसा होगा।

तीसरी समस्या: कब्जा बनाए रखना होगा मुश्किल

तीसरी चुनौती यह है कि जैसे रूस स्नेक आइलैंड पर अपनी पकड़ नहीं बना पाया, वैसे ही अमेरिका के लिए भी खार्ग पर कंट्रोल बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। ईरानी सेना और खाड़ी में मौजूद जहाज लगातार हमले कर सकते हैं, जिससे अमेरिकी सैनिकों को भारी खतरा रहेगा। जितने ज्यादा सैनिक होंगे, ईरान के निशाने उतने ज्यादा लगने की संभावना होगी। साथ ही खार्ग पर अगर ट्रंप का बारूद खत्म हो तो वापस लाने के लिए अलग मशक्कत करना पड़ेगी, जबकि ईरान बिना रुके ताबड़तोड़ हमले जारी रख सकता है। जिसमें अमेरिका जल्दी निशाने पर आता रहेगा और बचने की संभावना कम होगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर

भौगोलिक नजरिए से देखें तो खार्ग द्वीप काफी अंदर की ओर स्थित है और यह Strait of Hormuz पर सीधा कंट्रोल नहीं देता। उस इलाके में एक शिपिंग एक्सपर्ट के मुताबिक, स्नेक आइलैंड की तरह इसका बड़ा और कई दूसरे कामों में आ सके ऐसा फायदा नहीं है, बल्कि इसकी अहमियत सिर्फ इसके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित है।

अमेरिकी सेना की संभावित तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन के लिए करीब 5,000 अमेरिकी मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 2,000 पैराट्रूपर्स को तैयार रखा गया है। पैराट्रूपर्स हवाई हमले कर सकते हैं, जबकि मरीन समुद्र के रास्ते या स्टीमर और छोटी नावों से उतर सकते हैं।

मिशन कितना खतरनाक हो सकता है?

इस मिशन के दौरान अमेरिकी जहाजों को ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना होगा, जहां उन्हें दुश्मन की फायरिंग का सामना करना पड़ सकता है। वहीं हवाई लैंडिंग के दौरान भी ईरानी सेना, जहाजों और जमीन से हमले का खतरा रहेगा।

आखिर क्यों मुश्किल है यह ऑपरेशन?

भले ही अमेरिकी सेना शुरुआती हमलों को झेल ले, लेकिन खार्ग द्वीप पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखना बेहद कठिन होगा। ईरानी मुख्य भूमि से लगातार हमले होते रहेंगे, जिससे स्थिति रूस के स्नेक आइलैंड जैसे अनुभव की तरह हो सकती है। जहां कब्जा बनाए रखना लगभग नामुमकिन साबित हुआ था।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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Trump U-Turn: अपने ही दावों से फिर पलटे ट्रंप, स्पीच में बदला जंग का टारगेट, 7 बातें जो कर रही कन्फ्यूज


International

oi-Siddharth Purohit

Trump U-Turn: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच ट्रंप ने गुरुवार (भारतीय समयानुसार) सुबह 6.21 पर अपनी स्पीच दी। लोगों को उम्मीद थी की शायद ट्रंप युद्ध खत्म करने का ऐलान करेंगे। लेकिन बातों से पलटने का सबसे बड़े जिंदा पर्याय बने ट्रंप ने अपने स्वभाव को जिंदा रखा। इस स्पीच में ट्रंप ने कई दावे किए और साथ में पूर्व में दिए कई बयानों से पलटी भी मार ली। आइए जानते हैं कि किस-किस बयान से पलट गए ट्रंप।

‘रिजीम चेंज नहीं था टारगेट’, मारी पलटी

ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से पलटी मार दी है। पहले के बयानों में ट्रंप ने रिजीम चेंज की बात कही थी, लेकिन इस स्पीच में उन्होंने कहा कि उनका टारगेट “रिजीम चेंज” नहीं था, बल्कि मौजूदा नेतृत्व को हटाना था। जबकि वे जंग शुरू होने के पहले से ही रिजीम चेंज की बात करते हुए डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर को वहां पर लागू करने की बात करते रहे हैं।

Trump U-Turn

लीडरशिप खत्म और फिर पलटे ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इस युद्ध में बेहतर काम कर रही है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान की नेवी, एयरफोर्स और वहां की मौजूदा सरकार को लगभग खत्म कर दिया है। जबकि इसके पहले वाले बयान में ट्रंप ने कहा था कि बड़े नेता मारे गए हैं लेकिन नई लीडरशिप जो खड़ी हो रही है उसे भी खत्म करेंगे। ऐसे में सरकार कैसे खत्म हो गई है ईरान की, ट्रंप से पूछा जाना चाहिए।

IRGC पर पलट गए ट्रंप

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को अमेरिकी हमलों मेंबुरी तरह नुकसान पहुंचा है और उनके हथियारों का जखीरा तबाह कर दिया गया है। कमाल की बात है कि ट्रंप ने खुद कहा था कि ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन्स का भंडार है और जब तक ये भंडार खाली नहीं होगा तब तक अमेरिकी हमले नहीं रुकेंगे।

होर्मूज पर लड़े या अमेरिका से तेल खरीदें- ट्रंप

ट्रंप NATO के साथ मिलकर होर्मुज को कंट्रोल करने और खार्ग आईलैंड पर फौज उतारने जैसी बातें करते रहे हैं। बीच-बीच में होर्मुज खुलवाएंगे, ऐसे भी दावे किए। लेकिन अब ट्रंप ने इन सब से पलटी मारते हुए एक नई बात कह दी है। ट्रंप ने कहा कि जिन देशों के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर फंसे हैं वे या तो अमेरिका के साथ मिलकर लड़ें या फिर अमेरिका से तेल खरीदने के लिए तैयार रहें। ये बताता है कि ट्रंप किसी भी बात पर टिके नहीं रह सकते।

ईरान की न्यूक्लियर फेसिलिटी तबाह लेकिन नहीं

ट्रंप ने पिछले साल जब ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था तब भी और इस साल के हमलों में अभी तक कई बार ये दावा किया कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को उन्होंने पूरी तरह से तबाह कर दिया है। लेकिन आज की स्पीच में उन्होंने ऐसी बात कही जो उनके ही बयान पर उंगली उठाती है। अब ट्रंप कह रहे हैं कि अगर ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार आ गए तो यह मिडिल ईस्ट, दुनिया और अमेरिका सभी के लिए बेहद खतरनाक होगा। मतलब इतने हमलों के बावजूद ट्रंप ये मान रहे हैं कि न तो वे न्यूक्लियर फेसिलटी तक पहुंच बना पाए और न ही उसे तबाह कर सके।

डील की लगाई थी रट, अब बोले नहीं करेंगे

इतने दिनों से डोनाल्ड ट्रंप एक बात की रट लगाए हुए हैं कि ईरान के नेता उनसे डील करना चाहते हैं, बात चल रही है। पाकिस्तान ने भी इस डील में हाथ धोने की कोशिश की। यहां तक कि युद्ध शुरू होने के कुछ महीने पहले से बातचीत चल रही थी। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पर भी पलटी मार दी है। इस बार ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से कोई डील ही नहीं करेंगे। अगर डील नहीं करेंगे तो चाहते क्या हैं, ये ट्रंप से पूछा जाना चाहिए।

“ईरान अब खतरा नहीं रहा”, तो फिर हमला क्यों?

ट्रंप ने जंग के पहले सप्ताह के बाद से ही ये दावा करना शुरु कर दिया था कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल प्रोग्राम को इस हद तक कमजोर कर दिया है कि अब वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा नहीं रहा। गुरुवार की स्पीच में भी यही दावा किया। अब अगर ईरान वाकई में इतना कमजोर हो गया है फिर तो इजरायल और अमेरिका को हमले बंद कर देने चाहिए। लेकिन ट्रंप यहां भी राजी नहीं हैं।

बार-बार बदलते बयानों से हैरान दुनिया

ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से पूरी दुनिया में लोग परेशान हैं। कहीं गैस-तेल के दाम बढ़ रहे हैं तो कहीं पर मार्केट हिल रहा है। इसके अलावा जंग बीच मिडिल ईस्ट में स्थिरता और शांति की कोशिश करने वाले देशों को भी अपनी रणनीति बार-बार बदलना पड़ रही है। जंग का अंत क्या होगा कोई नहीं जानता, पर ट्रंप इस भाषण से भी पलट सकते हैं इसका अंदेशा सभी को है।

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जग्गी हत्याकांड…अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी दोषी करार: 3 हफ्ते के अंदर करना होगा सरेंडर, CBI के साक्ष्य के आधार पर हाईकोर्ट का फैसला – Chhattisgarh News


बिलासपुर9 घंटे पहले

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जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। CBI के साक्ष्य को स्वीकार करते हुए फैसला सुनाया गया है।

वहीं फैसले पर अमित जोगी ने कहा कि हाईकोर्ट ने पूरी सुनवाई का मौका दिए बिना उन्हें दोषी ठहरा दिया, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है।

सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश के तहत कराई गई थी। CBI ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य शामिल हैं।

इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया। बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था, लेकिन बाद में मामला दोबारा खोला गया।

विद्याचरण शुक्ल ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया था। (फाइल इमेज)

विद्याचरण शुक्ल ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया था। (फाइल इमेज)

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जग्गी हत्याकांड के बारे में जानिए

4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी।

हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।

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हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज

डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले पर विस्तार से सुनवाई हो सके।

हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।

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सतीश जग्गी का आरोप- तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या

हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी।

जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।

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जानिए कौन थे रामावतार जग्गी

कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे, जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था।

हत्याकांड में 28 लोग पाए गए दोषी

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।

2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा

इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं।

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23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला:जोगी बोले- 11000 पन्नों का केस, कॉपी तक नहीं; सतीश बोले- ये एक बेटे की लड़ाई

23 साल पुराना जग्गी मर्डर केस फिर खुला, सीबीआई ने 11000 पन्नों की चार्जशीट सौंपी थी।

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छत्तीसगढ़ के 23 साल पुराने बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर सुनवाई शुरू हो गई है। 2003 में कांग्रेस नेता रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी, जिसमें कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया था। पढ़ें पूरी खबर…

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सीएम योगी से मिले गौतम अडाणी: डेढ़ घंटे में निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स पर चर्चा हुई, अयोध्या में परिवार के साथ रामलला के दर्शन किए – Ayodhya News




बिजनेसमैन गौतम अडाणी ने गुरुवार शाम लखनऊ में सीएम योगी से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। इस दौरान यूपी में निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा हुई। गौतम अडाणी के बेटे करण अडाणी भी मौजूद रहे। इससे पहले गौतम अडाणी ने परिवार के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। उन्होंने पत्नी डॉ. प्रीति अडाणी, बड़े बेटे करण और बहू पारिधि अडाणी के साथ विधि-विधान से रामलला की पूजा की। आरती की। पुजारी से तिलक लगवाया। प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर का भ्रमण कर राम मंदिर निर्माण के बारे में जानकारी ली। गौतम अडाणी गुरुवार सुबह 8.30 बजे पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अयोध्या पहुंचे। अहमदाबाद से 2 चार्टर्ड फ्लाइट्स से अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुए। एयरपोर्ट से सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। यहां उनका अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत किया। 30 मिनट तक मंदिर में रहने के बाद बाहर आकर गौतम अडाणी ने कहा- मुझे और मेरे परिवार को अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह एक भावुक पल है, एक गर्व का पल है। यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। भगवान राम के आदर्श हमें सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान राम का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे और हमारा देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे। गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की
गौतम अडाणी ने अयोध्या के गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की। उन्हें सम्मानित किया। गुरुकुल की पुरानी और आधुनिक परंपरा के बारे जाना। उन्होंने कहा कि मैंने बच्चों के साथ समय बिताया। गुरुकुल आज के युग में हमारी संस्कृति को जागृत रखने का काम कर रहा है। अडाणी फाउंडेशन AI के इस दौर में इस गुरुकुल संस्कृति को संरक्षित करने में हर संभव सहयोग देगा। लखनऊ में योगी से मुलाकात करेंगे
इसके बाद, गौतम अडाणी लखनऊ के लिए रवाना हो गए। यहां सीएम योगी से मुलाकात करेंगे। इससे पहले गौतम अडानी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या आए थे। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। अब 4 तस्वीरें देखिए- विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की गौतम अडाणी श्रीराम मंदिर से करीब 10 मिनट दूर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचे। यह गुरुकुल 1935 में स्वामी त्यागानंद ने शुरू किया था। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की। देखा कि कैसे यहां अनुशासन, संस्कार और पढ़ाई एक साथ चलती है। उन्होंने कहा- जब शिक्षा मूल्यों के साथ जुड़ी होती है, तो वह सिर्फ इंसान को नहीं बनाती, बल्कि देश का भविष्य भी बनाती है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन परंपराओं को आगे बढ़ाएं और आने वाले समय के लिए भी तैयार रहें। 16 साल की उम्र में शुरू कर दिया था कारोबार किडनैप कर मांगी गई थी 11 करोड़ की फिरौती साल 1998 का पहला दिन था। गौतम अडाणी और शांतिलाल पटेल अहमदाबाद के कर्णवती क्लब से कार में सवार हुए। ये कार मोहम्मदपुरा रोड की तरफ जा रही थी। रास्ते में बीच सड़क पर एक स्कूटर खड़ा मिला। कार जैसे ही रुकी, तभी वहां एक वैन पहुंची। वैन में सवार लोगों ने अडाणी और पटेल को किडनैप कर लिया और किसी अज्ञात जगह पर ले गए। पुलिस चार्जशीट के मुताबिक इन दोनों को छोड़ने से पहले 11 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई थी। 26/11 हमले में भी बाल-बाल बचे ऐसा ही एक वाकया 26 नवंबर 2008 का है। गौतम अडाणी मुंबई के ताज होटल स्थित वेदर क्राफ्ट रेस्टोरेंट में दुबई पोर्ट के सीईओ मोहम्मद शर्राफ के साथ डिनर कर रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ आतंकी होटल में घुस आए हैं और ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। 26 नवंबर की पूरी रात उन्होंने होटल के बेसमेंट में दहशत के साये में बिताई। 27 नवंबर की सुबह उन्हें बचाया गया। अपने प्राइवेट विमान से अहमदाबाद पहुंचते ही उन्होंने कहा, ‘मैंने 15 फीट की दूरी से मौत देखी है।’ ——————–
अब भास्कर के सबसे बड़े सर्वे में हिस्सा लीजिए… यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए…



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जंग के चलते तेजस के इंजन की सप्लाई रुकी: अमेरिकी कंपनी को डिलीवरी देनी है, अब साल के अंत में आएंगे


नई दिल्ली31 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक

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भारतीय वायुसेना ने HAL को तेजस के 83 विमान ऑर्डर किए हैं जो कि 2028 तक डिलीवर किए जाने हैं।

मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत के बहुप्रतीक्षित लड़ाकू विमान तेजस के इंजन की सप्लाई रुक गई है। इन विमानों के इंजन सप्लाई करने वाली अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को कह दिया है कि अभी सप्लाई नहीं दे पाएंगे।

भास्कर को भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि अब साल के अंत तक ही इंजन मिलने की उम्मीद है। 113 इंजनों की आपूर्ति का करार हुआ था। HAL ने मार्च 2026 तक 24 तेजस विमान वायुसेना को देने का वादा किया था।

लेकिन, एचएएल में खड़े 9 तेजस एमके 1ए विमान इंजन के अभाव में वायुसेना को नहीं मिल पा रहे हैं। जबकि 5 विमान पूरी तरह तैयार हैं। 19 विमानों के एयर फ्रेम भी तैयार हैं। यदि आपूर्ति बहाल होती है तो इस साल 24 और अगले साल तक 30 इंजन मिल जाएंगे। 9000 करोड़ की 113 इंजनों की डील पर कंपनी आगे बढ़ पाएगी।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने करीब 5 महीने पहले अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के साथ 1 अरब डॉलर (करीब ₹8,870 करोड़) की डील की थी।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने करीब 5 महीने पहले अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के साथ 1 अरब डॉलर (करीब ₹8,870 करोड़) की डील की थी।

2021ः HAL को 83 तेजस मार्क-1A का ऑर्डर, अभी 1 भी डिलीवरी नहीं

इससे पहले फरवरी 2021 में सरकार ने HAL के साथ 83 तेजस मार्क-1A खरीदने के लिए 48,000 करोड़ का करार किया था, लेकिन HAL अमेरिकी इंजन की डिलीवरी में देरी की वजह से अभी तक एक भी एयरक्राफ्ट नहीं सौंप पाया है। उम्मीद है कि 2028 तक HAL सभी एयरक्राफ्ट्स वायुसेना को सौंप देगा। इसके लिए HAL को GE की ओर से अभी तक 4 इंजन भी मिल चुके हैं।

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तेजस एयरक्राफ्ट का एडवांस वर्जन मार्क-1A

LCA तेजस मार्क-1A लड़ाकू विमान को पाकिस्तान बॉर्डर के पास राजस्थान के बीकानेर स्थित नाल एयरबेस पर तैनात करने की योजना है। रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि इस जेट में स्वयं रक्षा कवच और कंट्रोल एक्चुएटर होंगे। तेजस मार्क-1A के 65% से ज्यादा उपकरण भारत में बने हैं।

मार्क 1A, सिंगल इंजन वाले तेजस एयरक्राफ्ट का एडवांस वर्जन है। यह चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान है, जो कम वजन के बावजूद बेहद फुर्तीला है। इसमें अपग्रेडेड एवियॉनिक्स और रडार सिस्टम लगे हैं।

तेजस के पुराने वर्जन को भी HAL ने डेवलप किया है। इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और DRDO की मदद से बनाया गया है। इसे हवा, पानी और जमीन पर हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। यह मुश्किल हालात में भी अपने टारगेट को निशाना बना सकता है।

मार्क-1A एयरक्राफ्ट वायुसेना के मिग-21 के बेड़े का रिप्लेसमेंट है। मिग-21 26 सितंबर को रिटायर हो चुका है। इसने 62 साल की सर्विस के दौरान 1971 युद्ध, कारगिल और कई बड़े मिशन में अहम भूमिका निभाई थी।

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PM मोदी भी तेजस में उड़ान भर चुके

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2022 को बेंगलुरु में तेजस फाइटर प्लेन में उड़ान भरी थी। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की फाइटर प्लेन में यह पहली उड़ान थी। तेजस में उड़ान भरने से पहले मोदी बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी पहुंचे थे।

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रूसी तकनीक से भारत में बनेंगे सिविल एयरक्राफ्ट SJ-100:HAL और रूस की सरकारी कंपनी में समझौता; UDAN स्कीम के लिए गेम चेंजर हो सकता है

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रूस के SJ-100 सिविल कम्यूटर एयरक्राफ्ट अब भारत में भी बनेंगे। इसके लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के साथ एक MoU साइन किया है। ये छोटे शहरों को हवाई कनेक्टिविटी देने वाली UDAN स्कीम के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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