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उत्तराखंड के आईपीएस अधिकारियों ने उच्च न्यायालय में निचले रैंकों पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को चुनौती दी


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-Oneindia Staff

उत्तराखंड कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उच्च न्यायालय का रुख किया है। वे इस आधार पर अपनी प्रतिनियुक्ति को चुनौती दे रहे हैं कि उन्हें केंद्रीय बलों में ऐसे पदों पर तैनात किया गया है जो उनके वर्तमान पद से नीचे हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायाधीश सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है।

 उत्तराखंड के आईपीएस अधिकारियों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विरोध किया

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अधिकारी, गर्ग और जोशी, क्रमशः 2005 और 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश द्वारा उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में उप महानिरीक्षक (DIG) के रूप में नियुक्त किया गया था। दोनों अधिकारी वर्तमान में उत्तराखंड में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर हैं और उनका तर्क है कि उनकी प्रतिनियुक्ति सेवा नियमों का उल्लंघन करती है।

याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि न तो किसी अधिकारी ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया था और न ही इसके लिए सहमति दी थी। उनकी अनिच्छा के बावजूद, राज्य सरकार ने 16 फरवरी 2026 को केंद्रीय सरकार को उनके नाम भेजे, जिससे प्रतिनियुक्ति आदेश जारी हुए। अधिकारियों का दावा है कि यह कदम स्थापित सेवा प्रोटोकॉल के खिलाफ है।

अदालत की कार्यवाही के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने सुझाव दिया कि किसी भी आपत्ति को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (Central Administrative Tribunal) के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिए। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि चूंकि प्रस्ताव राज्य सरकार से उत्पन्न हुआ था, इसलिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय के समक्ष मामला प्रस्तुत करना उचित था।

इन दलीलों के बाद, खंडपीठ ने राज्य सरकार को इस मामले के संबंध में एक औपचारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। यह मामला अधिकारियों की पोस्टिंग और सेवा नियमों के पालन के संबंध में राज्य और केंद्रीय अधिकारियों के बीच चल रहे तनाव को रेखांकित करता है।

With inputs from PTI

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शिमला के उपायुक्त ने एलपीजी आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच ईंधन की कमी न होने की पुष्टि की।


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-Oneindia Staff

शिमला की उपायुक्त, अनुपम कश्यप ने शुक्रवार को जिले में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने पुष्टि की कि इन ईंधनों की कोई कमी नहीं है, और आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी है। पश्चिम एशिया संघर्ष से अन्य क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने की चिंताओं के बीच, कश्यप ने निवासियों से अनावश्यक रूप से स्टॉक जमा करने से बचने का आग्रह किया।

 एलपीजी संबंधी समस्याओं के बीच शिमला ने ईंधन की कमी न होने की पुष्टि की।

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उसी दिन, एलपीजी सिलेंडरों से लदे 14 वाहनों को जिले के विभिन्न उप-डिवीजन में भेजा गया। कुल 4,488 घरेलू गैस सिलेंडर प्राप्त हुए, जिनमें से 4,249 विभिन्न क्षेत्रों में वितरित किए गए। वर्तमान में, शिमला जिले में 8,382 घरेलू गैस सिलेंडर हैं। इसके अतिरिक्त, 521 वाणिज्यिक सिलेंडर भेजे गए, जिससे अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता वितरण के लिए 499 उपलब्ध हैं।

कश्यप ने एयरपोर्ट एनवायरनमेंट मैनेजमेंट कमेटी की बैठक की भी अध्यक्षता की। उन्होंने अधिकारियों को राज्य की राजधानी से लगभग 22 किमी दूर जुब्बरहट्टी में शिमला हवाई अड्डे के आसपास कूड़ा संग्रह प्रणालियों को बेहतर बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थानीय परिषदों और हितधारकों को शामिल करने पर जोर दिया।

उपायुक्त ने हवाई अड्डे के प्रबंधन को स्कूली बच्चों और आम जनता के बीच स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष अभियान शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। हवाई अड्डे के पास वन्यजीव गतिविधि पर एक रिपोर्ट बैठक के दौरान प्रस्तुत की गई। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि हवाई अड्डे का प्रबंधन तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे खरीदने के लिए वन विभाग के साथ सहयोग कर रहा है।

कश्यप ने आगे हवाई अड्डे के संचालन के आसपास सुरक्षा और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, इस क्षेत्र में किसी भी भवन निर्माण के लिए हवाई अड्डे के प्रबंधन से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया।

With inputs from PTI

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Afghanistan-Pakistan Conflict: इस्लामाबाद के फेज-6 में अफगानिस्तान का ड्रोन हमला, PAK ने दोनों ड्रोन मार गिराए


International

oi-Divyansh Rastogi

Afghanistan-Pakistan Conflict: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के फेज-6 इलाके में शुक्रवार रात अफगानिस्तान की तरफ से दो ड्रोन हमले की कोशिश की गई। अफगानिस्तान के खुफिया महानिदेशालय के प्रवक्ता खलील हमराज ने दावा किया कि इन ड्रोन से इस्लामाबाद के पास एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया था।

हालांकि पाकिस्तानी पुलिस और सूचना मंत्रालय ने तुरंत जवाब दिया-दोनों ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक उपायों से मार गिराए गए और किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। मंत्रालय ने आगे कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने कोहाट में तीन साधारण ड्रोन तैनात करने की कोशिश की, जिनमें से दो को मार गिराया गया। इस दौरान मलबे से दो नागरिक घायल हो गए।

afghanistan-pakistan-conflict

दोनों देशों के अलग-अलग दावे

अफगानिस्तान का दावा

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर काबुल और अन्य इलाकों में रात भर हवाई हमले करने का आरोप लगाया। अफगान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी विमानों ने कंधार हवाई अड्डे के पास काम एयर के ईंधन डिपो को भी निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में कम से कम 6 नागरिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कोहाट जिले में पाकिस्तानी ठिकानों पर जवाबी हमले की बात कही।

पाकिस्तान का जवाब

पाकिस्तान की सेना और सूचना मंत्रालय ने साफ कहा कि कोई भी नागरिक आबादी को निशाना नहीं बनाया गया। हमले केवल TTP और उसके सहयोगी आतंकवादी ठिकानों पर किए गए। मंत्रालय के मुताबिक, अभियान में अफगानिस्तान के अंदर 4 आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया। पाकिस्तान ने इसे ‘खुला युद्ध’ करार दिया है।

तनाव क्यों बढ़ा?

  • फरवरी के अंत से दोनों देश एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं।
  • पाकिस्तान का आरोप: अफगान तालिबान सरकार TTP को पनाह दे रही है और भारत के साथ गठबंधन कर रही है।
  • अफगानिस्तान का आरोप: पाकिस्तान बिना वजह नागरिकों को मार रहा है।
  • अब तक पाकिस्तान का दावा-663 अफगान तालिबानी मारे गए। अफगानिस्तान ने भी भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।

क्षेत्रीय असर

यह लड़ाई तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। चीन के विशेष दूत यू शियाओयोंग ने काबुल के बाद इस्लामाबाद पहुंचकर दोनों पक्षों से बात की और ‘आतंकवाद के खतरे’ पर चिंता जताई। अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार संयम की अपील कर रहा है, लेकिन कोई असर नहीं दिख रहा।



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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वैश्विक संघर्षों के बीच सक्षम नेतृत्व भारत के विकास पथ को गति प्रदान करता है।


India

-Oneindia Staff

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत की प्रगति को सक्षम नेतृत्व का श्रेय दिया। 1,519 करोड़ रुपये की ग्रीन कॉरिडोर पहल के तहत परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए, उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास में तेजी लाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर जोर दिया। उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से लखनऊ, उन्नत बुनियादी ढांचे और रक्षा प्रौद्योगिकी के लिए एक केंद्र बनने के लिए तैयार है।

 योगी आदित्यनाथ भारत के विकास नेतृत्व पर

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रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह द्वारा परिकल्पित ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य शहर भर में यात्रा के समय को एक घंटे से घटाकर मात्र 15 मिनट करना है। आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ आने वाले आगंतुकों ने स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार देखे हैं। यह परियोजना लखनऊ मेट्रो विस्तार और किसान पथ जैसे बाहरी रिंग कॉरिडोर जैसी अन्य पहलों का पूरक है, जिससे राज्य की राजधानी में कनेक्टिविटी में सुधार होता है।

आदित्यनाथ ने 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षा को दोहराया, जिसमें शहरीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने शहरी विकास में संसाधन प्रबंधन के मॉडल के रूप में ग्रीन कॉरिडोर का वर्णन किया। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अतिक्रमण से सरकारी भूमि को पुनः प्राप्त करके और इसके उपयोग से संसाधन उत्पन्न करके, बिना किसी अलग बजट के 1,519 करोड़ रुपये की पहल को क्रियान्वित किया।

परियोजना में चार चरण शामिल हैं: दो चरणों को पूरा कर लिया गया है और उनका उद्घाटन किया गया है, जिसमें आई आई एम रोड से पक्का पुल और पक्का पुल डालीगंज से समतामूलक चौराहा शामिल हैं। तीसरे और चौथे चरण, समतामूलक चौराहा से शहीद पथ और शहीद पथ से किसान पथ का शिलान्यास किया गया है। पूरे कॉरिडोर की योजना लगभग 28 किमी तक फैली हुई है, जो लखनऊ के प्रमुख हिस्सों को जोड़ती है और यातायात प्रवाह में काफी सुधार करती है।

With inputs from PTI



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LPG Gas Man Died: पंजाब में LPG सिलेंडर के इंतजार में एक व्यक्ति की मौत, 2 घंटे कतार में रहा-फिर गिर पड़ा


Punjab

oi-Divyansh Rastogi

LPG Cylinder Tragedy: पंजाब के बरनाला (Barnala) जिले में एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि करीब दो घंटे तक कतार में इंतजार करने के बाद 66 वर्षीय व्यक्ति अचानक गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। यह घटना शुक्रवार (13 मार्च) को बरनाला जिले के Shahna ब्लॉक की एक गैस एजेंसी पर हुई।

LPG cylinder queue death Punjab

क्या हुआ घटना?

मित्तल नामक व्यक्ति सुबह जल्दी एजेंसी पहुंचे। उन्हें टोकन नंबर 25 मिला। वे करीब दो घंटे तक कतार में खड़े रहे। सुबह करीब 10 बजे थकान से बेहाल होकर उन्होंने एक गैस सिलेंडर पर बैठने की कोशिश की और अचानक गिर पड़े। पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। यह घटना पंजाब के कई इलाकों में LPG बुकिंग और आपूर्ति को लेकर बनी भ्रम की स्थिति के बीच हुई है।

कांग्रेस नेता का आरोप

भादौर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह धालीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मित्तल दिहाड़ी मजदूर थे। कड़ी मेहनत से परिवार चलाते थे। LPG सिलेंडर के लिए लंबी कतार में इंतजार करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से यह त्रासदी हुई। मृतक परिवार को आर्थिक मुआवजा देने की मांग की। धालीवाल ने दोनों केंद्र और पंजाब सरकार से तुरंत कार्रवाई की अपील की।

LPG को लेकर घबराहट क्यों?

विशेषज्ञों के मुताबिक पंजाब के कुछ इलाकों में एलपीजी को लेकर चिंता के पीछे कई कारण हैं:

1. पश्चिम एशिया में तनाव
भारत एलपीजी का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है। क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।

2. व्यावसायिक सिलेंडर में कटौती
अधिकारियों ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत की कटौती की है।

3. उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग
कई परिवार खाना बनाने के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता होने पर लोग जल्द सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर पहुंचने लगते हैं, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं।



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जम्मू और कश्मीर की अदालत ने भाजपा नेता की हत्या के मामले में आतंकवादियों को पनाह देने के आरोपी तीन लोगों को बरी कर दिया।


India

-Oneindia Staff

जम्मू और कश्मीर के बांदीपोरा जिले की एक अदालत ने पांच साल पहले एक भाजपा नेता और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या में शामिल आतंकवादियों को शरण देने के आरोपी तीन व्यक्तियों को बरी कर दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के तहत विशेष न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे जिला और सत्र न्यायाधीश मीर वजा ने बुधवार को यह फैसला सुनाया।

 अदालत ने भाजपा नेता की हत्या के मामले में दो लोगों को बरी कर दिया

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आरोपी – अब्रार गुलजार खान, मुनीर अहमद शेख और मोहम्मद वकार लोन – को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 39 के तहत अपर्याप्त सबूतों के कारण बरी कर दिया गया। न्यायाधीश ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते कि उन्हें किसी अन्य मामले के लिए आवश्यक न हो, जो जेल अधिकारियों द्वारा सत्यापन लंबित हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला भाजपा नेता शेख वसीम बारी, उनके पिता बशीर अहमद शेख और भाई उमर सईद सुल्तान बारी की हत्या से संबंधित है। जुलाई 2020 में बांदीपोरा जिले में आतंकवादियों ने उनकी दुकान में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष का अपना मामला साबित करने में असमर्थ रहना आरोपियों की रिहाई का कारण बना।

न्यायिक टिप्पणियां

न्यायाधीश मीर वजा ने कहा कि सभी 17 अभियोजन गवाहों की जांच के बाद, आरोपियों और 8 जुलाई 2020 के आतंकवादी हमले के बीच कोई प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य संबंध स्थापित करने वाले सबूत नहीं थे। अभियोजन पक्ष आरोपियों को अपराध से जोड़ने वाले फोरेंसिक या तकनीकी सबूत प्रदान करने में विफल रहा।

चल रही कार्यवाही

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि दो अन्य फरार आरोपी व्यक्तियों, आबिद रशीद डार और आजाद अहमद शाह के खिलाफ कार्यवाही कानूनी आवश्यकताओं के अनुसार जारी रहेगी। 89 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में बरी किए गए तीन व्यक्तियों के खिलाफ सबूतों की कमी पर प्रकाश डाला गया।

With inputs from PTI

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गर्मियों में चाहिए सुकून? इवनिंग वॉक के लिए बागेश्वर की ये 2 लोकेशन बेस्ट, जानें वजह


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Bageshwar best location for walks : पहली लोकेशन विकास भवन से लेकर डीएम कोर्ट तक जाने वाला रास्ता है. यह सड़क हल्की चढ़ाई और हरियाली से घिरी हुई है, जहां शाम को ठंडी और ताजा हवा दिल को छूती है. दूर-दूर तक फैले घर, मंदिरों की घंटियां और पहाड़ों के बीच बहती नदियों का नजारा देखते ही बनता है. दूसरी लोकेशन शिक्षा विभाग कार्यालय से जजी कोर्ट की ओर जाने वाली रोड है. यहां पैदल चलने के लिए पगडंडियां और सड़क के किनारे हरे-भरे घास के मैदान हैं.

बागेश्वर. अगर आप उत्तराखंड के बागेश्वर में रहते हैं या यहां घूमने आने का प्लान बना रहे हैं, शाम के समय टहलने के लिए किसी शांत और खूबसूरत जगह की तलाश कर रहे हैं तो शहर में ऐसी दो लोकेशन हैं, जहां आप आराम से इवनिंग वॉक का आनंद ले सकते हैं. इन जगहों की खास बात यह है कि यहां से बागेश्वर शहर के सुंदर नजारे के साथ-साथ हिमालय की पहाड़ियों की झलक भी देखने को मिलती है. यही वजह है कि स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले पर्यटक भी इन रास्तों को शाम की सैर के लिए पसंद करते हैं.

बागेश्वर की सुनीता टम्टा लोकल 18 से बताती हैं कि पहली लोकेशन विकास भवन से लेकर डीएम कोर्ट तक जाने वाला रास्ता है. यह सड़क हल्की चढ़ाई और हरियाली से घिरी हुई है, जहां शाम के समय ठंडी और ताजा हवा चलती है. यहां से नीचे बसा बागेश्वर शहर बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है. दूर-दूर तक फैले घर, मंदिरों की घंटियों की आवाज और पहाड़ों के बीच बहती नदियों का दृश्य लोगों को काफी सुकून देता है. शाम के समय यहां कई लोग वॉक, हल्की एक्सरसाइज और फोटो खींचने के लिए भी पहुंचते हैं.

दूसरी बेहतरीन लोकेशन शिक्षा विभाग कार्यालय से जजी कोर्ट की ओर जाने वाली रोड है. यह रास्ता भी प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर माना जाता है. यहां पैदल चलने के लिए पगडंडियां और सड़क के किनारे हरे-भरे घास के मैदान दिखाई देते हैं. आसपास ऊंची-ऊंची पहाड़ियां और साफ मौसम में हिमालय की चोटियों की झलक भी देखने को मिल जाती है. यही कारण है कि यह रास्ता भी स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है.

क्यों यहां आना जरूरी

इन दोनों जगहों की खासियत यह है कि यहां का वातावरण काफी शांत और साफ है. दिनभर की भागदौड़ और काम के बाद जब लोग यहां शाम को टहलने आते हैं, तो उन्हें मानसिक शांति और ताजगी का अनुभव होता है. ठंडी हवा, खुला आसमान और प्राकृतिक नजारे दिनभर की थकान को कम करने में मदद करते हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि रोजाना 20 से 30 मिनट की वॉक शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इससे शरीर सक्रिय रहता है, हृदय स्वस्थ रहता है और तनाव भी कम होता है. ऐसे में अगर वॉक किसी प्राकृतिक और शांत वातावरण में की जाए तो इसका फायदा और भी बढ़ जाता है.

हर उम्र के लिए यादगार

बागेश्वर की ये दोनों लोकेशन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. यहां लोग परिवार के साथ सैर करने, दोस्तों के साथ समय बिताने या अकेले शांत माहौल में कुछ समय बिताने के लिए भी आते हैं. अगर आप भी बागेश्वर में इवनिंग वॉक के शौकीन हैं, तो इन दो खूबसूरत रास्तों को जरूर ट्राई कर सकते हैं. यहां की ठंडी हवा, हरियाली और हिमालय के नजारे आपकी शाम को यादगार बना देंगे.

About the Author

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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Iran-Israel War: ईरान के भीतर ‘जासूस नेटवर्क’ एक्टिव? इजरायल ने किए IRGC और बसीज चौकियों पर सटीक हमले


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oi-Divyansh Rastogi

Iran-Israel War: इजरायल ने ईरान पर अपने हमलों का नया और खतरनाक चरण शुरू कर दिया है। अब वह जमीन पर मौजूद मुखबिरों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की चौकियों को सटीक निशाना बना रहा है। रॉयटर्स को दिए एक सूत्र ने यह जानकारी दी है।

यह रणनीति ईरान की विशेष बलों को कमजोर करने का स्पष्ट संकेत है। इजरायल अमेरिका के साथ मिलकर हवाई हमले भी जारी रखे हुए है।

Iran-Israel War

इजरायल का लक्ष्य क्या है?

इजरायल का कहना है कि उसके युद्ध के उद्देश्य दो हैं:-

  • 1. ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना।
  • 2. ईरानी लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियां बनाना कि वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंक सकें।

हालांकि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद कहा है कि दूसरा लक्ष्य ‘अनिश्चित’ है। फिलहाल, ईरान में कोई बड़ा संगठित विरोध नहीं दिख रहा और शासक भी सत्ता छोड़ने के किसी संकेत नहीं दे रहे।

12 मार्च को क्या हुआ?

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने गुरुवार (12 मार्च ) को तेहरान में उन चौकियों पर हमला किया जिनका संचालन बसीज (Basij) द्वारा किया जाता था। बसीज IRGC के अधीन काम करने वाला अंशकालिक अर्धसैनिक बल है, जिसका इस्तेमाल अक्सर ईरान के अंदर विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए किया जाता है।

सूत्र (जिसने नाम न छापने की शर्त पर बात की) ने बताया कि तेहरान में जमीन पर मौजूद मुखबिरों ने इजरायल को तीन चौकियों के सटीक लोकेशन दिए थे। इन पर पिछले तीन दिनों में हमले किए गए। सूत्र ने यह पुष्टि नहीं की कि ये वही बसीज चौकियां थीं जिनका IDF ने जिक्र किया। यह खबर सबसे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रकाशित की थी। इजरायल की सेना ने टिप्पणी के अनुरोध पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह रणनीति?

  • IRGC और बसीज ईरान की रीढ़ हैं। इन पर हमला ईरान की आंतरिक सुरक्षा को सीधा नुकसान पहुंचाता है।
  • मुखबिरों का इस्तेमाल दिखाता है कि इजरायल के पास ईरान के अंदर गहरी खुफिया नेटवर्क है।
  • इससे पहले इजरायल हवाई हमलों पर निर्भर था, अब जमीन पर मुखबिरों के जरिए सटीक टारगेटिंग हो रही है।

ताजा घटना: ईरान की ओर से दागी मिसाइल इजरायल में गिरी

कुछ मिनट पहले मध्य इजरायल में एक मिसाइल गिरी, जो ईरान की ओर से दागी गई थी। यह दिखाता है कि ईरान भी जवाबी हमले जारी रखे हुए है। इजरायल की नई रणनीति – मुखबिरों से मिली जानकारी पर ईरानी चौकियों को निशाना बनाना – युद्ध को और गहरा बना रही है। IRGC और बसीज जैसे बलों पर हमले ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के साथ-साथ आंतरिक स्थिरता को भी चुनौती दे रहे हैं।

हालांकि नेतन्याहू ने सत्ता परिवर्तन की संभावना को अनिश्चित बताया है, लेकिन ये हमले ईरान के अंदर असंतोष बढ़ा सकते हैं। दोनों तरफ से हमले जारी हैं और क्षेत्र में तनाव चरम पर है। भारत समेत पूरी दुनिया इस युद्ध पर नजर रखे हुए है, क्योंकि होर्मुज पर इसका सीधा असर ऊर्जा सप्लाई और कीमतों पर पड़ रहा है।



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Hormuz से दो भारतीय गैस टैंकरों को गुजरने मिला सुरक्षित रास्ता, ईरान के राजदूत बोले- ‘भारत हमारा मित्र’


India

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Iran India Relations: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव के बीच भारत को बड़ी राहत की खबर आई है। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फथली ने स्पष्ट संकेत दिया कि दो भारतीय गैस टैंकरों को होर्मुज से गुजरने का सुरक्षित रास्ता देने की अनुमति दे दी गई है। उन्होंने कहा, ‘क्योंकि भारत हमारा मित्र है।

यह बयान ऐसे समय में आया जब ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण होर्मुज रूट बंद होने का खतरा मंडरा रहा था और भारत के LPG-तेल टैंकर फंस गए थे। राजदूत की बात ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का संकेत दिया है।

Iran India Relations

‘भारत हमारा मित्र है’

पत्रकारों से बातचीत में मोहम्मद फथली (Mohammad Fathali) से पूछा गया कि क्या भारतीय जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिलेगी। इस पर उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच दोस्ताना संबंध हैं और सकारात्मक घटनाक्रम जल्द सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘हां, क्योंकि भारत हमारा मित्र है। आप इसे बहुत जल्द देख सकते हैं।’ राजदूत के इस बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा और व्यापारिक आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा।

भारत-ईरान के साझा हित

फथली ने कहा कि भारत और ईरान के इस क्षेत्र में कई साझा हित हैं। उनके मुताबिक दोनों देशों के संबंध लंबे समय से सहयोग और भरोसे पर आधारित रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक भी हैं, और दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता में समान रुचि रखते हैं। राजदूत ने यह भी कहा कि कठिन समय में भारत ने कई क्षेत्रों में ईरान का सहयोग किया है, जिसे तेहरान महत्व देता है।

क्यों अहम है होर्मुज ?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण भाग इस संकरे समुद्री गलियारे से होकर गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और व्यापार पर पड़ सकता है। भारत भी अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, इसलिए इस मार्ग की सुरक्षा उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।

दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। भारत का 45% कच्चा तेल आयात और 85-90% LPG इसी रूट से आता है। युद्ध के कारण रूट बंद होने से LPG संकट गहराया था-बुकिंग पर 20-25 दिन वेटिंग, ब्लैक मार्केट में सिलेंडर 2000-3000 रुपये तक।

वैश्विक बाजार की नजर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सरकारें, ऊर्जा कंपनियां और शिपिंग कंपनियां इस समुद्री मार्ग की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। ऐसे माहौल में ईरान के राजदूत का यह बयान भारत के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाएगी।

ईरान के राजदूत का ‘भारत हमारा मित्र है’ वाला बयान होर्मुज संकट में भारत को तत्काल राहत दे रहा है। जबकि क्षेत्र में तनाव जारी है, दोनों देशों के बीच मित्रता और साझा हितों ने ऊर्जा सुरक्षा का रास्ता खोल दिया। सरकार का संदेश साफ है-घबराहट न करें, बुकिंग समय पर करें। होर्मुज रूट खुलने से LPG संकट जल्द खत्म होने की उम्मीद है। भारत की कूटनीति एक बार फिर काम कर रही है।



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7 मार्च से लापता थी 13 साल की बच्ची, बदायूं के एक घर से हुई बरामद, साथ काम करने वाले युवक ने रची थी साजिश


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दिल्ली की 13 साल की बच्ची 7 मार्च से लापता थी, बदायूं के एक घर से बरामद हुई. सहकर्मी युवक ने साजिश रची थी. पुलिस ने क्राइम ब्रांच की मदद से बच्ची को सुरक्षित ढूंढ निकाला.

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दिल्‍ली से लापता बच्‍ची को यूपी के बदायूं से बरामद किया गया है. (एआई इमेज)

Delhi Crime News: दिल्‍ली के कंझावला इलाके में रहने वाले एक परिवार की सुबह उस वक्‍त बेचैन हो चली, जब उनकी 13 साल की मासूम बच्‍ची अचानक घर से लापता हो गई. जब तक परिवार को इस बारे में कुछ समझ आता, वह बच्‍ची अपने परिवार से बहुत दूर जा चुकी थी. पिता और परिवार के बाकी सदस्य उसे ढूंढते-ढूंढते थक गए, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला. आखिरकार, परिजनों ने कंझावला पुलिस स्टेशन का दरवाजा खटखटाया. वहीं, पुलिस ने मामले की गंभीरता से लेते हुए गुमशुदगी और अपहरण का मामला दर्ज कर लिया.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें



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