Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया कि 14-15 विधायक उनके संपर्क में हैं। डिप्टी सीएम ने कहा कि विधायकों को बहुत तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं, लेकिन वे सभी अपने फैसले पर मजबूती से कायम हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर अपने विधायकों के क्रॉस वोटिंग का डर सताने लगा है।
डीके शिवकुमार ने कहा कि इन विधायकों को धमकियां दी जा रही हैं और उन्हें विभिन्न प्रकार के लालच भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सरकार की जिम्मेदारी है कि इन विधायकों को पूरी सुरक्षा दी जाए।डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार उनकी सुरक्षा और देखभाल कर रही है, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपना निर्णय ले सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन विधायकों में से कोई भी ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा बनने की इच्छा नहीं रखता।
Karnataka Politics: राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस जुटी विधायकों को बचाने में
राज्यसभा चुनाव से पहले ऑपरेशन लोटस फिर से चर्चा में है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश में क्रॉस वोटिंग की वजह से कांग्रेस कैंडिडेट अभिषेक मनु सिंघवी को हार मिली थी। डीके शिवकुमार ने यह भी कहा कि सभी विधायक राज्यसभा चुनाव के लिए स्वतंत्र उम्मीदवार को वोट देंगे। उनके अनुसार इस उम्मीदवार को कम्युनिस्ट पार्टी, बीजेडी और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि विधायक पूरी तरह अपने फैसले पर अडिग हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत मतदान करेंगे। शिवकुमार ने यह भी संकेत दिया कि विपक्ष की ओर से विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे।
Operation Lotus पहले भी रहा है चर्चा में
कर्नाटक की राजनीति में ‘ऑपरेशन लोटस’ शब्द का इस्तेमाल उस कथित रणनीति के लिए किया जाता है, जिसमें विपक्षी दलों के विधायकों को तोड़कर सरकार बनाने या गिराने की कोशिश के आरोप लगाए जाते रहे हैं। डीके शिवकुमार के ताजा बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि विपक्ष की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल कर्नाटक में इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
Badshah Tateeree Song Controversy: बॉलीवुड के फेमस सिंगर और रैपर बादशाह इन दिनों अपने नए गाने ‘टटीरी’ को लेकर बड़े विवाद में घिर गए हैं। कुछ दिन पहले रिलीज हुआ उनका गाना ‘टटीरी’ (Tateeree) इस समय विवाद का कारण बन गया है।
नए गाने ‘टटीरी’ को लेकर बुरे फंसे बादशाह गाने के बोलों को लेकर आपत्ति जताते हुए हरियाणा राज्य महिला आयोग (Haryana State Commission for Women) ने सिंगर बादशाह के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मामला अब इतना बढ़ गया है कि बादशाह की गिरफ्तारी की मांग भी उठने लगी है।
महिला आयोग के सामने पेश नहीं हुए बादशाह
-दरअसल इस मामले में रैपर बादशाह को आज यानी 13 मार्च 2026 (शुक्रवार) को महिला आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। हालांकि तय तारीख पर वह आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुए।
-बादशाह की ओर से वकील पेश हुए थे जिन्होंने बताया कि सिंगर किसी प्रोफेशनल कमिटमेंट की वजह से उपस्थित नहीं हो पाए हैं। इसके साथ ही वकील ने आयोग से अगली तारीख देने की मांग की है।
आयोग की अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
रैपर बादशाह के पेश न होने पर रेनू भाटिया (Renu Bhatia) जो हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष हैं, ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बैठक के दौरान स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर सिंगर तय समय तक आयोग के सामने पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्त करने के निर्देश
विवाद बढ़ने के बाद आयोग ने पुलिस को भी निर्देश जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंचकूला और पानीपत के पुलिस अधिकारियों को सिंगर बादशाह की गिरफ्तारी के लिए तैयार रहने और उनका पासपोर्ट जब्त करने के निर्देश दिए हैं ताकि वह देश छोड़कर बाहर न जा सकें। आयोग का कहना है कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी है।
रैपर बादशाह ने मांगी थी माफी
-आपको बता दें कि विवाद बढ़ने के बाद रैपर बादशाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
-इसके साथ ही बादशाह ने अपने विवादित गाने को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा भी दिया है। हालांकि सिंगर की माफी के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ है और अब महिला आयोग इस पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
LPG Crisis Explainer: मार्च 2026 में होर्मुज पर तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच LPG संकट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। बुकिंग पर 25 दिन का इंतजार, ब्लैक मार्केट में 1800-3000 रुपये तक सिलेंडर बिक रहा है।
लेकिन सवाल ये है कि आखिर भारत में LPG का पूरा सिस्टम कितना बड़ा है? कितने सिलेंडर हैं? रोज कितनी खपत होती है? और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana) ने गरीब परिवारों की रसोई को कितना मजबूत बनाया? आइए जानते हैं…
LPG Gas Cylinders Connections In India: भारत में कुल LPG कनेक्शन कितने हैं?
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ता देशों में से एक बन चुका है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, देश में 32.9 करोड़ से ज्यादा सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ता हैं। अगर इसे सरल तरीके से समझें तो देश में लगभग हर परिवार के पास गैस कनेक्शन मौजूद है। कई परिवारों के पास 2 सिलेंडर भी होते हैं, जिससे सिलेंडर खत्म होने पर तुरंत दूसरा सिलेंडर इस्तेमाल किया जा सके।
अगर हर कनेक्शन के पास औसतन दो सिलेंडर मानें, तो देश में कुल गैस सिलेंडरों की संख्या 60 से 65 करोड़ के बीच बैठती है। अगर इन सिलेंडरों को एक के ऊपर एक रख दिया जाए, तो ऊंचाई बुरज खलीफा (828 मीटर) से कई गुना ज्यादा हो जाएगी। इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए देश में हजारों बॉटलिंग प्लांट्स, लाखों डिलीवरी एजेंट और तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) दिन-रात काम करती हैं। भारत में LPG कवरेज अब 100 प्रतिशत से भी अधिक यानी करीब 102 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि देश के लगभग हर घर तक गैस कनेक्शन पहुंच चुका है।
LPG Cylinders Daily Used In India: भारत में रोज कितने LPG सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं?
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, भारत में हर दिन औसतन 55 लाख से अधिक LPG सिलेंडर की डिलीवरी होती है। इसका मतलब यह हुआ कि हर 24 घंटे में लाखों घरों और कारोबारों तक गैस सिलेंडर पहुंचाए जाते हैं। अगर इसे बड़े पैमाने पर देखें तो यह संख्या और भी चौंकाने वाली लगती है। हर महीने लगभग 1.6 करोड़ सिलेंडर की खपत होती है। वहीं साल भर में यह संख्या 20 करोड़ से भी ज्यादा हो जाती है। इन आंकड़ों में मुख्य रूप से घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलोग्राम सिलेंडर शामिल होते हैं, हालांकि इसमें कुछ हद तक होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर भी शामिल होते हैं।
रोजाना, मासिक और सालाना खपत: आंकड़े जो चौंकाते हैं
प्रतिदिन: 55 लाख से ज्यादा सिलेंडर
प्रति माह: करीब 1.65 करोड़ सिलेंडर
प्रति वर्ष: 20 करोड़ से ज्यादा सिलेंडर
LPG Consumption In India: भारत में कुल LPG खपत कितनी है?
भारत में LPG की कुल खपत पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017 में देश की कुल LPG खपत लगभग 21.6 मिलियन टन थी। यह आंकड़ा 2025 तक बढ़कर करीब 31 मिलियन टन (MMT) के आसपास पहुंच गया। अनुमान है कि 2026 तक यह 33 से 34 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। इसका मतलब यह है कि पिछले आठ साल में LPG की खपत में लगभग 44 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है।
8 साल में 44% उछाल
वित्तीय वर्ष
कुल खपत (मिलियन मीट्रिक टन)
बढ़ोतरी
FY 2017
21.6
–
FY 2025
31.3
0.44
FY 2026 (अनुमान)
33-34
–
LPG का सबसे ज्यादा उपयोग कहां होता है?
भारत में LPG का सबसे ज्यादा उपयोग घरेलू रसोई में होता है। कुल खपत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। इसके अलावा करीब 10 प्रतिशत गैस होटल, रेस्टोरेंट और फूड सर्विस इंडस्ट्री में उपयोग होती है। वहीं लगभग 5 से 6 प्रतिशत गैस छोटे उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल होती है। हाल के वर्षों में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी देखी गई है। फूड सर्विस सेक्टर, बड़े किचन और छोटे मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर अब तेजी से LPG अपना रहे हैं।
सेक्टर
खपत का हिस्सा
घरेलू रसोई
84-86%
होटल/रेस्तरां
10%
छोटे उद्योग/कमर्शियल
6%
Ujjwala Yojana Revolution: उज्ज्वला योजना- गरीब महिलाओं की रसोई में क्रांति
मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana) ने LPG को सिर्फ अमीरों का ईंधन नहीं, बल्कि गरीबों का भी बना दिया।
उज्ज्वला की उपलब्धियां (मार्च 2026 तक):
10.41 करोड़ से 10.53 करोड़ गरीब परिवारों को फ्री कनेक्शन (सिलेंडर, चूल्हा, रेगुलेटर, पाइप सब मुफ्त)
कुल लक्ष्य 10.60 करोड़ के करीब
अब तक 276 करोड़ से ज्यादा रिफिल उज्ज्वला परिवारों को दिए गए
FY 2024-25 में रोजाना 13.6 लाख रिफिल सिर्फ उज्ज्वला परिवारों को
उज्ज्वला के चरण समझें…
2016-2019: 8 करोड़ कनेक्शन (लक्ष्य पूरा)
उज्ज्वला 2.0 (2021): 1 करोड़ अतिरिक्त (जनवरी 2022 में पूरा)
2022: 60 लाख और
2023-24 से 2025-26: 75 लाख अतिरिक्त (जुलाई 2024 में पूरा)
योजना के तहत महिलाओं को बिना जमा राशि कनेक्शन मिला। 5 किलो डबल बॉटल ऑप्शन, 14.2 किलो से 5 किलो स्वैप, प्रवासी परिवारों के लिए स्व-घोषणा-सब कुछ आसान बनाया गया। जागरूकता के लिए LPG पंचायतें, ओओएच होर्डिंग्स, रेडियो जिंगल और विकसित भारत संकल्प यात्रा चलाई गई।
उज्ज्वला का असली प्रभाव:
स्वास्थ्य: लाखों महिलाएं धुएं से बच गईं। WHO के अनुसार, पारंपरिक चूल्हे से सालाना 4 लाख मौतें होती थीं-उज्ज्वला ने इसे कम किया।
महिला सशक्तिकरण: घर की मालकिन अब समय बचाकर पढ़ाई, काम या परिवार पर फोकस करती हैं।
पर्यावरण: लकड़ी-कोयले की कटाई कम हुई, कार्बन उत्सर्जन घटा।
रिफिल रेट: उज्ज्वला परिवारों में रिफिल 3.9 से बढ़कर 4.5 हो गया। यानी गरीब घर भी अब पूरी तरह गैस पर निर्भर।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जनवरी 2026 में कहा था: ‘उज्ज्वला सिर्फ कनेक्शन नहीं, बल्कि आदत बदल रही है।’
LPG GAS Imports: गैस कहां से आती है? 60% आयात पर निर्भरता
भारत अपनी LPG जरूरत का 55-60% आयात करता है (कतर, सऊदी अरब, UAE से)। 90% आयात होर्मुज से गुजरता है। इसी वजह से मौजूदा संकट। घरेलू उत्पादन FY2017 के 11.2 MMT से FY2025 में 12.8 MMT हो गया, लेकिन मांग इतनी तेज कि 25% बढ़ोतरी के बावजूद पूरा नहीं हो पाता।
Clean cooking works only when it is used regularly. India today runs a nationwide LPG system of 33 crore connections. Under PM Ujjwala Yojana, 10.41 crore households now cook using LPG, with the 10.60 crore target steadily being achieved. What made the change real is usage: *… pic.twitter.com/iCZX11w540
व्यावसायिक LPG पर कटौती, होटलों को प्राथमिकता नहीं
इन कदमों से घरेलू उत्पादन 25% बढ़ा, जो रोजाना खपत का करीब 10% कवर करता है।
दिलचस्प तथ्य
LPG कवरेज 102.8% पहुंच गया (कुछ घरों में 2 कनेक्शन)।
सीएनजी-PNG बढ़ने के बावजूद सिलेंडर की मांग नहीं घटी।
उज्ज्वला ने ग्रामीण LPG कवरेज को 62% से 100%+ कर दिया।
संकट के बीच उम्मीद की किरण
33 करोड़ कनेक्शन, 55 लाख रोजाना डिलीवरी और उज्ज्वला की बदौलत भारत का LPG नेटवर्क दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत है। सरकार ने घरेलू प्राथमिकता, अतिरिक्त केरोसिन आवंटन और वैकल्पिक आयात से बैकअप प्लान तैयार कर लिया है। पेट्रोल-डीजल की कोई समस्या नहीं, रिफाइनरियां 100%+ क्षमता पर चल रही हैं।
LPG संकट अस्थायी है, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि हम कितनी बड़ी ऊर्जा व्यवस्था को संभाल रहे हैं। उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति दी, महिलाओं को सम्मान दिया और भारत को क्लीन एनर्जी की ओर ले गई। आज हर गांव-शहर में गैस स्टोव जल रहा है-यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक क्रांति है।
घबराएं नहीं। बुकिंग समय पर करें, अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकार के बैकअप प्लान पर भरोसा रखें। 33 करोड़ परिवारों की रसोई एक साथ चल रही है-यह भारत की ताकत है। संकट आएगा, लेकिन उज्ज्वला और मजबूत कूटनीति के साथ हम पहले की तरह उबर जाएंगे।
SC Dismisses Shopping Mall Plea On Public Safety; Want Us To Run Country?
नई दिल्ली1 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि क्या आप चाहते हैं कि हम पूरे देश को चलाएं?। याचिका में देश में सड़कों, पुलों और बिजली की तारों आदि की ठीक से देखभाल करके जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह याचिका शॉपिंग मॉल जैसी है, जिसमें हर तरह की मांग रख दी गई है।
पीठ ने कहा कि ऐसे व्यापक आदेश देना लगभग असंभव है, जब तक कि उठाए गए मुद्दे स्पष्ट और विशेष न हों। इसलिए हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे।
हाईकोर्ट जाने को कहा
हालांकि अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो उचित तरीके से नई याचिका बनाकर संबंधित हाईकोर्ट में जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले की असल बातों (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।
CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप बहुत व्यापक निर्देश मांग रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों का राज्यों के वित्त (पैसों) पर असर पड़ेगा, इसलिए राज्यों की स्थिति समझने के लिए हाईकोर्ट ज्यादा उपयुक्त हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सरकारी लापरवाही के कारण देशभर में लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
याचिका में हर तरह की मांग
याचिका में केंद्र सरकार और अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे:
सड़कों, पुलों और बिजली की तारों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित जांच और मरम्मत करें
उच्च स्तरीय स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट समिति बनाएं
इस समिति में सिविल इंजीनियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ, फोरेंसिक जांचकर्ता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हों
यह समिति शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक ढांचे की नियमित सुरक्षा जांच करे
2020 से अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मौतों का डेटा इकट्ठा कर डिजिटल रूप में सार्वजनिक किया जाए
हर जिले की तिमाही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की जाए————————-ये खबर भी पढ़ें:सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करे; शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की आशंका
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है।
कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन धाराओं से मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप था। पढ़ें पूरी खबर…
Opportunity for youth to go abroad विदेशी भाषाएं सीखकर विभिन्न देशों में नौकरी करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं को सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने अल्मोड़ा में लैंग्वेज ट्रेनिंग सेंटर खोलने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अंतर्गत वर्तमान में सिर्फ एक सेंटर है।
यह सेंटर वर्ष 2023 से देहरादून में संचालित है। अल्मोड़ा में सेंटर खुलने के बाद इस तरह के सेंटरों की प्रदेश में संख्या दो हो जाएगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 से मुख्यमंत्री कौशल उन्ययन एवं वैश्विक रोजगार योजना को शुरू किया है।
इसके अंतर्गत देहरादून में पहला लैंग्वेज ट्रेनिंग सेंटर खोला गया है, जिसमें विभिन्न भाषाओं का बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और यहीं से उनकी नौकरी की व्यवस्था की जा रही है। जो कि लाखों में भी कमा रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि इन सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सरकार की ओर से अल्मोड़ा में लैंग्वेज ट्रेनिंग सेंटर खोलने की घोषणा की। इस योजना में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को लाभ पहुंचाने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी काफी गंभीर है।
यही वजह है कि इस योजना में ट्रेनिंग का जो बजट सिर्फ 75 लाख रूपये का था, उसे इस बार 3.3 करोड़ रूपये कर दिया गया है। कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मुख्यमंत्री की सकारात्मक सोच के चलते अब और ज्यादा बच्चों को ट्रेनिंग का लाभ मिल पाएगा।
147 -बच्चों को अभी तक दिया गया विदेशी भाषा का प्रशिक्षण
92- बच्चों की विभिन्न देशों में अभी तक लग चुकी है नौकरी
08-से 10 माह का बच्चों को दिया जाता है सेंटर में प्रशिक्षण
16 -अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से दिया जा रहा है प्रशिक्षण
10-और बच्चों के लिए सऊदी अरब में है नौकरी का र्प्रस्ताव
सऊदी अरब में सेवारत 30 बच्चे सुरक्षित पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात के बीच राज्य सरकार उन लोगों की भी पूरी चिंता कर रही है, जिन्हें इस योजना के माध्यम से विदेशों में नौकरी मिली है। सदन में कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि सऊदी अरब में सेवारत लोगों से बात हुई है और वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
PM Modi In Assam: असम विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है और प्रदेश में हर ओर सियासी सरगर्मियों का दौर है। इस बीच गुवाहाटी में पीएम ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पंडित नेहरू से सीख लेने की नसीहत दी है।
US Stuck In War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बार-बार बदलते बयान से अब अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया ऊब गई है। उनके बयानों से ऐसा लग रहा है कि इस जंग की शुरुआत कर के बुरे फंस गए और अब बस निकलना चाहते हैं। अपने बयानों में कभी वह कहते हैं कि अमेरिका जंग जीत चुका है, तो कभी कहते हैं कि अभी ऑपरेशन खत्म नहीं हुआ है।
इसके पीछे व्हाइट हाउस के अंदर चल रही एक राजनीतिक खींचतान बताई जा रही है। जिसके चक्कर में ट्रंप का ही खेमा दो धड़ों में बंटा दिख रहा है। असल में ट्रंप के कई सलाहकार और राजनीतिक सहयोगी इस बात पर अलग-अलग राय दे रहे हैं कि जंग में जीत का शंखनाद कब और कैसे बजाया जाए। वहीं दूसरी तरफ यह जंग का ये रायता सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहा और इसने पूरे मिडिल ईस्ट को लपेटे में ले लिया है।
ट्रंप के सलाहकारों में भयंकर मतभेद
ट्रंप के एक सलाहकार और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों के मुताबिक व्हाइट हाउस के अंदर इस युद्ध को लेकर काफी मतभेद हैं। कुछ अधिकारी राष्ट्रपति को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की वजह से गैसोलीन की कीमतें बढ़ जाती हैं, तो इसका घरेलू राजनीति पर बड़ा निगेटिव असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ कुछ कट्टरपंथी नेता चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और ज्यादा तेज की जाए ताकि उसे पूरी तरह कमजोर किया जा सके।
व्हाइट हाउस से बाहर आने लगी बातें
समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के अंदर हो रही इन चर्चाओं की पहले कभी इतनी खुलकर रिपोर्टिंग नहीं हुई थी। यह स्थिति खास इसलिए भी है क्योंकि यह अभियान 2003 के Iraq War के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अभियान माना जा रहा है। यानी अमेरिका के भीतर ही इस युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति पर पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है।
ट्रंप के लिए राजनीतिक दांव बहुत बड़ा
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि इस युद्ध में ट्रंप के लिए राजनीतिक दांव बहुत ऊंचे हैं। उन्होंने पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि अमेरिका को मूर्खतापूर्ण मिलिट्री दखलों से दूर रखा जाएगा। यहां ट्रंप बाइडेन के कार्यकाल में छिड़े रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास युद्ध की ओर इशारा कर रहे थे। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा, सत्ता संभालने के लगभग दो हफ्ते बाद ही अमेरिका एक ऐसे युद्ध में शामिल हो गया जिसने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला दिया और अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार को भी प्रभावित कर दिया।
युद्ध के नए नाम खोजने की कोशिशें
जब 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ था, तब इसके लक्ष्य काफी बड़े बताए गए थे। लेकिन हाल के दिनों में ट्रंप इस संघर्ष को एक “सीमित सैन्य अभियान” यानी लिमिटेड मिलिट्री ऑपरेशन्स के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस ऑपरेशन के अधिकांश लक्ष्य पहले ही पूरे हो चुके हैं। इस बदलाव से साफ दिखता है कि व्हाइट हाउस के अंदर रणनीति को लेकर लगातार मंथन चल रहा है।
तेल-गैस के बाजारों में भी दिख रहा असर
ट्रंप के बदलते बयानों का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। तेल और गैस के बाजार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। तेल और गैस की कीमतें उनके बयानों के बाद कभी तेजी से ऊपर जाती हैं तो कभी नीचे गिर जाती हैं। यानी निवेशकों और बाजार को भी साफ संकेत नहीं मिल पा रहा कि युद्ध कितने समय तक चलेगा।
कभी हां- कभी ना
हाल ही में केंटकी में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने पहले कहा कि “हमने युद्ध जीत लिया है। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने अपना बयान बदलते हुए कहा कि “हम जल्दी बाहर नहीं निकलना चाहते। हमें काम पूरा करना होगा।” इस तरह के बयान यह दिखाते हैं कि ट्रंप अभी तक स्पष्ट रूप से यह तय नहीं कर पाए हैं कि इस युद्ध को अपनी जनता के सामने कैसे परोसें, फिर दुनिया का तो भूल ही जाइए।
सलाहकार दे रहे ट्रंप को चेतावनी
अमेरिका के आर्थिक सलाहकारों और अधिकारियों- जिनमें ट्रेजरी डिपार्टमेंट और नेशनल इकॉनोमिक काउंसिलर के सदस्य शामिल हैं, इन सब लोगों ने ट्रंप को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और गैसोलीन महंगा होता है, तो जनता का युद्ध के प्रति समर्थन तेजी से कम हो सकता है। इन चर्चाओं की जानकारी नाम न छापने की शर्त पर एक सलाहकार और दो अन्य सूत्रों ने दी।
राजनीतिक टीम की चिंता
ट्रंप की राजनीतिक टीम भी इसी तरह की चिंता जता रही है। इनमें चीफ ऑफ स्टाफ Susie Wiles और डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ James Blair शामिल हैं। इन नेताओं का मानना है कि ट्रंप को जीत की परिभाषा सीमित रखनी चाहिए। जैसे कि यह कहना कि सेना के ईरान में चल रहे ऑपरेशन लगभग खत्म होने वाला है। न कि जीत का दावा करना चाहिए।
कट्टरपंथी नेताओं का दबाव
लेकिन दूसरी तरफ कुछ रिपब्लिकन नेता चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव जारी रखा जाए। इस समूह में अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham और Tom Cotton शामिल हैं। इसके अलावा मीडिया कमेंटेटर भी इसी तरह की राय रखते हैं। उन नेताओं का तर्क भी जान लेते हैं। इन नेताओं का कहना है कि अमेरिका को ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकना चाहिए। साथ ही ये भी कि अमेरिकी सैनिकों और शिपिंग पर हुए हमलों का मजबूत और सख्त जवाब देना जरूरी है।
ट्रंप के समर्थकों का भी दबाव
एक तीसरा गुट भी है, ट्रंप का कट्टर समर्थकों का गुट। इनें आप ट्रंप के अंधभक्त भी कह सकते हैं। इसमें रणनीतिकार Steve Bannon और टीवी होस्ट Tucker Carlson जैसे लोग शामिल हैं। ये लोग ट्रंप से कह रहे हैं कि अमेरिका को मिडिल ईस्ट के एक और लंबे युद्ध में नहीं फंसना चाहिए। ये इशारा कुछ हद तक 1955 से लेकर 1975 तक चले अमेरिका-वियतनाम युद्ध की तरफ है, जहां अमेरिका ने 20 सालों तक जंग लड़ी लेकिन अंत में सिर्फ ठेंगा हाथ लगा।
तीन अलग-अलग संदेश देने की रणनीति
ट्रंप के एक सलाहकार के मुताबिक राष्ट्रपति एक तरह से तीन अलग-अलग संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। कट्टरपंथी नेताओं को लगता है कि सैन्य अभियान जारी रहेगा। बाजार को यह संकेत दिया जा रहा है कि युद्ध जल्दी खत्म हो सकता है। और उनके समर्थकों को बताया जा रहा है कि संघर्ष ज्यादा नहीं फैलेगा। और यही ट्रंप की सबसे बड़ी गलती है कि ट्रंप तीनों पक्षों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।
व्हाइट हाउस अलग रास्ते पर
जब इस रिपोर्ट पर टिप्पणी मांगी गई तो व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने इसे गुमनाम सोर्सेस की अटकलें बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति कई लोगों की राय सुनते हैं लेकिन अंतिम फैसला वही लेते हैं। मतलब जवाब वो भी नहीं दे पाईं।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी बना एपिक सिरदर्द
लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति की पूरी टीम का ध्यान “Operation Epic Fury” के मकसद को पूरा करने पर है। यानी प्रशासन का आधिकारिक संदेश यही है कि अभियान अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ठीक से देखें तो लेविट एक चौथी बात कह कर चली गईं।
भाईजान भूल गए ‘मकसद’
जब अमेरिका ने यह युद्ध शुरू किया था तब उसके मकसद पूरी तरह साफ नहीं थे। कभी कहा गया कि यह ईरान के संभावित हमले को रोकने के लिए है, कभी कहा गया कि उसका न्यूक्लियर कार्यक्रम खत्म करना है, और कभी यह भी कहा गया कि ईरान की रिजीम चेंज करना है।
बाजारों को संभाल रहे ट्रंप
अब जब युद्ध लंबा खिंचता दिख रहा है, ट्रंप के आर्थिक सलाहकार बाजारों को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। वे यह संदेश दे रहे हैं कि युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा और तेल-गैस की कीमतों में बढ़ोतरी अस्थायी है।
हार को जीत बताने की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक कुछ सहयोगियों ने ट्रंप को सलाह दी है कि युद्ध को ऐसी स्थिति में खत्म किया जाए जिसे सैन्य जीत कहा जा सके। फिर चाहे, ईरान की लीडरशिप पूरी तरह खत्म न हो और उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम भी पूरी तरह से बर्बाद न हुआ हो। याद रहे, ऐसी ही जीत का दावा अमेरिका पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने वियतनाम में पीठ दिखाकर लौटते वक्त किया था। फिलहाल अमेरिका के इस युद्ध में 7 सैनिक मारे जा चुके हैं और 4 और सैनिक हाल ही में हुई KC-135 एयरक्राफ्ट की घटना में हताहत होने की खबर आ गई है।
अमेरिकी राजनीति में ट्रंप की फजीहत
अगर इस वजह से अमेरिका में गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो नवंबर के मिड टर्म इलेक्शन में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। इसी से ट्रंप की फजीहत भी हो सकती है। ट्रंप के कुछ करीबियों ने उन्हें वेनेजुएला की तर्ज पर जीत का भरोसा दिलाया था पर ऐसा दूर-दूर तक नहीं हो रहा है।
लंबा चला युद्ध तो अमेरिका का नुकसान
वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला, अमेरिकी सैनिकों की मौत बढ़ी और आर्थिक लागत ज्यादा हुई, तो ट्रंप के समर्थकों का समर्थन भी धीरे-धीरे कम हो सकता है। जो इतिहास में ट्रंप को आबाद के नाम पर बर्बाद करने वाले राष्ट्रपति के तौर पर याद रखवा सकता है।
इस एनालिसिस पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।
Adani Foundation Swabhiman Program: अडानी फाउंडेशन ने अपने महिला सशक्तिकरण अभियान ‘स्वाभिमान’ को बड़े स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य अब पूरे भारत में 10 लाख महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना है, ताकि महिलाएं अपने छोटे कारोबार शुरू कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
इस विस्तार की घोषणा मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में आयोजित कार्यक्रम ‘स्वाभिमान – द राइज़ ऑफ शी’ के दौरान की गई। इस कार्यक्रम में अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी और ट्रस्टी शिलिन अडानी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं।
स्वाभिमान कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं बल्कि उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाना है। इसके तहत महिलाओं को कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही उन्हें बाजार से जोड़ने में भी मदद की जाती है ताकि वे अपने उत्पादों को आसानी से बेच सकें।
इस राष्ट्रीय विस्तार की शुरुआत महाराष्ट्र से होगी। पहले चरण में योजना है कि एक साल के भीतर राज्य में करीब एक लाख महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाए। इसके जरिए महिला नेतृत्व वाले छोटे कारोबारों और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
यह पहल महिला आर्थिक विकास महामंडल के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत लागू की जा रही है। महिला आर्थिक विकास महामंडल महाराष्ट्र सरकार की वह प्रमुख एजेंसी है जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों के विकास पर काम करती है।
अब तक इस कार्यक्रम के जरिए मुंबई के वंचित समुदायों की 4,500 से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से कई महिलाओं ने छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए एक खास पहल ‘स्वतेजा मार्ट’ का भी उद्घाटन किया गया। यह एक सामुदायिक बाजार है, जहां महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए मंच मिलेगा। यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से बिक्री की सुविधा दी जाएगी ताकि महिलाओं के कारोबार को ज्यादा ग्राहक मिल सकें।
इसी पहल के तहत एक क्लाउड किचन की भी शुरुआत की गई है, जिससे महिलाओं को फूड बिजनेस में अवसर मिल सकें। इससे वे घर से ही अपना काम शुरू कर सकती हैं और आय का नया स्रोत बना सकती हैं।
इस मौके पर स्वाभिमान कार्यक्रम से जुड़े बदलावों की कहानियों को समेटते हुए एक कॉफी टेबल बुक का भी अनावरण किया गया। इस पहल के जरिए मुंबई में अब तक 800 से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो यह दिखाता है कि सही प्रशिक्षण और सहयोग मिलने पर महिलाएं कितनी तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं।
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि यह कार्यक्रम महिलाओं की वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उनके मुताबिक ऐसी पहलें सरकार की महिला आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं को भी मजबूत करती हैं।
मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शहर में महिलाओं की बढ़ती उद्यमिता एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि धारावी जैसे इलाकों में भी महिलाएं अब छोटे कारोबार शुरू कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
डॉ. प्रीति अडानी ने इस मौके पर कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना किसी भी समाज को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है। उनके मुताबिक जब महिलाओं को सही प्रशिक्षण, वित्तीय जानकारी और बाजार तक पहुंच मिलती है तो वे न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे समुदाय के विकास में योगदान देती हैं।
स्वाभिमान कार्यक्रम के तहत महिलाओं को उद्यमिता, वित्तीय प्रबंधन और आजीविका से जुड़े कौशल की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें मेंटरशिप, बाजार से जुड़ने के अवसर और कारोबार शुरू करने में मार्गदर्शन भी दिया जाता है।
आज कई महिलाएं घर से छोटे व्यवसाय चला रही हैं या सामूहिक उद्यम शुरू कर चुकी हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।
अडानी फाउंडेशन इस समय शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, जलवायु परिवर्तन और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। फाउंडेशन की पहलें देश के 22 राज्यों के 7,000 से ज्यादा गांवों में पहुंच चुकी हैं और करीब 9.6 मिलियन लोगों को लाभ मिल रहा है।
स्वाभिमान कार्यक्रम के राष्ट्रीय विस्तार के साथ उम्मीद की जा रही है कि यह आने वाले समय में भारत के सबसे बड़े महिला उद्यमिता आंदोलनों में से एक बन सकता है, जहां महिलाएं सिर्फ रोजगार पाने वाली नहीं बल्कि नए अवसर पैदा करने वाली उद्यमी बनकर सामने आएंगी।
Rajiv Adatia Sell Gas Cylinder: अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी देखने को मिल रहा है। युद्ध जैसी स्थिति के चलते कई जगहों पर एलपीजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई की कमी की खबरें सामने आ रही हैं।
सिलेंडर की किल्लत का असर कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत का असर खासतौर पर रेस्तरां और होटल कारोबार पर पड़ रहा है। कई जगहों पर होटल बंद होने की नौबत आ गई है जबकि कुछ पहले ही ताले लगा चुके हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक्टर राजीव अदातिया (Rajiv Adatia) का एक मजेदार पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।
राजीव अदातिया का मजेदार पोस्ट
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले एक्टर राजीव अदातिया ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की है। फोटो में वह सड़क किनारे खड़े नजर आ रहे हैं और उसके साथ उन्होंने ऐसा कैप्शन लिखा है कि फैंस हंसते-हंसते लोटपोट हो गए हैं।
‘बॉलीवुड से ज्यादा कमाई गैस बेचने में’
राजीव अदातिया ने मजाकिया अंदाज में लिखा है कि उन्हें फिलहाल बॉलीवुड से ज्यादा कमाई गैस बेचने में नजर आ रही है। उन्होंने पोस्ट में कहा कि एक टैंक की कीमत 10 लाख रुपये है और यह उनकी रोजाना की कमाई से कहीं बेहतर सौदा है। उनके इस मजेदार कैप्शन ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है।
सेलेब्स ने भी दिए मजेदार रिएक्शन
-राजीव अदातिया के इस पोस्ट पर कई सेलेब्स ने भी मजेदार रिएक्शन दिए हैं। टीवी एक्टर अली गोनी ने कमेंट करते हुए मजाक में पूछा कि क्या ग्रीन कलर वाला टैंक भी मिलेगा? वहीं जरीन खान, टीना दत्ता और कल्पना गंधर्व समेत कई सितारों ने हंसने वाले इमोजी के साथ पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है।
-राजीव अदातिया का ये पोस्ट इतना वायरल हुआ कि कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मजाक-मजाक में उनसे सिलेंडर की मांग भी कर डाली है। कुछ लोगों ने कमेंट करते हुए लिखा है कि अगर सच में गैस मिल रही हो तो उन्हें भी एक-दो सिलेंडर दिलवा दें।
शिल्पा शेट्टी और शमिता शेट्टी को बहन मानते हैं राजीव
-जानकारी के अनुसार राजीव अदातिया का बॉलीवुड की दो मशहूर बहनों शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) और शमिता शेट्टी (Shamita Shetty) के साथ बेहद खास रिश्ता है। दोनों बहनें राजीव को अपना मुंहबोला भाई मानती हैं और हर साल रक्षाबंधन के मौके पर राखी भी बांधती हैं।
-राजीव अदातिया का यो मजेदार पोस्ट ऐसे समय में वायरल हुआ है जब देश में गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की कमी को लेकर लोग पहले से ही चर्चा कर रहे हैं।