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चंबल में घड़ियालों के लिए काल बना रेत माफिया: अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-जहां CM ने घड़ियाल छोड़े, वह इलाका भी सुरक्षित नहीं – Bhopal News




राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य में हो रहे अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मीडिया रिपोर्ट्स और सीएसआर (CSR) की रिपोर्टों के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि संरक्षित क्षेत्रों में पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद रेत का अवैध खनन और परिवहन जारी है, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए काल बन रहा है। जहां CM ने घड़ियाल छोड़े, वह इलाका भी सुरक्षित नहीं सुनवाई के दौरान विक्रम नाथ ने गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि CM मोहन यादव ने जिन इलाकों में घड़ियाल छोड़े थे, वे क्षेत्र भी अब सुरक्षित नहीं रहे। अवैध खनन के कारण वहां का प्राकृतिक वातावरण खराब हो रहा है। खनन माफिया के डर और प्राकृतिक आवास नष्ट होने की वजह से घड़ियालों को अपने क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हमने देखा है कि जिन संरक्षित क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है, वहां अंधाधुंध खनन हो रहा है। इसके कारण घड़ियालों को विस्थापित होना पड़ रहा है। मामला अब उचित दिशा-निर्देशों के लिए प्रधान न्यायाधीश (CJI) के समक्ष भेजा जाएगा।” — जस्टिस संदीप मेहता पारिस्थितिक तंत्र पर मंडरा रहा खतरा चंबल अभयारण्य का 435 किलोमीटर लंबा क्षेत्र घड़ियालों के अलावा रिवर डॉल्फिन, दुर्लभ कछुओं और पक्षियों का भी घर है। कोर्ट ने चिंता जताई कि संरक्षित क्षेत्र में रेत का परिवहन और खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी यह धड़ल्ले से जारी है। रेत इस पूरे ईको-सिस्टम का आधार है। इसके हटने से घड़ियालों के प्रजनन और रहने की जगह खत्म हो रही है। अवैध खनन न केवल वन्यजीवों बल्कि पूरे पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ रहा है। तीन राज्यों की सीमा पर स्थित है ‘सेंसिटिव जोन’ 1979 में अधिसूचित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के त्रिकोणीय क्षेत्र (Trisection) पर स्थित है। इसे मुख्य रूप से लुप्तप्राय घड़ियालों को बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह माफियाओं की शरणस्थली बनता जा रहा है।



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खेल जगत में शोक की लहर, मैच के दौरान 25 साल के भारतीय खिलाड़ी का निधन, मैदान पर ही थम गई सांसें


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oi-Amit Kumar

Who Was Ravinder Singh: भारतीय फुटबॉल जगत गहरे सदमे और शोक में है। नामधारी एफसी (Namdhari FC) के प्रतिभाशाली और युवा डिफेंडर रविंदर सिंह का महज 25 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया है। पंजाब में एक मैच के दौरान अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद वे मैदान पर ही गिर पड़े थे। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मैदान पर अचानक हुआ हादसा (Ravinder Singh Dies)

शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार रविंदर सिंह पंजाब में एक फुटबॉल मैच खेल रहे थे। तभी उन्होंने सीने में तेज दर्द महसूस किया और वह अचानक मैदान पर गिर पड़े। साथी खिलाड़ी और टीम प्रबंधन उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले गए, लेकिन दुर्भाग्यवश डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत) घोषित कर दिया। मौत का प्राथमिक कारण हृदय गति रुकना (सस्पेक्टेड हार्ट अटैक) माना जा रहा है, हालांकि मेडिकल जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

Ravinder Singh

(फोटो सोर्स- ट्विटर)

कौन थे रविंदर सिंह? (Who Was Ravinder Singh)

रविंदर सिंह भारतीय घरेलू फुटबॉल ढांचे में सक्रिय ‘नामधारी एफसी’ के एक भरोसेमंद और मेहनती डिफेंडर थे। क्लब उन्हें अपनी रक्षापंक्ति के एक मजबूत स्तंभ के रूप में देखता था। खेल के प्रति उनके समर्पण और अनुशासन के कारण वे अपने कोचों और साथियों के बीच काफी सम्मानित थे। खेल के साथ-साथ रविंदर पढ़ाई में भी सक्रिय थे। वे गढ़शंकर स्थित बब्बर अकाली मेमोरियल खालसा कॉलेज में बीए (BA) द्वितीय वर्ष के छात्र थे।

खेल जगत में शोक की लहर

रविंदर के आकस्मिक निधन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। नामधारी एफसी ने एक हृदयस्पर्शी संदेश शेयर करते हुए इसे क्लब के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। फुटबॉल फैंस और अन्य क्लबों ने भी इस युवा खिलाड़ी के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।



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PM Kisan 22nd Installment Status: आपको मिली PM Kisan की 22वीं किस्त? ये रहा स्टेटस चेक करने का सबसे आसान तरीका


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

PM Kisan Samman Nidhi Yojana: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 13 मार्च 2026 को असम के गुवाहाटी से बहुप्रतीक्षित ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (PM-KISAN) योजना की 22वीं किस्त जारी करेंगे। इस कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार 9.32 करोड़ से अधिक पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से 18,640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजेगी।

इस किस्त के साथ ही योजना के तहत अब तक वितरित की गई कुल धनराशि 4.27 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगी। इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिससे उन्हें बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों जैसे खर्चों में मदद मिलती है।

PM Kisan 22nd Installment Status

किसे मिलेगा योजना का लाभ?

इस किस्त का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने अपनी अनिवार्य e-KYC प्रक्रिया पूरी कर ली है और जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े हुए हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक सहायता केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे। इस बार विशेष रूप से 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान लाभार्थियों को भी इस वित्तीय सहायता का लाभ प्राप्त होगा, जो ग्रामीण स्तर पर महिला सशक्तिकरण को नई गति देगा।

PM Kisan: किस्त का स्टेटस कैसे चेक करें?

किसान अपनी राशि की स्थिति इन माध्यमों से जान सकते हैं:

SMS के जरिए: किस्त जारी होने पर लाभार्थियों को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश भेजा जाता है। बैंक से भी राशि जमा होने का अलर्ट प्राप्त होता है।

ATM का उपयोग: यदि मैसेज नहीं मिलता है, तो किसान नजदीकी ATM पर जाकर अपना बैलेंस चेक कर सकते हैं या मिनी स्टेटमेंट निकाल सकते हैं।

बैंक शाखा: किसान अपनी पासबुक लेकर संबंधित बैंक शाखा में जाकर इसे अपडेट या प्रिंट करवा सकते हैं।

आधिकारिक पोर्टल: किसान https://pmkisan.gov.in पर जाकर ‘Farmers Corner’ में ‘Know Your Status’ विकल्प के जरिए अपना विवरण देख सकते हैं।

With AI Inputs

ये भी पढ़ें: PM Kisan 22nd Installment: कितने बजे आएगी पीएम किसान की 22वीं किस्त? ऐसे चेक करें अपने अकाउंट का स्टेटस



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ओडिशा में कांग्रेस की रिजॉर्ट पॉलिटिक्स: राज्यसभा चुनाव से पहले हॉर्स ट्रेडिंग का डर, 8 विधायक बेंगलुरु भेजे गए; शिवकुमार कर रहे निगरानी


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भुवनेश्वर23 मिनट पहले

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राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने ओडिशा के 8 विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है। ये सभी विधायक दक्षिण बेंगलुरु के वंडरला रिजॉर्ट पहुंचे। ओडिशा कांग्रेस के MLA जिनमें चीफ व्हिप राजेन एक्का भी शामिल हैं, गुरुवार रात बेंगलुरु पहुंच गए।

इन कांग्रेस विधायकों में अशोक कुमार दास, प्रफुल्ल चंद्र प्रधान, पवित्र सांता, कद्रका अप्पाला स्वामी, सी.एस. राजन एक्का और सत्यजीत गोमांगो शामिल हैं। विधायक अपने परिवारों के साथ इस रिसॉर्ट में रुके हुए हैं। ओडिशा से कुल 14 लोग बेंगलुरु पहुंचे हैं।

पहले 6 विधायक को भेजा गया था, इसके बाद 2 और विधायक शुक्रवार दोपहर तक बेंगलुरु के रिजॉर्ट पहुंच गए। अब ओडिशा के PCC अध्यक्ष समेत 8 विधायक, उनके निजी सचिव और परिवार के सदस्य यहां मौजूद हैं। इनके लिए 20 कमरे बुक किए गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगामी चुनावों में क्रॉस-वोटिंग की अटकलों के बीच इन विधायकों की निगरानी कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार कर रहे हैं।

कांग्रेस ने ओडिशा में अभी तक किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन पार्टी ने बीजू जनता दल और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के साथ मिलकर एक संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता का समर्थन करने का फैसला किया है।

अप्रैल में ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटें खाली हो जाएंगी। राज्य से कुल चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, और पांच उम्मीदवार मैदान में हैं।

10 राज्यों की 37 सीटों को भरने के लिए ‘काउंसिल ऑफ स्टेट्स’ (राज्यसभा) के हर 2 साल में होने वाले चुनावों के लिए वोटिंग 16 मार्च को होनी है। वोटों की गिनती उसी दिन शाम 5 बजे होगी।

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विधायकों से मिलेंगे कर्नाटक के डिप्टी CM

कांग्रेस नेता बट्टाप्पा ने बताया कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आज इन विधायकों से मिलेंगे। शिवकुमार दोपहर में यहां आएंगे। मौजूद लोगों के अलावा और भी विधायक यहां आ सकते हैं। कमरे 15 मार्च तक के लिए बुक किए गए हैं। हमें नहीं पता कि वे किस कारण से और क्यों यहां आए हैं।

शनिवार सुबह तक चार और विधायकों के बेंगलुरु पहुंचने की उम्मीद है। पार्टी के छह विधायक इस समय विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में शामिल होने के लिए भुवनेश्वर में ही मौजूद हैं।

BJP-BJD ने अपने कैंडिडेट्स के नाम घोषित किए

BJD ने संतृप्त मिश्रा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, और BJP ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए ओडिशा पार्टी प्रमुख मनमोहन सामल और सुजीत कुमार के नाम का ऐलान किया है।

बीजू जनता दल ने गुरुवार को पार्टी के सभी विधायकों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया। इसमें विधायकों को निर्देश दिया गया कि वे भुवनेश्वर में होने वाली पार्टी की बैठकों में अनिवार्य रूप से मौजूद रहें।

विधायकों से कहा गया है कि वे 13 और 14 मार्च को नवीन निवास पहुंचें।



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IPS LOVE STORY: प्यार के आगे टूटी जाति की दीवार! किसान का बेटा बनेगा SP अंशिका वर्मा का दूल्हा


Uttar Pradesh

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IPS LOVE STORY: उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के दो तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी अब विवाह के मुकाम तक पहुंच गई है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई (SP Krishna Kumar Bishnoi) और बरेली की पुलिस अधीक्षक अंशिका वर्मा (SP Anshika Verma) जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। दोनों की शादी 28 मार्च को राजस्थान के बाड़मेर जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगी।

आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई उत्तर प्रदेश कैडर के 2018 बैच के अधिकारी हैं। उनका जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में एक किसान परिवार में हुआ। विदेश में पढ़ाई के दौरान उन्होंने फ्रांस सरकार की 40 लाख रुपये की स्कॉलरशिप हासिल की और पेरिस से मास्टर डिग्री ली।

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दूसरे प्रयास में पास की UPSC परीक्षा

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) के ट्रेड सेंटर में कंसल्टेंट के रूप में भी काम किया, जहां उन्हें सालाना 30 लाख रुपये का पैकेज मिला था। बाद में उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस की वर्दी पहनी।

इंजीनियरिंग छोड़ IPS बनीं अंशिका वर्मा

मूल रूप से प्रयागराज की रहने वाली अंशिका वर्मा ने नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अपने दूसरे प्रयास में 136वीं रैंक हासिल की। वर्तमान में बरेली में तैनात अंशिका सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 6 लाख 26 हजार फॉलोअर्स हैं।

राजस्थान में होंगे भव्य विवाह समारोह

दोनों परिवारों की सहमति के बाद शादी की रस्में राजस्थान में रखी गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मार्च को बाड़मेर के धोरीमना गांव में हल्दी और संगीत समारोह होगा, जिसके बाद 28 मार्च को विवाह होगा। 30 मार्च को जोधपुर के एक रिजॉर्ट में भव्य रिसेप्शन रखा जाएगा, जिसमें प्रशासनिक सेवा और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। हाल ही में होली के दौरान भी दोनों अधिकारी अपने खास अंदाज और डांस वीडियो के कारण चर्चा में रहे थे।

गोरखपुर में शुरू हुई थी Love Story

दोनों आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। उस समय गोरखपुर में पोस्टिंग के दौरान उनकी पहली मुलाकात हुई थी। कृष्ण कुमार बिश्नोई तब गोरखपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात थे, जबकि अंशिका वर्मा वहां प्रशिक्षण के दौरान अंडर ट्रेनिंग आईपीएस अधिकारी थीं। ड्यूटी के दौरान हुई यह मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यही दोस्ती समय के साथ एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। अब लगभग पांच साल बाद दोनों अपने रिश्ते को शादी के रूप में नई पहचान देने जा रहे हैं।



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‘ये सड़क मुस्लिमों के लिए नहीं’ लिखने वाली लड़कियां गिरफ्तार: बोलीं- सनातन के लिए 10 बार जेल जाने को तैयार, हमने कुछ गलत नहीं किया – Rishikesh(Dehradun) News


सड़क पर भड़काऊ शब्द लिखतीं लड़कियां और पुलिस की गाड़ी में बैठकर बोलतीं कि हमें कोई पछतावा नहीं।

दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर ‘ये सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है’ लिखने के मामले में यूपी पुलिस ने देहरादून की दो महिलाओं और एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तारी के बाद एक महिला आरोपी ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया और

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इस पूरे मामले में हिंदू रक्षा दल का नाम सामने आया था। संगठन के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने पहले ही सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए इसकी जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने कहा था कि यह सब उनकी जानकारी और संरक्षण में हुआ है। गिरफ्तारी के बाद भी उन्होंने कहा कि “मैं ही इनका गार्जियन हूं और शाम तक हम इनकी बेल करवा लेंगे।”

यह मामला 25 फरवरी को सामने आया था, जब देहरादून-सहारनपुर बॉर्डर के पास मोहंड स्थित एलिवेटेड रोड पर कुछ लोगों ने स्प्रे पेंट से सड़क किनारे ‘मुसलमानों के लिए यह रोड नहीं है’ और अंग्रेजी में ‘This road is not allowed for Muslims’ लिख दिया था। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

तीनों ही आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पुलिस बोली- वीडियो और अन्य साक्ष्यों पर हुई पहचान

बिहारीगढ़ थाना पुलिस के अनुसार, हाईवे किनारे स्प्रे पेंट से भड़काऊ नारे लिखने के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में देहरादून की रहने वाली सुलेखा, शारदा और जितेंद्र राघव के रूप में हुई है।

पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इनकी पहचान की गई थी। आरोप है कि तीनों ने हाईवे किनारे रेलिंग और सीमेंटेड ब्लॉक पर भड़काऊ नारे लिखे थे।

अब जानिए क्या था पूरा मामला और किसने ली थी जिम्मेदारी…

25 फरवरी को सामने आया था मामला

यह पूरा मामला 25 फरवरी को सामने आया था। उस दिन देहरादून-सहारनपुर बॉर्डर के पास मोहंड स्थित एलिवेटेड रोड पर दो महिलाओं ने स्प्रे पेंट से सड़क किनारे ‘मुसलमानों के लिए यह सड़क नहीं है’ लिख दिया था।

इस घटना का करीब 57 से 59 सेकेंड का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो में दो युवतियां हाईवे किनारे रेलिंग और सीमेंटेड ब्लॉक पर स्प्रे पेंट से लिखती दिखाई देती हैं, जबकि एक युवक मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बनाता नजर आता है।

वीडियो में दोनों महिलाएं गले में भगवा गमछा डाले दिखाई देती हैं। एक महिला अंग्रेजी में लिखती है “This road is not allowed for Muslims”, जबकि दूसरी महिला हिंदी में लिखती है कि यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है। लिखने के बाद दोनों महिलाएं ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाती भी दिखाई देती हैं।

दो युवतियां सीमेंटेड ब्लॉक पर लिखती हुई।

दो युवतियां सीमेंटेड ब्लॉक पर लिखती हुई।

NHAI कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) में कार्यरत कर्मचारी सुनील कुमार ने बिहारीगढ़ थाने में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि 26 फरवरी 2026 की शाम दिल्ली–देहरादून नेशनल हाईवे के मोहंड के पास बने एलिवेटेड रोड पर कुछ लोगों ने स्प्रे पेंट से रेलिंग पर आपत्तिजनक शब्द लिख दिए।

शिकायतकर्ता ने बताया कि सड़क किनारे लिखे गए संदेश में ‘मुसलमानों के लिए यह रोड नहीं है’ जैसे शब्द लिखे गए थे, जो आपत्तिजनक हैं। उन्होंने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और उपनिरीक्षक मोहित कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।

हिंदू रक्षा दल ने ली थी जिम्मेदारी

घटना सामने आने के बाद हिंदू रक्षा दल के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया था। पोस्ट में उन्होंने कहा था कि यह काम उनके संगठन की महिला कार्यकर्ताओं ने किया है और इसकी पूरी जिम्मेदारी वे लेते हैं।

दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा था कि यह कदम उनके कहने पर उठाया गया था। उन्होंने कहा कि यह सड़क हिंदुओं के टैक्स से बनी है और इसी कारण उनके संगठन की कार्यकर्ताओं ने यह लिखा।

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो आगे और जगहों पर भी इस तरह के संदेश लिखे जाएंगे। बातचीत के दौरान उन्होंने संविधान, धर्म और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी कई बातें भी कहीं थीं।

देहरादून के प्रिंस चौक पर स्थित हिंदू रक्षा दल के ऑफिस के बाहर लगा नोटिस।

देहरादून के प्रिंस चौक पर स्थित हिंदू रक्षा दल के ऑफिस के बाहर लगा नोटिस।

महिलाएं पहले भी बोल चुकीं- हमने कुछ गलत नहीं किया

इस मामले में जिन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है, उन्होंने भी दैनिक भास्कर से बात की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने कोई गलत काम किया है। हिंदू रक्षा दल की कार्यकर्ता सुलेखा ने कहा था कि उन्होंने सड़कों पर लिखा है और यदि जरूरत पड़ी तो आगे मस्जिदों पर भी लिखेंगे।

वहीं दूसरी कार्यकर्ता शारदा ने कहा था कि मुसलमान टैक्स नहीं देते, इसलिए उन्हें सड़क पर चलने से मना किया गया। उनका कहना था कि यह कदम उन्होंने अपने गुस्से के कारण उठाया था।

कार्यकर्ताओं के अनुसार उन्होंने ये क्यों लिखा

इस मामले में हिंदू रक्षा दल से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था कि उन्होंने गुस्से और आक्रोश में यह संदेश लिखा। सुलेखा राजपूत ने बताया कि वे सांगाखेड़ा गांव में एक कथित लव जिहाद के मामले को लेकर गई थीं, जहां एक हिंदू लड़की के घर नहीं पहुंचने की बात सामने आई थी। वहां से लौटते समय उनके मन में काफी आक्रोश था और उसी दौरान उन्होंने हाईवे किनारे स्प्रे पेंट से यह लिख दिया कि ‘यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है’।

संध्या राजपूत ने बातचीत में कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने कोई गलत काम किया है। उनका कहना था कि उन्होंने सिर्फ सड़क पर लिखा है और जरूरत पड़ी तो आगे और जगहों पर भी इस तरह के संदेश लिखेंगे।

—————— ये खबर भी पढ़ें…

‘मुसलमान टैक्स नहीं देते, उनके लिए रोड नहीं’:हिंदू रक्षा दल बोला- धर्म बचाना है तो संविधान छोड़ना होगा, इस्लाम ‘स्लो पॉइजन’ इन्हें पाकिस्तान भेजो

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देहरादून में दिल्ली नेशनल हाईवे पर सड़क किनारे पेंट से- ‘मुसलमानों के लिए यह रोड नहीं है’ लिखने वाली लड़कियां हिंदू रक्षा दल की कार्यकर्ताएं थीं। दैनिक भास्कर एप से की गई बातचीत में दोनों ही लड़कियों ने कहा है की उन्हें नहीं लगता की उन्होंने कुछ गलत किया है। (पढ़ें पूरी खबर)



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Israel Iran War: क्या संकट के बीच भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel? क्या है समुद्र पर तैरता हुआ ऑयल मार्केट?


International

oi-Siddharth Purohit

Israel Iran War: आपने थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों में सब्जियों, फलों और मछलियों के तैरते बाजार देखे होंगे, जहां नावों में लदा सामान एक खरीदार से दूसरे खरीदार तक जाता रहता है। कुछ ऐसा ही नजारा अब वैश्विक तेल बाजार में भी देखने को मिल रहा है। फर्क बस इतना है कि यहां सब्जियों या मछलियों की जगह रूसी कच्चा तेल है और नदियों की जगह हिंद महासागर और एशियाई समुद्रों में इसका कारोबार हो रहा है।

मझधार में फंसे तेल के टैंकर

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण Strait of Hormuz के पास समुद्री शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मूज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते तनाव की वजह से कई देशों को कहीं और से तेल की आपूर्ति ढूंढनी पड़ रही है। इसी कारण रूसी कच्चे तेल और ईंधन से भरे कई टैंकर अब एशियाई समुद्री मार्गों पर बिना तय डेस्टिनेशन के घूम रहे हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे तैरते बाजार में नावों पर बैठे व्यापारी खरीदार का इंतजार करते हैं।

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भारत को कैसे मिलेगा फायदा?

भारत में अभी तेल की किल्लत नहीं है। बकौल सरकारं अभी पर्याप्त तेल हमारे भंडार में है। लेकिन भारत अगर ठीक से इस मौके को भुनाए तो बहुत सारा तेल जो समुद्र में यूं ही पड़ा है, उसे बेहद कम दाम में खरीद सकता है। इससे भारत में तेल की कीमते भी कम हो सकेंगी और अगर ये युद्ध लंबा चलता है तो तेल की कमी होने का खतरा भी बिल्कुल न के बराबर होगा। चूंकि इसमें से 3.1 लाख टन तेल रिफाइंड है तो बहुत सारा पैसा और समय उसे प्रोसेस करने में भी बचेगा। भारत में रोजाना 7,07,000 टन कच्चा तेल 23 अलग-अलग रिफाइनरी में रिफाइन होता है। ऐसे में अगर देखें तो 6 महीने का स्टॉक एक साथ मिल सकता है।

कितनी कारगर है अमेरिका की छूट?

अमेरिकी सरकार द्वारा दी गई अस्थायी छूट के बाद एशियाई जल क्षेत्र में करीब 30 तेल टैंकरों में भरा रूसी कच्चा तेल और ईंधन अब खरीदने के लिए उपलब्ध हो गया है। यह छूट उन खेपों के लिए दी गई है जो पहले से ही समुद्र में थीं। Bloomberg और एनर्जी एनालिसिस फर्म Kpler के जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक इन टैंकरों में कम से कम 1.9 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल और करीब 3.1 लाख टन रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद मौजूद हैं।

बीच समुद्र में लग रही तेल टैंकरों की बोली

इनमें से कई जहाज Indian Ocean, Arabian Sea और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री मार्गों से गुजर रहे हैं। कुछ टैंकर सिंगापुर और मलेशिया जैसे स्थानों की ओर संकेत दे रहे हैं। ये जगहें अक्सर ऐसे वेटिंग रूम की तरह काम करती हैं जहां व्यापारी सौदे तय करते हैं और टैंकर खरीदार मिलने तक लंगर डाले रहते हैं। कई जहाजों पर ‘For Orders’ लिखा होता है, जिसका मतलब है कि उनका कोई तय ठिकाना नहीं है और उन्हें पहले खरीदने वाले देश को बेचा जा सकता है। आसान भाषा में आप इसे समझ सकते हैं कि बीच समुद्र में तेल टैंकरों की बोली लग रही है।

रूसी यूराल्स क्रूड ने फिर मचाई धूम

इन टैंकरों में रूस का Urals crude और अन्य ग्रेड का तेल शामिल है। Russia‑Ukraine War से जुड़े प्रतिबंधों के बाद रूस को यह तेल भारी छूट पर बेचना पड़ता था। लेकिन अब मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं। ऐसे में रूसी तेल एक बार फिर खरीदारों के लिए पहली पसंद बन गया है।

रूस को मिल रहा आर्थिक फायदा

यह स्थिति मॉस्को के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति पर खतरा बढ़ने के कारण कई खरीदार फिर से रूसी तेल की ओर रुख कर रहे हैं। इससे Vladimir Putin की सरकार को एक्सपोर्ट से ज्यादा कीमत मिल रही है। खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध को जारी रखने के लिए रूस के लिए तेल से मिलने वाला रिवेन्यू उनके लिए बेहद जरूरी हो।

भारत और चीन सबसे बड़े खरीदार

रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में India और China शामिल हैं। हाल के दिनों में इन दोनों देशों ने रूसी तेल का इम्पोर्ट काफी बढ़ा दिया है। इसकी वजह यह है कि उनकी रिफाइनरियां डर रही हैं कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट और बढ़ा तो वैश्विक आपूर्ति और प्रभावित हो सकती है। इसलिए वे पहले से ही ज्यादा से ज्यादा तेल खरीदकर सुरक्षित करना चाहती हैं।

समुद्र में बन गया है ‘फ्लोटिंग ऑयल मार्केट’

फिलहाल व्यापारियों का कहना है कि हिंद महासागर और एशियाई समुद्री क्षेत्रों के कुछ हिस्से अब सचमुच एक तैरते हुए बाजार जैसे दिखने लगे हैं। यहां पर व्यापारी और खरीददार दोनों ही तैर रहे हैं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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डिवोर्स की खबरों के बीच थलापति विजय को हुआ सैकोड़ों करोड़ का नुकसान, अधर में लटके 500 करोड़ रुपये!


Cinema

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सुपरस्टार Vijay इन दिनों अपनी पर्सनल प्रॉब्लम की वजह से चर्चा में हैं। हाल ही में उनके डिवोर्स की खबरें सामने आईं। इसके बाद उनकी लंबे समय से रिलीज के लिए अटकी फिल्म Jana Nayagan को लेकर अब एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के लिए की गई ओटीटी डील अब रद्द हो गई है। बताया जा रहा है कि Amazon Prime Video ने इस प्रोजेक्ट के डिजिटल राइट्स से पीछे हटने का फैसला किया है।

Thalapathy Vijay

रिलीज में देरी से बढ़ीं मुश्किलें
‘जन नायगन’ को विजय के अभिनय करियर की आखिरी फिल्म मानी जा रही है। शुरुआत में इसे 9 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज करने की प्लानिंग थी। लेकिन सेंसर बोर्ड और लीगल प्रोसेडिंग के कारण फिल्म तय समय पर रिलीज नहीं हो सकी। दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी फिल्म की नई रिलीज़ डेट सामने नहीं आई है। इस देरी के कारण मेकर्स पहले से ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

120 करोड़ की ओटीटी डील पर पड़ा असर
बताया जाता है कि पिछले साल प्राइम वीडियो ने फिल्म के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार लगभग 120 करोड़ रुपये में खरीदे थे। लेकिन रिलीज में लगातार हो रही देरी के चलते मेकर्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के बीच मतभेद बढ़ने लगे।रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलीज में डिले होने के चलते प्राइम वीडियो ने प्रोडक्शन कंपनी KVN Productions के साथ की गई डील खत्म करने का निर्णय लिया। हालांकि, इस संबंध में निर्माताओं या प्लेटफॉर्म की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।

सेंसर प्रक्रिया भी बनी देरी की वजह
फिल्म से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि Madras High Court के फैसले के बाद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने की मंजूरी मिल जाएगी। 9 मार्च को सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमेटी द्वारा फिल्म का रिव्यू दोबारा होना था, लेकिन एक सदस्य की तबीयत खराब होने के कारण यह प्रक्रिया टल गई। इस कारण फिल्म की रिलीज़ को लेकर असमंजस की स्थिति और बढ़ गई।

500 करोड़ के बजट की फिल्म पर मंडराया संकट
‘जन नायगन’ लगभग 500 करोड़ रुपये के भारी बजट में बनाई गई है। नवंबर 2025 तक फिल्म ने अपने नॉन-थिएट्रिकल राइट्स के जरिए करीब 390 करोड़ रुपये की कमाई कर ली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु के थिएट्रिकल राइट्स लगभग 100 करोड़ और ओवरसीज राइट्स करीब 80 करोड़ रुपये में बिके थे। वहीं T-Series ने म्यूजिक राइट्स लगभग 35 करोड़ रुपये में और Sun TV ने सैटेलाइट राइट्स करीब 55 करोड़ रुपये में खरीदे थे।

फिल्म के भविष्य को लेकर असमंजस
मौजूदा परिस्थितियों में यह भी कहा जा रहा है कि ओटीटी डील रद्द होने के बाद कुछ अन्य पार्टनर भी इस प्रोजेक्ट से दूरी बनाने लगे हैं। इन सब घटनाक्रमों के बीच अब फिल्म की रिलीज़ और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि दर्शक इसे विजय के करियर की आखिरी फिल्म के रूप में देखने के लिए उत्सुक हैं।



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PM Kisan: UP के किसानों के खाते में आज आएंगे 4335 करोड़ रुपए, तुरंत नोट करें हेल्पलाइन नंबर


Uttar Pradesh

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PM Kisan 22nd Installment: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) आज असम के दौरे के दौरान देश के करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) की 22वीं किस्त जारी करेंगे। इस बड़ी सौगात का सबसे व्यापक असर उत्तर प्रदेश (UP) में देखने को मिलेगा, जहां के 2.15 करोड़ से अधिक किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

यूपी के पात्र किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के जरिए कुल 4335.11 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि हस्तांतरित की जा रही है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती देगी।

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PM Kisan Samman Nidhi: UP के किसानों के खाते में आएंगे 4335 करोड़ रुपए

उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य में यह किस्त एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। आंकड़ों की बात करें तो यूपी के किसानों को अब तक (21वीं किस्त तक) कुल 94668.58 करोड़ रुपये की धनराशि सम्मान निधि के रूप में मिल चुकी है। आज शुक्रवार को जारी होने वाली 4335.11 करोड़ रुपये की नई किस्‍त के साथ ही प्रदेश के किसानों को मिलने वाली कुल सहायता राशि का आंकड़ा 99003.69 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जो देश के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सर्वाधिक है।

राज्य सरकार और केंद्र के साझा प्रयासों से उत्तर प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक मदद तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने 19 नवंबर 2025 को कोयम्बटूर से किसानों को सम्मान निधि की राशि जारी की थी। यूपी में इस बार विशेष ध्यान उन किसानों पर दिया गया है जिनका डेटा पूरी तरह सत्यापित है, ताकि राशि सीधे और सुरक्षित तरीके से उनके खातों में पहुंच सके।

PM Kisan: अटक सकती है आपकी किस्त

पीएम किसान योजना के तहत सरकार ने कुछ अनिवार्य नियम लागू किए हैं। यदि आपने ये दो काम पूरे नहीं किए हैं, तो आप लाभ से वंचित रह सकते हैं:

  • ई-केवाईसी (e-KYC): यह अनिवार्य प्रक्रिया है। इसके बिना आपकी पात्रता खतरे में पड़ सकती है।
  • भू-सत्यापन (Land Mapping): जिन किसानों की जमीन का सत्यापन रिकॉर्ड में अपडेट नहीं है, उनकी किस्त रोकी जा सकती है।

PM Kisan Samman Nidhi Status Check: पीएम किसान की किस्त आई या नहीं?

आप घर बैठे इन आसान स्टेप्स से अपनी किस्त की स्थिति जान सकते हैं:

  • 1. योजना के आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर जाएं।
  • 2. होमपेज पर ‘Know Your Status’ के विकल्प को चुनें।
  • 3. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें और कैप्चा कोड भरें।
  • 4. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP को सबमिट करें।
  • 5. आपके सामने स्क्रीन पर आपकी पेमेंट डिटेल आ जाएगी।

pm kisan samman nidhi status check by mobile number: तुरंत नोट करें हेल्पलाइन नंबर

  • मैसेज का इंतजार करें: किस्त जारी होने के बाद विभाग द्वारा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर सूचना भेजी जाती है।
  • हेल्पलाइन नंबर: किसी भी समस्या की स्थिति में आप 155261/011-24300606 पर कॉल कर सकते हैं।



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पीरियड्स में पेड लीव की मांग: सुप्रीम कोर्ट बोला- कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, सरकार पॉलिसी बनाने पर विचार करे




सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। CJI ने कहा- ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है। यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान मेंस्ट्रुअल लीव को अनिवार्य बनाने के संभावित सामाजिक परिणामों के बारे में चिंता जाहिर की। साथ ही याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस मामले को लेकर खुद कोई महिला कोर्ट में नहीं आई है। पेड मेंस्ट्रुअल लीव पर CJI के कमेंट्स मेंस्ट्रुअल लीव का मुद्दा तीसरी बार कोर्ट लेकर पहुंचा याचिकाकर्ता पेड मेंस्ट्रुअल लीव की याचिका लेकर शैलेंद्र मणि तीसरी बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। पहली याचिका का निपटारा फरवरी 2023 में किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता को केंद्रीय महिला एवं बाल मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई थी। 2024 में याचिकाकर्ता ने फिर कोर्ट में याचिका लगाई और कहा कि मंत्रालय ने उनके पक्ष में दिए गए जवाब पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उस याचिका का निपटारा जुलाई 2024 में किया गया था, जिसमें केंद्र सरकार से नीतिगत निर्णय लेने को कहा गया था। नई याचिका की मांगें… देश के 4 राज्यों में मेंस्ट्रुअल लीव पर बने नियम ———————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… SC बोला- पेरेंट्स की सैलरी OBC क्रीमी लेयर का आधार नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और प्राइवेट या PSU कर्मचारियों के बच्चों को अलग-अलग तरीके से आरक्षण दिया जाए तो यह अनुचित भेदभाव होगा। पढ़ें पूरी खबर…



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