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Dubai Gold Rate Today: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच दुबई में सोने की कीमत में लगी आग, 9 मार्च का क्या है रेट?


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oi-Sumit Jha

Dubai Gold Rate Today: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल के बीच जारी युद्ध की आहट ने न केवल वैश्विक राजनीति को गरमाया है, बल्कि ‘गोल्ड सिटी’ दुबई के सर्राफा बाजार में भी हलचल तेज कर दी है। सुरक्षित निवेश की तलाश में दुनिया भर के निवेशक अब सोने की ओर भाग रहे हैं, जिससे कीमतों में भारी अनिश्चितता देखी जा रही है।

अमेरिका की बढ़ती दखलअंदाजी और खाड़ी देशों में अस्थिरता के बीच, दुबई में सोने के दाम अब सिर्फ व्यापारिक आंकड़े नहीं, बल्कि युद्ध की स्थिति के सूचक बन गए हैं। अगर आप इस तनावपूर्ण माहौल में खरीदारी या निवेश की सोच रहे हैं, तो आज के भाव आपकी रणनीति तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।

Dubai Gold Rate Today

Gold price in Dubai today: दुबई में सोने का रेट

दुबई में आज सोने की कीमतें भारतीय रुपए में काफी आकर्षक बनी हुई हैं। 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹15,669 प्रति ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹14,513 प्रति ग्राम चल रही है। 18 कैरेट सोना यहाँ ₹11,929 प्रति ग्राम के आसपास मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद, दुबई का बाजार वैश्विक खरीदारों के लिए अब भी सोने की सबसे भरोसेमंद मंडी बना हुआ है।

Gold price India: भारत में सोने का हाल

भारत के पटना जैसे शहरों में आज सोने की कीमतों में आग लगी हुई है। यहाँ 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव ₹16,369 प्रति ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर है। वहीं, आभूषणों के लिए उपयोग होने वाला 22 कैरेट सोना ₹15,004 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना ₹12,277 प्रति ग्राम पर बिक रहा है। वैश्विक युद्ध की स्थिति और घरेलू मांग में भारी इजाफे के कारण भारतीय बाजारों में कीमतें दुबई के मुकाबले काफी ऊपर बनी हुई हैं।

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Dubai vs India gold price: दुबई से खरीदारी में कितनी बचत?

अगर बचत की बात करें, तो दुबई और भारत (पटना) के बीच सोने की कीमतों में प्रति ग्राम ₹700 से ₹850 तक का बड़ा अंतर है। यानी 10 ग्राम सोना खरीदने पर आप सीधे तौर पर ₹7,000 से ₹8,500 तक की बचत कर सकते हैं। हालांकि, इसमें मेकिंग चार्जेस और टैक्स में मिलने वाली छूट सोने पर सुहागा का काम करती है। यही वजह है कि बड़ी मात्रा में निवेश करने वाले लोग अब भी दुबई के बाजार को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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चांदी की चमक और ताजा भाव

सोने की तेजी का असर चांदी पर भी साफ़ दिख रहा है। भारत में आज चांदी की कीमत ₹284.90 प्रति ग्राम दर्ज की गई है, जो प्रति किलोग्राम ₹2,84,900 के स्तर पर पहुंच गई है। औद्योगिक मांग और युद्ध के कारण सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर चांदी की ओर बढ़ते रुझान ने इसके दामों को मजबूती दी है। छोटे निवेशकों के लिए चांदी अब भी सोने के मुकाबले एक सुलभ और मुनाफे वाला निवेश विकल्प बनी हुई है।



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Gold Silver Price Today: सर्राफा बाजार में दिखी गिरावट; चांदी ₹3800 तक टूटी, सोना ₹1350 सस्ता


Sone Chandi ka Aaj ka Rate: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेज हो रहे टकराव के बावजूद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर युद्ध या भू-राजनीतिक संकट के समय सोना सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है और इसकी कीमतों में तेजी आती है, लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग दिखाई दिया। चांदी की कीमत 3860 रुपये गिरकर 2.65 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1350 रुपये गिरकर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी का भाव

कॉमेक्स (COMEX) पर सोना लगभग 1.3 प्रतिशत गिरकर करीब 5,090 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी की कीमत में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई आर्थिक और बाजार से जुड़े कारक काम कर रहे हैं।

क्या है गिरावट के कारण?

सबसे बड़ी वजह हाल के महीनों में सोने की तेज रैली के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करना है। पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई थी, जिसके बाद कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कई निवेशक सोने से निकाले गए पैसे का इस्तेमाल वैश्विक शेयर बाजारों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी कर रहे हैं, क्योंकि युद्ध के कारण इक्विटी बाजारों में भी गिरावट देखने को मिल रही है।

तेल की कीमतों में बड़ी उछाल

इस बीच तेल की कीमतों में तेज उछाल भी सोने पर दबाव बना रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 17 प्रतिशत बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि WTI क्रूड लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। फारस की खाड़ी में स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंका के कारण तेल बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे कीमतों में तेजी आई है। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, ऐसे में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों का माहौल सोने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता।

इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डाल रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है। डॉलर मजबूत होने पर सोना अन्य मुद्राओं में खरीदने वाले निवेशकों के लिए महंगा पड़ता है, जिससे इसकी मांग घट जाती है।

साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी सोने के आकर्षण को कम कर रही है, क्योंकि निवेशकों को ब्याज देने वाले सुरक्षित विकल्प अधिक आकर्षक लगने लगते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों का रुख काफी हद तक पश्चिम एशिया के हालात, तेल की कीमतों, अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों की दिशा पर निर्भर करेगा।



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Balendra Shah Wife: कौन हैं बालेन शाह की पत्नी सबीना काफ्ले? फिल्मी है फ्यूचर PM की की लव स्टोरी


International

oi-Puja Yadav

Balendra Shah Wife Sabina Kafle: नेपाल की राजनीति में मचे महा-संग्राम और ‘बालेन क्रांति’ के बीच, हर किसी की जुबान पर एक ही नाम है बालेंद्र शाह (Balendra Shah)। ‘राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) की ऐतिहासिक जीत ने बालेंद्र शाह को देश का सबसे कद्दावर युवा नेता बना दिया है।

नेपाल के अगले संभावित प्रधानमंत्री के रूप में उभर रहे बलेन की राजनीतिक सफलता के पीछे एक मजबूत स्तंभ उनकी पत्नी सबीना काफ्ले (Sabina Kafle) हैं।

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अक्सर लाइमलाइट से दूर रहने वाली सबीना और बलेन की प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह सफर आज देश की सत्ता के शिखर तक पहुंच गया है।

Who is Balendra Shah Wife Sabina Kafle: कौन हैं सबीना काफ्ले?

सबीना काफ्ले नेपाल की जानी-मानी कवयित्री और लेखिका हैं। उन्होंने नोबल कॉलेज से पब्लिक हेल्थ की पढ़ाई की है। सबीना ने ‘दीपालता’ (Deepalta) नाम का एक उपन्यास भी लिखा है, जो काफी चर्चित रहा। वह एक स्थापित कवयित्री और उपन्यासकार हैं।

उनके लेखन में अक्सर प्यार, जीवन और भावनाओं से जुड़ी गहरी बातें देखने को मिलती हैं। सबीना मुख्य रूप से प्रेम, जीवन और मानवीय भावनाओं पर भावुक और अर्थपूर्ण लेखन के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी संवेदनशील लेखन शैली और रचनात्मक सोच ही वह चीजें थीं, जिन्होंने बालेन शाह को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

Balendra Shah Love Story: ऑनलाइन चैट्स और कविताओं से शुरू हुआ प्यार

बलेन और सबीना की प्रेम कहानी डिजिटल युग की एक खूबसूरत मिसाल है। सबीना काफ्ले एक लेखिका और कवयित्री हैं। वह सोशल मीडिया पर अपनी प्रेम कविताएं साझा किया करती थीं।

पेशे से रैपर और गीतकार बलेन शाह सबीना के शब्दों और उनकी रचनात्मकता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने खुद उनसे संपर्क किया। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला शुरू हुआ और यह दोस्ती प्यार में बदल गई।

Balendra Shah Marriage: 2017 में हुई थी पहली मुलाकात और शादी

सालों तक ऑनलाइन बात करने के बाद, यह जोड़ा पहली बार साल 2017 में एक साहित्यिक कार्यक्रम (Literary Event) में मिला। बलेन को सबीना का सरल स्वभाव और रचनात्मक व्यक्तित्व बेहद पसंद आया। लगभग एक साल के डेटिंग के बाद, फरवरी 2018 में दोनों ने एक सादे निजी समारोह में परिवार की मौजूदगी में शादी कर ली। साल 2023 में इस कपल के जीवन में एक नन्ही परी (बेटी) का आगमन हुआ, जिससे उनका परिवार पूरा हुआ।

Balendra Shah का राजनीतिक सफर और सबीना का साथ

बलेन शाह का करियर एक रोलर-कोस्टर राइड जैसा रहा है। उन्होंने एक रैपर के रूप में शुरुआत की, फिर कंस्ट्रक्शन बिजनेस संभाला और 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। आज वह नेपाल के युवाओं के लिए ‘परिवर्तन के मसीहा’ बन चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सबीना ने बलेन के कठिन समय में उन्हें मानसिक संबल दिया और उनकी रचनात्मकता को राजनीति में एक विजन के रूप में ढालने में मदद की। जैसे-जैसे चुनाव परिणाम बलेन शाह को प्रधानमंत्री की कुर्सी के करीब ला रहे हैं, सबीना काफ्ले की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। नेपाल की जनता एक ऐसी ‘फर्स्ट फैमिली’ की उम्मीद कर रही है जो शिक्षित हो, कला प्रेमी हो और आधुनिक सोच रखती हो। बलेन और सबीना इस सांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं।



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8th CPC: 50 लाख कर्मियों व 70 लाख पेंशनरों के वेतन-भत्ते क्या हों? आयोग की ओर से पूछे गए 18 सवालों के जवाब


आठवें केंद्रीय वेतन आयोग ने अपने वेबसाइट पर विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारी संगठनों और व्यक्तियों से 18 प्रश्नों के जवाब मांगे हैं। वेतन आयोग की तरफ से जो सवाल किए गए हैं, उनमें कर्मियों के वेतन भत्तों में वृद्धि से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं। जैसे, वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन से आर्थिक परिदृश्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इनमें से कुछ प्रभाव उपभोग और बचत को बढ़ावा देने के संदर्भ में सकारात्मक हैं, जबकि अन्य उच्च राजकोषीय घाटे, मुद्रास्फीति की संभावना और समग्र विकास एवं जन कल्याण जैसे अन्य व्ययों में कटौती के संदर्भ में नकारात्मक हैं। देश की आकांक्षाओं के आधार पर, 8वें वेतन आयोग के लिए समग्र दृष्टिकोण का आधार क्या हो। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव और स्टाफ साइड की जेसीएम के वरिष्ठ सदस्य सी. श्रीकुमार ने सभी 18 सवालों के जवाब दिए हैं। 

प्रश्न 1. वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन से आर्थिक परिदृश्य पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इनमें से कुछ प्रभाव उपभोग और बचत को बढ़ावा देने के संदर्भ में सकारात्मक हैं, जबकि अन्य उच्च राजकोषीय घाटे, मुद्रास्फीति की संभावना और समग्र विकास एवं जन कल्याण जैसे अन्य व्ययों में कटौती के संदर्भ में नकारात्मक हैं। अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और देश की आकांक्षाओं के आधार पर, 8वें वेतन आयोग के लिए समग्र दृष्टिकोण का आधार क्या हो? 

उत्तर: सीपीसी का मार्गदर्शक सिद्धांत समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता होना चाहिए। सरकारी कर्मचारी लोक सेवा वितरण की रीढ़ हैं। उद्देश्य यह होना चाहिए कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के अनुरूप आर्थिक रूप से पर्याप्त सुविधा प्रदान की जाए। कर्मचारियों को बोझ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदार के रूप में देखा जाए। कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि, सरकार के लिए केवल व्यय नहीं है, बल्कि मानव पूंजी में निवेश है जो उपभोग, बचत और आर्थिक विकास को गति प्रदान करता है। 2027 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। जीडीपी 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होगी।  राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 4.3% पर नियंत्रित है। 2016 से राजस्व संग्रह दोगुने से अधिक है, ऐसे में 8वें वेतन आयोग से आग्रह है कि किसी भी तरह से कर्मचारियों की वास्तविक आय में कमी न आए।

प्रश्न 2. आठवें सीपीसी को सरकारी और निजी क्षेत्र में वेतन/भत्तों के बीच सापेक्षता का मूल्यांकन कैसे करना चाहिए? 

उत्तर: सरकारी और निजी क्षेत्र के वेतनमान की तुलना करना कठिन और अव्यवहारिक है, क्योंकि दोनों सेवाओं के उद्देश्य मूल रूप से भिन्न हैं। लोक सेवा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है, जबकि निजी क्षेत्र का उद्देश्य अपने लाभ को अधिकतम करना है। केंद्रीय कर्मचारी मुख्य रूप से लोक सेवा वितरण, नीति कार्यान्वयन और नियामक कार्यों में लगे रहते हैं, जबकि रेलवे और रक्षा क्षेत्र के औद्योगिक कर्मचारी उत्पादन और परिचालन गतिविधियों में शामिल होते हैं। इनमें बहुत जोखिम और खतरे होते हैं। उनकी भूमिकाओं के लिए व्यापक प्रशासनिक क्षमता, नीतिगत समझ, समन्वित योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता होती है। संप्रभु जिम्मेदारियों, राष्ट्रव्यापी जवाबदेही, हस्तांतरणीय सेवा शर्तों, आचार संहिता आदि को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय कर्मचारी कहीं अधिक बेहतर वेतनमान और भत्तों के हकदार हैं। 

प्रश्न 3. क्या आठवें सीपीसी को सभी सरकारी विभागों में एकसमान क्षैतिज सापेक्षता पर विचार करना चाहिए, या क्या उसे क्षेत्र-विशिष्ट बेंचमार्किंग पर विचार करना चाहिए, जहां सरकारी कार्यों की तुलना उनके संबंधित उद्योग समकक्षों से की जाए। उदाहरण के लिए, क्या सरकारी इंजीनियरों के वेतन की तुलना निजी क्षेत्र की इंजीनियरिंग फर्मों से, वित्तीय अधिकारियों के वेतन की तुलना बीएफएसआई क्षेत्र से और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की तुलना निजी स्वास्थ्य सेवा से की जानी चाहिए? 

उत्तर: सीपीसी को केंद्र सरकार के कार्यों की तुलना निजी क्षेत्र से क्षेत्र-विशिष्ट बेंचमार्किंग के आधार पर नहीं करनी चाहिए। केंद्रीय कर्मचारियों के कर्तव्य, जवाबदेही और सेवा शर्तें मौलिक रूप से भिन्न हैं। केंद्रीय कर्मचारी कड़े संवैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय नियमों के अधीन कार्य करते हैं। उनके सभी कार्य और निर्णय आचार संहिता, संसदीय जांच, सतर्कता निगरानी और सूचना अधिकार प्रावधानों के अधीन होते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और निजी क्षेत्र अलग-अलग प्रदर्शन मापदंडों और व्यावसायिक उद्देश्यों, जिनमें लाभ कमाना भी शामिल है, के तहत कार्य करते हैं। इसके विपरीत, केंद्र सरकार के कर्मचारी राष्ट्रीय नीतियों को लागू करते हैं, सार्वजनिक निधियों का प्रबंधन करते हैं और पूरे देश में सुशासन सुनिश्चित करते हैं। सभी सरकारी विभागों में एकसमान क्षैतिज सापेक्षता बनाए रखी जानी चाहिए। क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर सापेक्षता का सिद्धांत यह हो कि समान श्रेणी के पदों का वेतन समान हो और ऊर्ध्वाधर सापेक्षता बनी रहे। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतनमान तदनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए। 

प्रश्न 4: सरकारी नौकरियों में कार्यकाल की सुरक्षा, प्रशिक्षण व्यवस्था, आवास, अवकाश का नकदीकरण, नियमित वेतन वृद्धि, चिकित्सा कवरेज, समयबद्ध पदोन्नति, मुद्रास्फीति-अनुक्रमित वेतन और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी विशेषताएं पाई जाती हैं। निजी क्षेत्र के सापेक्ष वेतन निर्धारण और मुआवजा मैट्रिक्स तैयार करते समय इन विशेषताओं को किस प्रकार ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर: सरकारी सुविधाएं महज अतिरिक्त लाभ नहीं हैं। ये कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा के आधार स्तंभ हैं। नौकरी की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, आवास और नियमित वेतन वृद्धि सरकारी सेवा को आकर्षक बनाती हैं, विशेषकर उन लोगों के लिए, जो लोक सेवा के प्रति समर्पित हैं। ये सुविधाएं निजी क्षेत्र में मिलने वाली त्वरित पदोन्नति की कमी, सुनिश्चित पदोन्नति के लिए आवधिक कैडर पुनर्गठन आदि और लचीलेपन की भरपाई करती हैं। ऐसे में इन सुविधाओं का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों की तुलना के लिए नहीं किया जाना चाहिए। एक आदर्श नियोक्ता के रूप में, सरकार यह सुनिश्चित करे कि उसके कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को ऐसी सुविधाएं और लाभ प्राप्त हों जो सरकारी सेवा से जुड़ी गरिमा, स्थिरता और सार्वजनिक जवाबदेही को दर्शाते हों। सभी भत्तों के सूचकांक को जीवन यापन की लागत और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़कर वार्षिक वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा, चिकित्सा देखभाल और सेवानिवृत्ति लाभों को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

प्रश्न 5. सरकारी रोजगार संगठित क्षेत्र का हिस्सा है। रोजगार बल का एक बहुत बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था में कार्यरत है। आपके विचार से सरकार द्वारा लागू किए गए प्रवेश स्तर के वेतनमानों का अनौपचारिक या गिग क्षेत्र में वेतन प्रथाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: सामान्यतः, सरकारी कर्मचारियों का प्रारंभिक वेतन देश के लिए एक आदर्श मानदंड निर्धारित करता है। यद्यपि इसका अनौपचारिक या अस्थायी क्षेत्र पर सीधा प्रभाव न पड़े, फिर भी यह दर्शाता है कि समाज, ईमानदारी से किए गए कार्य के लिए उचित और जीवन निर्वाह योग्य वेतन किसे मानता है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होने पर, अन्य क्षेत्रों को भी अपने मानकों में सुधार करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, भले ही यह चरणबद्ध तरीके से हो। एक आदर्श नियोक्ता के रूप में सरकार को एक सम्मानजनक और प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना प्रदान करनी चाहिए ताकि कठोर, योग्यता-आधारित प्रक्रियाओं के माध्यम से भर्ती की गई प्रतिभाओं को आकर्षित और बनाए रखा जा सके। निजी क्षेत्र के वेतन से कोई भी सीधी तुलना भ्रामक होगी, क्योंकि निजी क्षेत्रों का मुआवजा विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से भिन्न होता है। वह उनकी व्यावसायिक लाभप्रदता से जुड़ा होता है। सरकारी कर्मचारियों का वेतन इतना हो कि जिससे उनकी गरिमा सुनिश्चित हो सके। 

प्रश्न 6. सरकारी वेतन में सेवा अवधि के लिए मुआवजा (आमतौर पर वार्षिक वेतनवृद्धि), महंगाई/जीवन निर्वाह लागत में बदलाव के लिए क्षतिपूर्ति (महंगाई भत्ता) और वरिष्ठता/योग्यता के आधार पर उच्च जिम्मेदारियों के लिए वेतन (पदोन्नति पर वेतनमान) जैसे तत्व स्पष्ट रूप से शामिल होते हैं। इस संदर्भ में, आपके विचार से वेतन आयोगों द्वारा अपनाए गए “उपयुक्तता कारक” का क्या अर्थ होना चाहिए? ऐसे उपयुक्तता कारक का मुख्य उद्देश्य क्या हो?

उत्तर: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्ते विशेषाधिकार नहीं हैं, बल्कि ये वास्तविक आय को बनाए रखने और बदलती आर्थिक परिस्थितियों में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाते हैं। कई सरकारी विभागों में ग्रुप सी और बी कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति में देरी होती है। इससे कर्मचारियों को आवश्यक कौशल, अनुभव प्राप्त करने और निर्धारित निवास अवधि पूरी करने के बावजूद उचित करियर प्रगति और उचित वेतन संशोधन से वंचित होना पड़ता है। इसे सुनिश्चित करने के लिए, एआईडीईएफ समयबद्ध तरीके से पदोन्नति पदानुक्रम में 30 वर्षों की सेवा अवधि में न्यूनतम 5 गारंटीकृत पदोन्नति की मांग कर रहा है। ऐसे फिटमेंट फैक्टर का समर्थन करते हैं जो परिवार की इकाइयों को तीन के बजाए पांच रखे। मध्यम रैंकों के लिए वेतन में सार्थक सुधार प्रदान करे। सभी भत्तों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाना चाहिए। कर्मचारी अपनी मेहनत को केवल वार्षिक वेतन वृद्धि में ही नहीं, बल्कि अपने वेतन में भी प्रतिबिंबित होते देखना चाहते हैं। 

प्रश्न 7. केंद्र सरकार में सचिव का वेतन आमतौर पर उच्चतम स्तर का होता है। इसे निर्धारित करने का सिद्धांत क्या होना चाहिए?

उत्तर: सर्वोच्च पद वाले व्यक्ति पर अत्यधिक उत्तरदायित्वों का भार होता है, जिसमें राष्ट्रीय नीतियों के मूल्यांकन और प्रतिपादन तथा उनके सफल कार्यान्वयन में योगदान देना शामिल है। उसे उच्च स्तर की जवाबदेही के अधीन रहते हुए न्यासी उत्तरदायित्व का निर्वाह करना होता है। राजनीतिक तटस्थता बनाए रखनी होती है। सरकारी सेवा सुव्यवस्थित है, जिसमें कर्तव्यों को संहिताबद्ध किया गया है। लेखापरीक्षा, सतर्कता और संसदीय निरीक्षण के माध्यम से उनकी निगरानी की जाती है। वाणिज्यिक संगठनों के विपरीत, व्यक्तिगत या समूह प्रदर्शन को मापने के लिए कोई वस्तुनिष्ठ या एकसमान मानदंड नहीं है।इसलिए, यह प्रस्ताव देते हैं कि सचिव की एंट्री सेलरी, न्यूनतम वेतन के 10 गुना से अधिक नहीं हो। 

प्रश्न 8. ‘ग्रुप ए’ की सभी सेवाओं के लिए वेतनमान कैसे निर्धारित हों, ताकि अपेक्षित योग्यता वाले उम्मीदवारों को आकर्षित किया जा सके? क्या वेतनमान प्रवेश स्तर पर अधिक आकर्षक होने चाहिए या कुछ वर्षों की सेवा के बाद? 

उत्तर: आज के युवा, पेशेवर सरकारी नौकरियों की तुलना आकर्षक निजी नौकरियों से करते हैं। शुरुआती वेतन बहुत कम है, तो सरकार प्रतिभा खो देती है। शुरुआती वेतन को आकर्षक बनाना जरुरी है ताकि प्रतिभाशाली युवा, पहले दिन से ही खुद को मूल्यवान और प्रेरित महसूस करें। सरकार में बने रहने और अच्छा प्रदर्शन करने वालों के लिए स्पष्ट और निष्पक्ष पदोन्नति होनी चाहिए। मध्य-करियर और वरिष्ठ पदों पर वेतन निष्ठा, अनुभव और योग्यता को पुरस्कृत करना चाहिए। ये नए उम्मीदवारों की उपेक्षा की कीमत पर नहीं हो। 8वें सीपीसी द्वारा उच्च शुरुआती वेतन, नियमित वेतन वृद्धि और समय-सीमा के अनुसार पदोन्नति की सिफारिश करके एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। हालांकि निजी क्षेत्र की तरह वेतन न तो संभव है और न ही वांछनीय। आठवां वेतन आयोग यह सुनिश्चित करे कि सरकारी सेवा के आकर्षण को बनाए रखने के लिए इस असमानता को दूर किया जाए। 

प्रश्न 9. विभिन्न वेतनमानों के संबंध में वेतन वृद्धि की दरें और आवृत्ति कैसे निर्धारित की जानी चाहिए? क्या ये एकसमान होनी चाहिए या सेवा के दौरान वेतनमानों/समय अवधियों में भिन्न हों? 

उत्तर: वेतन वृद्धि की आवृत्ति वार्षिक होनी चाहिए। वर्तमान वार्षिक वेतन वृद्धि दर 3% है, जिसे संशोधित करके 6% करने की आवश्यकता है। वजह, आज सरकारी कर्मचारियों को निरंतर अपने कौशल को उन्नत करना, नवीनतम तकनीक और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाना, अनुभव प्राप्त करना और समय के साथ अपनी दक्षता बढ़ाना आवश्यक है। उच्च वेतन वृद्धि दर बेहतर दक्षता, उत्पादकता और लोक प्रशासन में योगदान को बेहतर ढंग से दर्शाएगी। मनोबल और दक्षता बनाए रखने के लिए पदोन्नति के रास्तों को संरक्षित और मजबूत किया जाना चाहिए। 

प्रश्न 10. समय के साथ, कार्य की विशिष्ट प्रकृति, यात्रा जैसे व्यय, तैनाती स्थल से जुड़ी कठिनाई/जोखिम/विविधताओं के लिए मुआवजे आदि के आधार पर कई भत्ते शुरू किए गए हैं। इनमें से अधिकांश आंशिक रूप से मुद्रास्फीति अनुक्रमित हैं। एक वैकल्पिक दृष्टिकोण केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा अपनाई गई कैफेटीरिया पद्धति है, जिसमें कुछ भत्तों को छोड़कर, अधिकारी मूल वेतन की समग्र सीमा के अधीन, सुविधाओं और भत्तों के एक समूह में से चुनते हैं। आपकी राय में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कौन सा दृष्टिकोण अधिक उपयुक्त है?

उत्तर: केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में कैफेटेरिया प्रणाली अपनाई जाती है। यह केंद्रीय सरकारी सेवाओं के लिए उपयुक्त विकल्प नहीं है, क्योंकि पारंपरिक भत्ते समानता सुनिश्चित करते हैं और जोखिम भरे व खतरनाक कार्यों, कठिन स्थानों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों या विशिष्ट कठिनाइयों का सामना कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा करते हैं। वर्तमान प्रणाली में आवास भत्ता, यात्रा भत्ता, जोखिम एवं कठिनाई भत्ता, रात्रि ड्यूटी भत्ता, नर्सिंग भत्ता, रोगी देखभाल भत्ता, अवकाश यात्रा भत्ता और चिकित्सा सुविधाएं जैसे सभी भत्ते सुनिश्चित हैं और इन्हें जारी रखा जाना चाहिए। इनकी दरों में तीन गुना वृद्धि की जा जाए। 

प्रश्न 11. सातवें वेतन आयोग ने जनवरी 2014 में आकलन किया था कि केंद्रीय सरकार में लगभग 47 लाख सेवारत कर्मचारी थे। इनमें सीएपीएफ, रेलवे और रक्षा बल शामिल थे। पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 52 लाख थी। 2025-26 में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों की संख्या लगभग 50 लाख है, जबकि पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 70 लाख है। पेंशनभोगियों की संख्या में वृद्धि से सरकार के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। पेंशनभोगियों की उचित अपेक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ राजकोषीय प्रभाव को नियंत्रणीय सीमा के भीतर रखने के लिए कौन से उपाय सहायक हो सकते हैं?

उत्तर: पेंशन सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए जीवन रेखा है। सर्वोच्च न्यायालय ने लगातार यह माना है कि “पेंशन नियोक्ता की मनमानी पर दिया जाने वाला कोई उपहार नहीं है, बल्कि लंबी और समर्पित सेवा के लिए मुआवजे का एक आस्थगित हिस्सा है।” सेवानिवृत्ति लाभ भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका के अधिकार का हिस्सा हैं। इसलिए पेंशन लाभों का भुगतान न होना या अपर्याप्त सुरक्षा गंभीर संवैधानिक चिंताएं पैदा करती है। पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी उपाय है जिसका उद्देश्य वृद्धावस्था में गरिमा और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दशकों की सार्वजनिक सेवा के बाद पेंशनभोगियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जीने में सक्षम होना चाहिए। पेंशन पर होने वाला व्यय, कुल राजस्व व्यय का लगभग 4% होने का अनुमान है। ऐसे में पेंशन संबंधी देनदारियां नियंत्रण में रहेंगी। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने बाबत सीपीसी विचार करे। 

प्रश्न 12. सातवें वेतन आयोग का गठन 2014 में हुआ और यह 1.1.2016 से लागू हुआ। तब से अब तक मुद्रास्फीति की दर पिछले दशकों की तुलना में कम रही है। यह अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) में भी परिलक्षित होता है, जिसका उपयोग महंगाई भत्ता की गणना के लिए किया जाता है। क्या आठवें वेतन आयोग को एक मिश्रित सूचकांक प्रणाली अपनानी चाहिए, जिसमें मुद्रास्फीति से सुरक्षा और औपचारिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि दोनों को ध्यान में रखा जाए? प्रत्येक घटक के लिए उचित अनुपात क्या होगा और कार्यान्वयन में किन बातों का ध्यान रखना होगा? अगले 10 वर्षों में मुद्रास्फीति/कमीशन सूचकांक में वृद्धि के संबंध में आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?

उत्तर: महंगाई भत्ता कर्मचारियों के लिए जीवन रेखा है, जो उनकी वास्तविक आय को मुद्रास्फीति से कुछ हद तक सुरक्षित रखता है। महंगाई भत्ता (एआईसीपीआई) (औद्योगिक श्रमिक सूचकांक) जिसका उपयोग वर्तमान में महंगाई भत्ता गणना के लिए किया जाता है, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक मुद्रास्फीति को सटीक रूप से प्रतिबिंबित नहीं करता है। सीपीआई बास्केट में कई वस्तुओं का मूल्य रियायती या राशन (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) दरों पर निर्धारित किया जाता है, जबकि कर्मचारी और पेंशनभोगी खुले खुदरा बाजार में काफी अधिक कीमतों पर सामान खरीदते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद मुद्रास्फीति में तेजी से वृद्धि हुई है, विशेष रूप से आवास, परिवहन और चिकित्सा खर्चों में। चौथे और छठे केंद्रीय वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों के उपभोग पैटर्न को दर्शाने वाले एक अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बनाने की सिफारिश की थी। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को वास्तविक मजदूरी की सुरक्षा और आय में कमी को रोकने के लिए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक अलग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सिफारिश करनी चाहिए।

प्रश्न 13. केंद्र सरकार के लगभग 70% कर्मचारी रेलवे, सीएपीएफ और रक्षा बलों में कार्यरत होते हैं। उनके वेतन और भत्तों का निर्धारण करते समय किन विशेष मौद्रिक या गैर-मौद्रिक कारकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर: रक्षा विभाग के वर्दीधारी कर्मियों और नागरिक कर्मचारियों, रेलवे कर्मचारियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को अद्वितीय जोखिमों, कठिनाइयों और जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ता है। उनके वेतन और भत्ते इन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने चाहिए। भारतीय सशस्त्र बल (सेना, नौसेना और वायुसेना) और सीएपीएफ हमारे देश की सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्षा विभाग के नागरिक कर्मचारी हमारे देश की रक्षा के लिए सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। रेलवे कर्मचारी प्रतिदिन 2 करोड़ यात्रियों के परिवहन के अलावा, पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे सातों दिन कार्यरत हैं। ये वेतन, भत्ते और पेंशन में बेहतर व्यवहार के हकदार हैं।

प्रश्न 14. वैज्ञानिक अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग आदि जैसे विशिष्ट विभागों/क्षेत्रों में काम करते हैं। उनके वेतनमान तय करते समय किन उचित मापदंडों को ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर: वैज्ञानिकों का वेतन प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और आजीवन सीखने को प्रोत्साहित करने वाला होना चाहिए। इससे भारत अपने अंतरिक्ष, परमाणु, रक्षा अनुसंधान एवं विकास, जल संसाधन, मौसम विज्ञान, भूविज्ञान, कृषि मिशन आदि के लिए विश्व स्तरीय प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने में सक्षम होगा। उनके कार्य के महत्व को देखते हुए, उनका वेतन पैकेज इतना आकर्षक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होना चाहिए कि देश की सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आकर्षित कर सके, जिसमें विदेश में कार्यरत अनिवासी भारतीय (एनआरआई) पेशेवर और शोधकर्ता भी शामिल हैं। 

प्रश्न 15. सशस्त्र बलों के कर्मियों को वर्तमान में सैन्य सेवा वेतन दिया जाता है। यह उनके कर्तव्यों की विशेष प्रकृति को ध्यान में रखते हुए किया गया था। इस संदर्भ में और उनके कार्यों की बदलती प्रकृति को देखते हुए, सैनिकों, नौसैनिकों और वायुसेना कर्मियों का वेतन कैसे निर्धारित किया जाना चाहिए? यह सरकारी नौकरी के शुरुआती वेतन या सीएपीएफ/पुलिस में कांस्टेबल के वेतन से किस प्रकार संबंधित होना चाहिए?

उत्तर: सशस्त्र बलों के कर्मियों को उनके जोखिम, तत्परता, सतर्कता और बलिदानों के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए। हम स्थिर सैन्य सेवा वेतन को गतिशील जोखिम एवं तत्परता प्रीमियम से बदलने का समर्थन करते हैं, जो सीएपीएफ/पुलिस और नागरिक प्रवेश स्तरों से कम से कम 25% अधिक होना चाहिए। अग्निवीर के नाम पर सशस्त्र बलों में निश्चित अवधि के रोजगार को समाप्त किया जाए। अग्निवीर के रूप में चयनित और नियुक्त सभी कार्मिक नियमित  हों। उनका प्रवेश वेतन आकर्षक होना चाहिए, जिसमें स्पष्ट वेतन वृद्धि और आवास, राशन आदि जैसे मजबूत गैर-मौद्रिक लाभ शामिल हों। सीआरपीएफ कर्मियों को सीमा ड्यूटी पर तैनात सैन्य कर्मियों के समान उचित लाभ मिलने चाहिएं। देश में आंतरिक और बाह्य सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होने के नाते वे बेहतर वेतन/भत्ते के भी हकदार हैं।

प्रश्न 16. देश में सेवारत सैन्य कर्मियों की तुलना में सैन्य पेंशनभोगियों की संख्या कहीं अधिक है। 2025-26 में रक्षा पेंशन पर होने वाला व्यय रक्षा वेतन और भत्तों पर होने वाले व्यय से अधिक होने की संभावना है। अनुमानों के अनुरूप समग्र रक्षा पेंशन बिल में वृद्धि होने से, उपकरण और शस्त्रों की खरीद, उनके रखरखाव और रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। रक्षा जनशक्ति लागत और पेंशन बिल में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए आप क्या बदलाव सुझाएंगे?

उत्तर: रक्षा कर्मियों ने राष्ट्र के लिए अपना यौवन और स्वास्थ्य न्योछावर कर दिया है। किसी भी सुधार का उद्देश्य उनके बलिदान का सम्मान करना और सेवानिवृत्ति के बाद उनके सम्मान को सुनिश्चित करना होना चाहिए। सशस्त्र बलों के लिए परिभाषित गैर-अंशदायी वृद्धावस्था पेंशन योजना जारी रहनी चाहिए। राष्ट्र की सुरक्षा प्रेरित और सम्मानित कर्मियों पर निर्भर करती है। लागत में कटौती से इस भरोसे को कभी भी कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय वर्ष 2025-26 में रक्षा पेंशन के लिए ₹1,60,795 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो ₹6,81,210.27 करोड़ के कुल रक्षा बजट का लगभग 23.60% है। यह आवंटन राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में सेवा करने वालों के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रक्षा कर्मी असाधारण बलिदान देते हैं। वित्तीय बाधाएं या धन की कमी, कभी भी देश के सशस्त्र बलों के कर्मियों और पूर्व सैनिकों के प्रति उसके दायित्व को कमजोर नहीं करनी चाहिए। 

प्रश्न 17. उत्पादकता से जुड़ा बोनस (पीएलबी) कुछ सरकारी कर्मचारियों जैसे रेलवे और डाक कर्मचारियों को दिया जाता है। इन बोनस में सशस्त्र बलों के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं। उत्पादकता और प्रदर्शन में उत्कृष्टता को पुरस्कृत करने के लिए बोनस संरचना को किस प्रकार पुनर्परिभाषित किया जा सकता है? क्या पीएलबी/तदर्थ बोनस एक समान आधार पर (जैसे सभी के लिए 60 दिनों का वेतन) दिया जाना जारी रहना चाहिए या व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर इसमें अंतर किया जाना चाहिए?

उत्तर: सरकारी तंत्र में व्यक्तिगत प्रदर्शन पर बोनस की कोई अवधारणा संभव नहीं है। यह सभी कर्मचारियों का सामूहिक कार्य है, चाहे वह रेलवे जैसे औद्योगिक प्रतिष्ठान हों या रक्षा उत्पादन और अन्य इकाइयां। कर्मचारी बोनस नियमित वेतन के अतिरिक्त भुगतान होते हैं, जिनका उद्देश्य प्रदर्शन को पुरस्कृत करना, मनोबल बढ़ाना और उत्पादकता में सुधार करना है। पीएलबी योजना में न्यूनतम 30 दिनों के वेतन के बराबर गारंटीकृत बोनस होना चाहिए। बोनस का भुगतान कर्मचारियों के वास्तविक मूल वेतन + महंगाई भत्ता (डीए) पर किया जाए। 

प्रश्न 18. पिछले कुछ वर्षों में पार्श्व प्रवेश के रूप में संविदात्मक नियुक्तियों का प्रयास किया गया है। क्या आपको लगता है कि इसे विस्तारित किया जाना चाहिए। अंशकालिक कार्य, लचीला समय आदि जैसी अन्य प्रथाओं को सरकार में मध्य/उच्च स्तरों पर लागू किया जाना चाहिए ताकि अधिक प्रतिभा का लाभ उठाया जा सके? ऐसा करने के क्या लाभ और हानियां हो सकती हैं?

उत्तर:  एआईडीईएफ का दृढ़ मत है कि सरकारी विभागों में स्थायी, चिरस्थायी और मुख्य प्रकृति के कार्यों को आउटसोर्स या ठेके पर नहीं दिया जाना चाहिए। सरकारी विभागों में निश्चित अवधि के रोजगार भी उचित नहीं हैं, क्योंकि ये सभी प्रकार की नियुक्तियाँ शोषणकारी प्रकृति की हैं। निरंतर, संप्रभु, कौशल और अनुभव की आवश्यकता वाले कार्य सरकार के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में रहने चाहिए, ताकि जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित हो सके। संविदात्मक और निश्चित अवधि के रोजगार आदि कर्मचारियों के मनोबल, नौकरी की सुरक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा वितरण की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। मुख्य सेवा क्षेत्रों के अंधाधुंध निगमीकरण और निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।



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Gold Rate Today: हफ्ते की शुरुआत में सोना धड़ाम! एक झटके में ₹5000 से ज्यादा सस्ता, 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट


🔹दिल्ली 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹मुंबई 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹अहमदाबाद 24 कैरेट – ₹1,63,690 | 22 कैरेट – ₹1,50,040 | 18 कैरेट – ₹1,15,700 🔹चेन्नई 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹कोलकाता 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹हैदराबाद 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹जयपुर 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹भोपाल 24 कैरेट – ₹1,63,690 | 22 कैरेट – ₹1,50,040 | 18 कैरेट – ₹1,15,700 🔹लखनऊ 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹चंडीगढ़ 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹पुणे 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹बेंगलुरु 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹सूरत 24 कैरेट – ₹1,63,690 | 22 कैरेट – ₹1,50,040 | 18 कैरेट – ₹1,15,700 🔹पटना 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹रांची 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹भुवनेश्वर 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹अमृतसर 24 कैरेट – ₹1,63,790 | 22 कैरेट – ₹1,50,140 | 18 कैरेट – ₹1,15,780 🔹इंदौर 24 कैरेट – ₹1,63,690 | 22 कैरेट – ₹1,50,040 | 18 कैरेट – ₹1,15,700 🔹नागपुर 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650 🔹कोच्चि 24 कैरेट – ₹1,63,630 | 22 कैरेट – ₹1,49,990 | 18 कैरेट – ₹1,15,650



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सर्टिफाइड एक्सीलेंस- यूरोपीय संघ की गुणवत्ता की गारंटी भारत की मेज तक


एक यूरोपीय सेब या कीवी सिर्फ एक फल नहीं है। यह यात्रा है जो पोलैंड और ग्रीस के जिम्मेदारी से प्रबंधित बागानों से लेकर भारत की दुकानों की शैल्फ तक जाती है, और इसके पीछे दुनिया के कुछ सबसे सख्त खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता प्रमाणन का समर्थन है। गार्डन ऑफ यूरोप अभियान के माध्यम से, भारत में उपभोक्ता यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर EU में बना सेब और कीवी उत्कृष्टता की गारंटी के साथ आता है।

यूरोपीय किसान एक प्रमाणन ढांचे के तहत काम करते हैं, जो खाद्य सुरक्षा, स्थिरता, और पूर्ण ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह जिम्मेदार खेती और पर्यावरण की देखभाल को बढ़ावा देता है, जबकि HACCP उत्पादन के हर चरण में खाद्य सुरक्षा जोखिमों से सुरक्षा करता है।

 

IFS और BRCGS मानक बागान से पैकेजिंग तक कड़ाई से स्वच्छता, गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स प्रक्रियाओं को बनाए रखते हैं। कामगारों की भलाई भी इस प्रणाली का हिस्सा है –GRASP प्रमाणन प्रमाणित बागानों में न्यायसंगत श्रम प्रथाओं की सुरक्षा करता है।

  

ये प्रमाणपत्र इस बात का प्रमाण हैं कि हर फल सावधानीपूर्वक निगरानी में उगाया, तोड़ा, पैक किया और परिवहन किया गया है, जो EU और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करता है।

 

भारतीय उपभोक्ता अब अपने भोजन की सुरक्षा और मूल का अधिक महत्व देते हैं, और ये प्रमाणपत्र दोनों में भरोसा प्रदान करते हैं। चयनात्मक हाथ से तोड़ना, जलवायु-स्मार्ट कटाई और ठंडे श्रृंखला की लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित करते हैं कि सेब और कीवी ताज़ा, स्वच्छ और स्वाद से भरपूर पहुंचें। स्थिरता भी इसमें शामिल है, जैसे कि कंपोस्ट-आधारित उर्वरक, जल-कुशल सिंचाई और कीटनाशक उपयोग में कमी।

 

खरीदारी करते समय ‘EU origin’ वाले लेबल और प्रमाणन लोगो देखें, या कुछ पैकेजिंग पर QR कोड स्कैन करके ट्रेसबिलिटी विवरण प्राप्त करें। अधिक जानकारी के लिए देखें: www.appleandkiwi.eu



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West Asia Crisis: पश्चिम एशिया की जंग से कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 100 डॉलर प्रति बैरल के पार


ईरान में चल रहे युद्ध का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो पिछले साढ़े तीन साल में पहली बार हुआ है। यह वृद्धि तेल के उत्पादन और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने (शिपिंग) में आ रही बाधाओं के कारण हुई है।

कीमतों में जबरदस्त उछाल

जब बाजारों में रविवार को ट्रेडिंग फिर से शुरू हुई, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत 107.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। यह शुक्रवार के मुकाबले 16.5 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, अमेरिका में बनने वाले वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत भी 106.22 डॉलर प्रति बैरल के पार कर गई, जो शुक्रवार से 16.9 प्रतिशत अधिक है। बाजार में ट्रेडिंग जारी रहने के साथ इन कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।

यह उछाल पिछले हफ्ते ही देखने को मिला था, जब अमेरिकी क्रूड के दाम 36 प्रतिशत और ब्रेंट क्रूड के दाम 28 प्रतिशत बढ़ गए थे। युद्ध अब अपने दूसरे हफ्ते में है और इसने उन इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है जो फारस की खाड़ी से तेल और गैस के उत्पादन और आवागमन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहा खतरा

एक स्वतंत्र रिसर्च फर्म के अनुसार, हर दिन लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) बैरल कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है। इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह जलडमरूमध्य ईरान के पास है और इससे सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे देशों का तेल और गैस का परिवहन होता है। लेकिन ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण अब टैंकर इस रास्ते से जाने से कतरा रहे हैं।

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उत्पादन में कटौती और आपूर्ति की चिंता

तेल के निर्यात में कमी आने और भंडारण (स्टोरेज) टैंकों के भरने के कारण इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अपने तेल उत्पादन को कम कर दिया है। इसके अलावा, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान, इस्राइल और अमेरिका ने भी तेल और गैस से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए हैं, जिससे दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

पिछली कीमतों से तुलना और आर्थिक असर

अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स आखिरी बार 30 जून 2022 को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था, जब यह 105.76 डॉलर पर पहुंचा था। वहीं, ब्रेंट क्रूड 29 जुलाई 2022 को 104 डॉलर प्रति बैरल पर था।

1 मार्च को इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद से तेल की कीमतों में यह वैश्विक बढ़ोतरी वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। इससे यह डर पैदा हो गया है कि ऊर्जा के बढ़ते दाम महंगाई को और बढ़ाएंगे और अमेरिकी उपभोक्ताओं के खर्च करने की क्षमता को कम करेंगे, जो कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा

अमेरिका में रविवार को एक गैलन (लगभग 3.78 लीटर) सामान्य पेट्रोल की कीमत 3.45 डॉलर तक पहुंच गई, जो एक हफ्ते पहले से लगभग 47 सेंट ज्यादा है। डीजल की कीमत लगभग 4.6 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 83 सेंट की वृद्धि है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने आश्वासन दिया है कि पेट्रोल की कीमतें जल्द ही 3 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ जाएंगी और यह समस्या कुछ हफ्तों की है, महीनों की नहीं।

क्या बोले विशेषज्ञ?

कुछ विशेषज्ञ और निवेशक मानते हैं कि अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

ईरान में हमले और चेतावनी

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि रविवार तड़के तेहरान में तेल के गोदामों और एक टर्मिनल पर इस्राइल के हमलों में चार लोगों की मौत हो गई। इस्राइल की सेना का कहना है कि इन गोदामों का इस्तेमाल ईरान मिसाइलें दागने के लिए ईंधन के तौर पर कर रहा था। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि युद्ध का असर तेल उद्योग पर और बढ़ेगा।

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चीन पर भी असर की आशंका

ईरान हर दिन लगभग 16 लाख (1.6 मिलियन) बैरल तेल बेचता है, जिसमें से ज्यादातर चीन खरीदता है। अगर ईरान से तेल की आपूर्ति रुक जाती है, तो चीन को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे ऊर्जा की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

प्राकृतिक गैस और शेयर बाजार में गिरावट

युद्ध के दौरान प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, हालांकि तेल जितनी नहीं। रविवार देर रात यह 3.33 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक फीट पर बिक रही थी, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 4.6 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई है।

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Crude Oil के दाम में उछाल, रेट 100 USD प्रति बैरल के पार, आपके शहर में क्या है पेट्रोल-डीजल का रेट?


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oi-Ankur Sharma

Crude Oil: मध्य-पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच गहराता संघर्ष अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालने वाला है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है, ये 100 USD प्रति बैरल के पार दाम पहुंच गए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में पिछले 4 सालों की ये सबसे बड़ी तेजी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि यह युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी संभव है। संघर्ष शुरू होने से पहले जो कच्चा तेल लगभग 62 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह महज एक सप्ताह के भीतर ही 90 डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। जिसके बाद आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल महंगा होगा?

crude oil

फिलहाल भारत सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि स्थिति पर नजर है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है इसलिए अभी तक तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। हालांकि एक्सपर्ट कह रहे हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें 95 डॉलर के ऊपर जाती है और आगे भी बनी रहती हैं, तो भारतीय तेल कंपनियां 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रख सकती हैं। आपको बता दें कि भारत 30 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल सीधे मध्य-पूर्व से खरीदते हैं।

आपके शहर में क्या है पेट्रोल-डीजल का दाम?

  • नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72 | डीजल ₹87.62
  • मुंबई: पेट्रोल ₹104.21 | डीजल ₹92.15
  • कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94 | डीजल ₹90.76
  • चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75 | डीजल ₹92.34
  • अहमदाबाद: पेट्रोल ₹94.49 | डीजल ₹90.17
  • बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹89.02
  • हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46 | डीजल ₹95.70
  • जयपुर: पेट्रोल ₹104.72 | डीजल ₹90.21
  • लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69 | डीजल ₹87.80
  • पुणे: पेट्रोल ₹104.04 | डीजल ₹90.57
  • चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30 | डीजल ₹82.45
  • इंदौर: पेट्रोल ₹106.48 | डीजल ₹91.88
  • पटना: पेट्रोल ₹105.58 | डीजल ₹93.80
  • सूरत: पेट्रोल ₹95.00 | डीजल ₹89.00
  • नासिक: पेट्रोल ₹95.50 | डीजल ₹89.50

मई 2022 के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता है लेकिन पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। इस वक्त कच्चे तेल का रेट आग उगल रहा है इसलिए लोगों की चिंता बढ़ गई है।



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मिर्जापुर घूमने जा रहे हैं? मां विंध्यवासिनी धाम से लेकर सिद्धनाथ की दरी तक ये 5 जगहें जरूर देखें


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मिर्जापुर घूमने जा रहे हैं? ये 5 जगहें जरूर देखें, नजारा देख दिल होगा बाग-बाग

 

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Famous places in Mirzapur: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में घूमने के लिए कई धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं. यहां आने वाले पर्यटकों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंच गए हों. जिले के मां विंध्यवासिनी धाम को आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है, जहां देश-विदेश से भक्त दर्शन करने आते है. वहीं चुनार का किला इतिहास प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है, जिस पर मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक ने शासन किया. प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जरगो डैम, सिद्धनाथ की दरी और खड़ंजा फॉल पर्यटकों को खास आकर्षित करते है. कम दूरी में स्थित ये पांचों स्थल मिर्जापुर यात्रा को यादगार बना देते है.



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IND vs NZ: भारत की खिताबी जीत के बाद कैसा है पाकिस्तान में माहौल, मोहम्मद आमिर ने फिर खोला मुंह


Cricket

oi-Naveen Sharma

IND vs NZ: टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम को लेकर कई पाकिस्तानी पूर्व क्रिकेटरों ने बड़ी-बड़ी भविष्यवाणियां की थीं। सुपर-आठ चरण से पहले ही कुछ खिलाड़ियों ने दावा कर दिया था कि भारत ज्यादा आगे नहीं जा पाएगा। लेकिन जब फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली, तो वही खिलाड़ी अब टीम इंडिया की खुलकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज़ मोहम्मद आमिर भी उन खिलाड़ियों में शामिल थे जिन्होंने पहले भारतीय टीम की संभावनाओं पर सवाल उठाए थे। लेकिन फाइनल के बाद आमिर का अंदाज़ बदला हुआ दिखा। उन्होंने कहा कि भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहद शानदार क्रिकेट खेली और मुकाबले में पूरी तरह हावी रहा।

ind vs nz

आमिर के मुताबिक पिछले तीन मैचों में भारतीय टीम का प्रदर्शन लाजवाब रहा और उसी का नतीजा है कि भारत चैंपियन बना। उन्होंने खास तौर पर संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की बल्लेबाज़ी की तारीफ की और कहा कि इन दोनों की पारियों ने मैच की दिशा तय कर दी।

तनवीर के ढीले पड़े तेवर

उधर पाकिस्तान के पूर्व गेंदबाज़ तनवीर अहमद ने भी एक वीडियो जारी कर भारत की जीत को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। तनवीर ने कहा कि हम बातें करते रह गए और भारत ट्रॉफी जीतकर चला गया। उन्होंने यह भी माना कि भारतीय टीम लगातार तीसरा आईसीसी खिताब जीत चुकी है और मौजूदा समय में उसे हराना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।

तनवीर अहमद ने कहा कि भारत की जीत इसलिए और बड़ी मानी जाएगी क्योंकि टीम में विराट कोहली, रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा जैसे सीनियर खिलाड़ी नहीं थे। इसके बावजूद भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ जिस तरह का खेल दिखाया, उससे साफ हो गया कि टीम की बेंच स्ट्रेंथ कितनी मजबूत है।

फाइनल मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 255 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की टीम दबाव में आ गई और 159 पर आउट हो गई। भारतीय गेंदबाज़ों ने समय-समय पर विकेट लेकर मैच पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और आखिरकार टीम इंडिया ने शानदार अंदाज़ में खिताब जीत लिया।



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