भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए अपने तिमाही औद्योगिक आउटलुक सर्वेक्षण का 115वां दौर शुरू किया। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए कारोबार की भावना का आकलन करना है।
आरबीआई की आर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सर्वेक्षण जुलाई-सितंबर 2026 की संदर्भ अवधि को कवर करेगा। इसमें वर्तमान कारोबारी स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा, अक्तूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए अपेक्षाओं का भी मूल्यांकन होगा। केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह सर्वेक्षण वर्तमान तिमाही और आगामी तिमाही के लिए कारोबारी भावनाओं का आकलन करता है।
सर्वेक्षण का उद्देश्य क्या है?
यह सर्वेक्षण विनिर्माण कंपनियों से प्रमुख कारोबारी संकेतकों पर प्रतिक्रियाएं प्राप्त करने के लिए है। इनमें मांग की स्थिति, वित्तीय स्थिति, रोजगार की स्थिति और मूल्य स्थिति शामिल हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सर्वेक्षण अगली दो तिमाहियों, यानी जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027 के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी मापदंडों पर भी दृष्टिकोण एकत्र करेगा। यह सर्वेक्षण विनिर्माण क्षेत्र में कारोबारी विश्वास और अपेक्षाओं का आकलन करने के लिए तिमाही आधार पर आयोजित किया जाता है।
सर्वेक्षण कौन आयोजित कर रहा है और कंपनियां कैसे भाग ले सकती हैं?
वर्तमान दौर के लिए, मेसर्स जेनेसिस मैनेजमेंट को आरबीआई द्वारा अपनी ओर से सर्वेक्षण आयोजित करने के लिए अधिकृत किया गया है। यह एजेंसी चुनिंदा विनिर्माण कंपनियों से सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए संपर्क करेगी। हालांकि, आरबीआई ने अन्य विनिर्माण कंपनियों को भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया है। वे केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर सर्वेक्षण अनुभाग से सर्वेक्षण प्रश्नावली डाउनलोड कर सकती हैं।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों का क्या होता है?
आरबीआई के अनुसार, इच्छुक कंपनियां प्रश्नावली भर सकती हैं। वे सर्वेक्षण दस्तावेज में दिए गए संपर्क विवरण का उपयोग करके ईमेल के माध्यम से विधिवत प्रमाणित प्रतिक्रियाएं जमा कर सकती हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सर्वेक्षण कारोबारी गतिविधि के विभिन्न पहलुओं पर विनिर्माण कंपनियों से गुणात्मक आकलन और अपेक्षाएं चाहता है।
इनमें मांग की स्थिति, वित्तीय स्थिति, रोजगार के रुझान और मूल्य का माहौल शामिल है। यह वर्तमान कारोबारी भावना के साथ-साथ भविष्य की तिमाहियों के लिए अपेक्षाओं का आकलन प्रदान करता है। आरबीआई नियमित रूप से औद्योगिक आउटलुक सर्वेक्षण के निष्कर्षों को सारांश प्रारूप में प्रकाशित करता है। यह व्यक्तिगत उत्तरदाताओं की गोपनीयता बनाए रखते हुए विनिर्माण क्षेत्र में कारोबारी विश्वास और अपेक्षाओं का संकेत प्रदान करने में मदद करता है।



