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Service Export: पश्चिम एशिया विवाद के बावजूद भारत की उपलब्धि, अप्रैल में सर्विस एक्सपोर्ट 12.7% उछला


पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी जबरदस्त ताकत दिखाई है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने में भारत के सर्विसेज व्यापार में आयात और निर्यात, दोनों मोर्चों पर शानदार विस्तार देखने को मिला है। इस तेजी ने स्पष्ट कर दिया है कि भू-राजनीतिक झटके भी फिलहाल भारत के सेवा क्षेत्र की रफ्तार को धीमी नहीं कर पा रहे हैं।

आंकड़ों की नजर में अप्रैल सेवा क्षेत्र का व्यापार

आरबीआई के अनुसार, भारत के सर्विस सेक्टर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए नए रिकॉर्ड बनाए हैं:


  • एक्सपोर्ट में बड़ा उछाल: अप्रैल में भारत के सेवा क्षेत्र का निर्यात 12.7 प्रतिशत की जोरदार ग्रोथ के साथ 37.021 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। 

  • साल की सबसे बड़ी ग्रोथ: व्यापार के मोर्चे पर मिली यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि यह इस पूरे कैलेंडर वर्ष में दर्ज की गई सबसे अधिक ग्रोथ है।

  • इंपोर्ट के आंकड़े: इसी अवधि में निर्यात के साथ-साथ सर्विस इंपोर्ट (आयात) में भी 8.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई और यह 18.417 अरब डॉलर रहा।

वैश्विक चुनौतियों को दी मात

व्यापार में यह शानदार ग्रोथ ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब पश्चिम एशिया में लगातार भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इस वैश्विक संकट ने न सिर्फ दुनिया भर के देशों की आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है, बल्कि इसके कारण भारतीय मुद्रा की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है। इन तमाम विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखा है।

क्या है अर्थव्यवस्था की असल ताकत?

भारतीय अर्थव्यवस्था की इस मजबूती का विस्तार से जिक्र आरबीआई ने अपनी 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में भी किया है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक नीतियों से जुड़ी भारी अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी भारत का बाहरी क्षेत्र व्यापक रूप से मजबूत और लचीला बना हुआ है। आरबीआई ने इस मजबूती के पीछे तीन बड़े कारणों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया है:


  • निर्यात बाज़ारों और उत्पादों में विविधता लाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयास।

  • सर्विसेज व्यापार में लंबे समय से बना हुआ भारी सरप्लस।

  • प्रवासी भारतीयों द्वारा देश में भेजी जाने वाली रकम यानी रेमिटेंस का स्थिर और लगातार प्रवाह।

अब आगे आउटलुक?

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का संकट और रुपये की कमजोरी भी भारत के सर्विस सेक्टर के मजबूत पहियों को रोक नहीं पाई है। निर्यात बाजार में लाई गई रणनीतिक विविधता, स्थिर रेमिटेंस और व्यापार घाटे को संतुलित करता सर्विस सेक्टर भारत की समग्र अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक ‘शॉक एब्जॉर्बर’ का काम कर रहा है। आने वाले समय में भी मजबूत वैश्विक मांग के दम पर सर्विस सेक्टर देश की आर्थिक विकास दर को स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।



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