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The Bonus Market Updates: उतार-चढ़ाव के बाद लाल निशान पर बंद हुआ बाजार, जानिए सेंसेक्स-निफ्टी का हाल


वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और भारतीय रुपये की कमजोरी का सीधा असर बुधवार को घरेलू शेयर बाजार पर देखने को मिला। दिन भर चले भारी उतार-चढ़ाव के बाद बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। इसका कारण निवेशकों की ओर से बरती जा रही सतर्कता रही। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक संकट और मुद्रा बाजार के दबाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि घरेलू बाजार विदेशी घटनाओं से पूरी तरह अछूते नहीं रह सकते।

बुधवार के कारोबारी सत्र के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 141.90 अंक यानी 0.18 प्रतिशत लुढ़ककर 75,867.80 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 इंडेक्स भी 6.55 अंक यानी 0.03 प्रतिशत टूटकर 23,907.15 के स्तर पर आ गया। बाजार में दिन भर खरीदारी और बिकवाली के बीच भारी खींचतान चलती रही, लेकिन वैश्विक संकेतों के कमजोर होने के कारण अंततः बिकवाली का दबाव हावी रहा। रुपये पर दबाव के बावजूद अंत में रुपया डॉलर के मुकाबले 1 पैसा बढ़कर 95.69 (अस्थायी) पर स्थिर रहा।

सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान वाला शेयर कौन?

बाजार के इस गिरावट भरे माहौल में सबसे ज्यादा नुकसान देश के प्रमुख ऋणदाता एचडीएफसी (एचडीएफसी) बैंक के शेयरों को उठाना पड़ा। 45 करोड़ रुपये के ब्याज भुगतान से जुड़ी एक आंतरिक जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद निवेशकों के बीच काफी घबराहट फैल गई। इसके चलते सेंसेक्स पर एचडीएफसी बैंक के शेयर ‘टॉप लूजर’ (सबसे ज्यादा नुकसान वाले शेयर) साबित हुए और इनमें करीब तीन प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, बड़े शेयरों (लार्ज-कैप) में आई इस सुस्ती और दबाव के बावजूद बाजार में सब कुछ निराशाजनक नहीं रहा। व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) ने इस वैश्विक अस्थिरता के बीच भी काफी मजबूती दिखाई। जहां एक तरफ मुख्य सूचकांक लाल निशान में बंद हुए, वहीं ब्रॉडर मार्केट हरे निशान में अपना कारोबारी सत्र खत्म करने में कामयाब रहा। 

उतार-चढ़ाव से जुड़े इंडेक्स से क्या संकेत?

बाजार की स्थिति को गहराई से समझने के लिए इंडिया वीआईएक्स के आंकड़ों पर गौर करना भी अहम है। बाजार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता को मापने वाला यह इंडेक्स छह प्रतिशत गिरकर 15.24 के स्तर पर आ गया। इंडिया वीआईएक्स में आई यह कमी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारतीय बाजार के निवेशकों के बीच कोई भारी घबराहट नहीं है। 



कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह बताते हैं कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता और रुपये को मजबूती नहीं मिलती, तब तक बड़े शेयरों में उठापटक जारी रह सकती है। लेकिन ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन यह भरोसा जरूर दिलाता है कि बाजार का बुनियादी ढांचा संकट के बीच भी टिके रहने की क्षमता रखता है।



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