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रायगढ़ पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है जो लोक सेवा केंद्र की आड़ में कॉल सेंटर चला रहा था. गिरोह ने शादी का झांसा देकर देश भर के 7693 लोगों से करीब 1.11 करोड़ रुपये की वसूली की. पुलिस ने 25 युवतियों समेत 26 को दबोचा है.
सांकेतिक तस्वीर (AI Generated)
रायपुर. बढ़ती उम्र के साथ कई लोग शादी को लेकर चिंता करने लगते हैं. ऐसे में वो अक्सर मैट्रिमोनियल साइट का रूख करते हैं. लेकिन कई बार छोटी-मोटी वैवाहिक वेबसाइट बनाकर लोगों को ठग भी लिया जाता है. ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सामने आया है. यहां फर्जी मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर चल रहे एक बहुत बड़े साइबर ठगी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है, जहां पर लड़कियां शादी के लिए बेचैन युवाओं से फर्जी दुल्हन बनकर बात करती थीं. पुलिस ने इस मामले में 25 युवतियों समेत कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह इतना शातिर था कि इसने अब तक देशभर के 7,693 लोगों को अपना निशाना बनाया और उनसे लगभग 1.11 करोड़ रुपये ठग लिए. जांच के दौरान पता चला कि रायगढ़ के दरोगा पारा स्थित एक केंद्र में बाहर से ‘लोक सेवा केंद्र’ का बोर्ड लगा था, ताकि किसी को शक न हो, लेकिन अंदर असल में एक अवैध कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था.
पुलिस की पूछताछ में जैसे-जैसे परतें खुलती गईं, एक बेहद संगठित अपराध की कहानी सामने आई. यह गिरोह सबसे पहले सोशल मीडिया और यूट्यूब पर युवतियों की आकर्षक और सुंदर प्रोफाइल बनाता था. लोगों का भरोसा जीतने के लिए ये सुंदर तस्वीरों के साथ भावनात्मक परिचय और भरोसा पैदा करने वाले वीडियो अपलोड करते थे. हर वीडियो के साथ एक संपर्क नंबर शेयर किया जाता था, जिस पर कॉल करते ही ठगी का जाल बिछना शुरू हो जाता था. कॉल सेंटर में काम करने वाली युवतियां खुद को ‘संभावित दुल्हन’ बताकर लोगों से बात करती थीं. हैरानी की बात यह है कि इन युवतियों को बकायदा ट्रेनिंग दी गई थी और उन्हें बात करने के लिए एक तय ‘स्क्रिप्ट’ दी जाती थी. शुरुआत में वे बहुत ही सामान्य और भावनात्मक बातचीत कर सामने वाले का भरोसा जीतती थीं. जब पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ जाता और रिश्ता आगे बढ़ाने की बात करता, तब वे उसे रजिस्ट्रेशन, मीटिंग या परिवार से मुलाकात के नाम पर फंसाती थीं.
फिर शुरू होता था पैसे ऐंठने का खेल
शादी के लिए लड़के जैसे ही हामी भर देते, दुल्हन के रुप में बात करने वाली लड़कियां अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे ऐंठने का काम करने लगीं. युवाओं से किस्तों में पैसे जमा कराए जाते थे. जैसे ही पीड़ित बड़ी रकम जमा कर देता, गिरोह के सदस्य अचानक उससे संपर्क तोड़ देते थे और उसका नंबर ब्लॉक कर देते थे. पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी कपिल गर्ग है. कपिल ने अपनी लोक सेवा केंद्र की आईडी निरस्त होने के बाद इस आपराधिक रास्ते को चुना और बेरोजगार युवतियों को जोड़कर ठगी का यह साम्राज्य खड़ा किया. गिरोह ने पीड़ितों से कई दिनों तक लगातार बात कर शादी तय होने का पूरा भरोसा दिलाया था, जिससे लोग आसानी से उनके बहकावे में आ गए. पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं. इस मामले में धोखाधड़ी, संगठित अपराध और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
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